सभी जनपद गोआश्रय स्थलों हेतु भूसे की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करे--धर्मपाल सिंह


 लखनऊ (मानवी मीडिया) उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री  धर्मपाल सिंह ने सभी जनपदों के जिलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारियों तथा मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि आगामी 07 जून तक जनपदों में तैयार कराये जा रहे भूसा बैंकों में पर्याप्त मात्रा में भूसे की व्यवस्था सुनिश्चित कर ली जाए। उन्होंने भूसा संग्रहण के लिए प्राथमिकता के आधार पर टेंडर निकाले जाने और आगामी 21 मार्च, 2023 तक के लिए भूसे का भण्डारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने बताया कि विगत् 16 मई तक 15 लाख 62 हजार 387 मी0टन भूसे की व्यवस्था कर ली गयी है। 

पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री ने यह जानकारी आज यहां देते हुए बताया कि निराश्रित गोवंश के लिए महराजगंज, फर्रूखाबाद, लखीमपुरखीरी, शाहजहांपुर में गो-अभ्यारण स्थापित किये जाने में तेजी लाने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि अभ्यारण स्थापित करने के लिए ऐसे जनपदों को चिन्हित किया जायेगा जहां पर पर्याप्त जंगल एवं खाली जमीन उपलब्ध हो ताकि ऐसे स्थानों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के साथ ही गोवंश के संरक्षण और स्वरोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो सके। 

उन्होंने यह भी कहा है कि मानसून के समय पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था अभी से सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। अतः पशुओं की संख्या को देखते हुए अलग-अलग जनपदों में भूसे की आवश्यकता का आकलन करके उसी के हिसाब से भूसे का भण्डारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि निराश्रित पशुओं का संरक्षण एवं देखभाल उचित तरीके से संभव हो सके और भूसे की कमी न रहे।

पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री ने यह भी कहा है कि मा0 मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ जी निराश्रित गोवंश को संरक्षित कर उनका भरण-पोषण व्यवस्थित ढंग से किये जाने के निर्देश समय-समय पर देते रहे हैं। इसके अलावा  प्रधानमंत्री  ने भी कार्ययोजना तैयार करके गोशालाओं को स्वावलम्बी बनाने की अपेक्षा की थी। इसी अपेक्षाओं के अनुरूप उ0प्र0 सरकार निराश्रित पशुओं के लिए संरक्षण एवं भरण-पोषण के लिए ठोस कदम उठाये हैं।

 धर्मपाल सिंह ने यह भी बताया है कि निराश्रित पशुओं को गोशालाओं में आश्रय देकर उनका भरण-पोषण के साथ ही उनके सह-उत्पाद से आमदनी का स्रोत बनाने की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गो-अभ्यारण के माध्यम से दूध व दुग्ध सहउत्पाद से लेकर गोबर, गोमूत्र तक का व्यवसायिक उपयोग किये जाने की संभावनाओं पर भी पूरी गंभीरता से कार्य किये जाने के निर्देश दिये गये हैं।


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