आज के युग में पर्यावरण हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए" -डा0 अरूण कुमार सक्सेना

लखनऊ: (मानवी मीडिया)उत्तर प्रदेश के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा0 अरुण कुमार सक्सेना द्वारा पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान (टेरी) और स्विस एजेंसी फॉर डेवलपमेंट एंड कोऑपरेशन के सहयोग से होटल क्लार्क अवध में आयोजित मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। इस अवसर पर  सक्सेना ने पीएम 2.5 के उत्सर्जन सूची और स्रोत योगदान पर एक रिपोर्ट जारी की। 

कार्यशाला में पर्यावरण मंत्री ने कहा कि आज ग्लोबल वार्मिंग केवल एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण विश्व की समस्या है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी  ग्लोबल वार्मिंग को लेकर पूरी दुनिया को सचेत करते रहे है। ग्लोबल वार्मिंग को रोकना अत्यन्त आवश्यक है। उन्होंने कहा कि "आज के युग में पर्यावरण हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए और "पंचसूत्र" को अपनाना चाहिए। मीडिया के पास सही ज्ञान साझा करने और जागरूकता पैदा करने के साथ लोगों को जागृत करने की शक्ति है क्योंकि मीडिया संविधान का चौथा स्तंभ है। 

कार्यशाला को संबोधित करते हुये अपर मुख्य सचिव पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मनोज सिंह ने कहा कि हम सबका दायित्व है कि पर्यावरण संतुलन बनाये रखे। उन्होने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग से पृथ्वी का बचाव करना हम सबका कर्तव्य है।  सिंह ने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा एवं संतुलन बनाने के लिए विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रम चलाये जा रहे है। उन्होने कहा कि इन योजनाओं की जानकारी आम जनमानस तक पहुचाने के लिए अत्यतं आवश्यक है। 

कार्यशाला में मीडिया को संबोधित करने के लिए डॉ विभा धवन (डीजी टेरी),  ममता संजीव दुबे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक जीओयूपी, मनोज सिंह एसीएस ईएफ एंड सीसी और आशीष तिवारी भी उपस्थित थे। टेरी के कुलपति प्रतीक शर्मा और आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. मुकेश शर्मा ने उत्सर्जन सूची पर मीडिया को तकनीकी जानकारी साझा की। डॉ प्रतीक शर्मा ने कहा, "वायु प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करना वायु प्रदूषण का मुकाबला करने के लिए पहला कदम है और मीडिया के पास जागरूकता पैदा करने के लिए सही जानकारी के साथ लोगों तक पहचानने की शक्ति है।

कार्यशाला में सामूहिक जवाबदेही और सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए वायु प्रदूषण की सीमा पार प्रकृति पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसका उद्देश्य पत्रकारों को विज्ञान, नीति और सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से वायु प्रदूषण को समझने, विश्लेषण करने और रिपोर्ट करने में सक्षम बनाना और राष्ट्रीय, राज्य और शहर के स्तर पर इस मुद्दे के साथ मीडिया जुड़ाव को बढ़ाना है।


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