तिब्बत के लोगों को बदल नहीं पाया चीन


नई दिल्ली (मानवी मीडियातिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा है कि चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी 'तिब्बती मानसिकता' और तिब्बत के लोगों को बदलने में विफल रही है। दलाई लामा ने यह बात तिब्बती मुद्दों के लिए अमेरिकी अधिकारी उजरा जेया से धर्मशाला में कही है। उन्होंने यह बात तब कही जब तिब्बत मामलों की अमेरिका की विशेष समन्वयक उजरा जेया अपने भारत दौरे पर धर्मशाला पहुंची हैं और वे तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से मुलाकात कर रही हैं। इस दौरान दलाई लामा ने अपने संघर्ष के बारे में बताते हुए भारत और अमेरिका की तारीफ भी की।

दरअसल, अमेरिका विशेष समन्वयक उजरा जेया ने धर्मशाला में दलाई लामा से मुलाकात की। करीब एक घंटे चली इस मुलाकात में तिब्बती मानवाधिकारों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक के दौरान लोकतांत्रिक शासन के लक्ष्य और मानवीय प्राथिमिकताओं को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। बताया जा रहा है कि तिब्बत में लोगों के मानवाधिकारों का सम्मान करने के लिए चीन पर दबाव बनाने की दृष्टि से यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक के बाद आधिकारिक बयान भी सामने आया है।

दलाई लामा बोले, चीन तेजी से बदल रहा
दलाई लामा के कार्यालय द्वारा जारी एक वीडियो में तिब्बती आध्यात्मिक नेता ने कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी तिब्बती लोगों के मन को बदलने में पूरी तरह विफल रही है। यानी उनके तमाम दबाव के बावजूद भी तिब्बती मानसिकता को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। दलाई लामा ने कहा कि चीन तेजी से बदल रहा है और वहां अब समाजवाद और मार्क्सवाद मौजूद नहीं हैं।

चार मुख्य प्रतिबद्धताओं के बारे में बताया
उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि कैसे भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों में स्वतंत्रता और लोकतंत्र की लंबी परंपराएं हैं। बैठक के दौरान दलाई लामा अपनी चार मुख्य प्रतिबद्धताओं के बारे में बताया। जिनमें सार्वभौमिक मूल्यों का प्रचार, धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देना, तिब्बत की संस्कृति और पर्यावरण का संरक्षण और प्राचीन भारतीय ज्ञान का पुनरुद्धार शामिल हैं।

बदल रही है अमेरिका की तिब्बत पॉलिसी!
बैठक के दौरान निर्वासित तिब्बती प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग, अन्य तिब्बती प्रतिनिधि और उजरा जेया के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी शामिल थे। तिब्बती समुदाय के लोग भी इस बैठक को महत्वपूर्ण मान रहे हैं और तिब्बती नेता और जनप्रतिनिधि काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। बैठक के बाद पेंपा सेरिंग ने बताया कि उन्होंने 25 अप्रैल को उजरा जेया से बातचीत की थी। वार्ता के दौरान तिब्बत से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनका ध्यानाकर्षण किया था। 

बता दें कि तिब्बत मामलों की अमेरिका की विशेष समन्वयक उजरा जेया भारत दौरे पर हैं। 17 मई को भारत पहुंची उजरा 22 तारीख तक भारत दौरे पर रहेंगी। इस दौरान वह नेपाल का दौरा भी करेंगी। 18 मई को उजरा धर्मशाला पहुंची जहां दलाई लामा रहते हैं और जहां से तिब्बत की निर्वासित सरकार चलती है। अमेरिकी विशेष समन्वयक का धर्मशाला का यह छठा दौरा है। 

तिब्बत और दलाई लामा पर अमेरिका की भूमिका
अमेरिका ने तिब्बत और दलाई लामा के समर्थन के बीच एक राजनयिक संतुलन बनाए रखा है। यह सत्य है कि अमेरिका ने दलाई लामा के साथ बातचीत या राजनीतिक बंदियों की रिहाई पर कोई वास्तविक जोर नहीं दिया है। बाइडेन के सत्ता में आने के बाद से अमेरिका और तिब्बती नेतृत्व के बीच यह पहला उच्च स्तरीय संपर्क है। हालांकि एंटनी ब्लिंकेन ने पिछले साल नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान दलाई लामा के एक प्रतिनिधि से मुलाकात की थी। 


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