लाखों की लागत वाली पुलिया ढलाई के एक दिन बाद ही गिरी,


गोरखपुर: (
मानवी मीडियाजहां एक तरफ प्रदेश में भ्रष्टाचार की बोली बोलने वाले अधिकारियों पर सरकार की गाज गिर रही है तो वहीं कुछ ऐसे ठेकेदार भी हैं, जो शासन में बैठे अधिकारियों से गठबंधन करके शहर में ठेकेदारी कर रहे हैं। ठेका मिलने के बाद दो नंबर के माल का मिलावट करके अपनी ठेकेदारी चमका रहे। ठेकेदार महज चंद पैसों के लिए जनता की जान जोखिम में डाल देते हैं। कुछ ऐसा ही सीएम सिटी गोरखपुर में देखने को मिला है।

गोरखपुर के महानगर वार्ड नंबर 40 रुद्रपुर (दिवान बाजार) का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां 4 लाख की लागत वाली एक पुलिया का निर्माण कराया जा रहा था। इस पुलिया के निर्माण के लिए नगर निगम द्वारा टेंडर भी निकाला गया था। जिसका टेंडर एक ठेकेदार को मिला था। वहीं, इस पुलिया का ढलाई शुक्रवार रात को हुई और शनिवार सुबह ही पुलिया भरभरा कर गिर गई। बताया जा रहा है कि पुलिया के ढलाई का काम मानक के पूरी तरीके से विपरीत कराया जा रहा था, नतीजा पुलिया ढलाई के एक दिन बाद ध्वस्त हो गई।

एक दिन बाद ही गिर गई पुलिया

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। स्थानीय लोगों ने बताया कि पुलिया के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग करने से यह हादसा हुआ। पुलिया निर्माण के शुरुआती दिन से ही निर्माण में मिलावटी समान इस्तेमाल हो रहा था। जिसके बाद के एक दिन बाद ही पुलिया भरभरा कर गिर गई। इस संबंध में वहां काम करवाने वाले एक व्यक्ति से बात की गई तो उसने अपना नाम नसीम (ठेकेदार) बताते हुए कहा कि 8 मीटर की पुलिया को बनाना है, जिसमें 4 मीटर चौड़ी दीवार इस तरफ से लेकर उस तरफ तक बनानी है। इसमें बीम का काम भी किया जाएगा। फिर नीचे के दीवार को तोड़कर ढलाई की जाएगी, लेकिन बांस बल्ली कमजोर होने के कारण यह घटना हुई है।

लोगों में आक्रोश

वहीं, स्थानीय लोगों में आक्रोश है और उन्होंने इल्जाम लगाते हुए कहा कि ठेकेदार पहले ही दिन से भ्रष्टाचार वाले काम शुरू कर दिया था। मिलावटी सामानों से पुलिया का निर्माण कराया जा रहा था। लोगों ने कहा कि 12 घंटे के अंदर पुलिया सही सलामत करके हमें सौंप दें।

जेई की भी गर्दन फंसी

इस पूरे मामले पर नगर आयुक्त अविनाश कुमार सिंह ने बताया कि पुलिया की शटरिंग जिस खंभे पर टिकाई गई थी, उस खंभे के टूटने की वजह से यह हादसा हुआ। हालांकि, ठेकेदार के फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है और जमा धनराशि भी ठेकेदार की जब्त कर ली गई है। काम करने से पहले बताना होता है, जोकि ठेकेदार ने नहीं किया। साथ ही जेई के ऊपर भी जांच की जा रही है, जिसने बिना पूछे काम शुरू करवाया।

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