मानहानि मामला: गुवाहाटी कोर्ट ने दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भेजा नोटिस - मानवी मीडिया

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Wednesday, June 22, 2022

मानहानि मामला: गुवाहाटी कोर्ट ने दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भेजा नोटिस


गुवाहाटी (मानवी मीडिया
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा की ओर से दायर मानहानि के मुकदमे के सिलसिले में गुवाहाटी की एक अदालत ने बुधवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को पेश होने के लिए नोटिस जारी किया। रिंकी भुइयां सरमा ने कथित तौर पर कोविड-19 महामारी के दौरान बाजार दर से अधिक दाम पर पीपीई किट की डिलीवीर वाले बयान को लेकर मनीष सिसोदिया के खिलाफ 100 करोड़ रुपए का मानहानि मामला दर्ज कराया है।

सरमा के वकील पद्माधर नायक ने कहा, मामला बुधवार को सुनवाई के लिए आया जिसके बाद अदालत ने सिसोदिया को सुनवाई की अगली तारीख 25 जुलाई को कोर्ट में पेश होने के लिए नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा, 'सुनवाई के दिन, दिल्ली के डिप्टी सीएम को व्यक्तिगत रूप से या अपने वकील के माध्यम से पेश होना होगा और मुकदमे के संबंध में अपना लिखित बयान देना होगा।'

क्या कहा था सिसोदिया ने अपने बयान में?

दरअसल, सिसोदिया ने मीडिया में आई एक खबर का जिक्र करते हुए पत्रकारों से कहा था कि एक ओर असम सरकार ने अन्य कंपनियों से 600 रुपए में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट खरीदीं, तो दूसरी ओर सरमा ने अपनी पत्नी व बेटे के व्यापारिक भागीदारों की कंपनियों को 990 रुपए के हिसाब से तत्काल पीपीई किट की आपूर्ति के ऑर्डर दिए थे।

आरोपों का पहले ही खंडन कर चुकी हैं भुइयां

मुकदमे के अनुसार, 4 जून को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिसोदिया ने कुछ आरोप लगाए थे जिससे रिंकी भुइयां सरमा की प्रतिष्ठा और पोजिशन को नुकसान पहुंचा था। द वायर की कई रिपोर्टों में लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए, रिंकी सरमा ने इस महीने की शुरुआत में एक बयान जारी कर ऐसे किसी भी गलत काम से इनकार किया था। उन्होंने कहा कि मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के पहले सप्ताह में असम में एक भी पीपीई किट उपलब्ध नहीं थी और उन्होंने इसका संज्ञान लेते हुए, बिजनेस से जुड़े लोगों के पास पहुंची और काफी प्रयास करने के बाद लगभग 1500 पीपीई किट एनएचएम-असम को वितरित किए। 

क्या कहा है बयान में?

सरमा की ओर से दिए गए बयान में कहा गया है, 'अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के रूप में मैंने एनएचएम को पत्र लिखा था। मैंने इस आपूर्ति में से एक पैसा भी नहीं लिया। मैं अपने पति की राजनीतिक स्थिति के बावजूद हमेशा समाज को वापस देने के अपने विश्वास में पारदर्शी रही हूं।

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