जब ठान लेता है, तो इसके लिए कुछ भी असम्भव नहीं: प्रधानमंत्री मोदी

 


गोरखपुर (मानवी मीडिया) भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी   आज जनपद गोरखपुर में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से स्थापित परियोजनाओं-हिन्दुस्तान उर्वरक एवं रसायन लि0 गोरखपुर, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर तथा आई0सी0एम0आर0-रीजनल मेडिकल रिसर्च सेण्टर गोरखपुर का लोकार्पण किया। इससे पूर्व, उन्होंने हिन्दुस्तान उर्वरक एवं रसायन लि0, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) तथा आई0सी0एम0आर0-रीजनल मेडिकल रिसर्च सेण्टर के सम्बन्ध में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश सरकार के जे0ई0/ए0ई0एस0 की रोकथाम के प्रयासों, हिन्दुस्तान उर्वरक एवं रसायन लि0, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) तथा आई0सी0एम0आर0-रीजनल मेडिकल रिसर्च सेण्टर पर आधारित लघु फिल्में भी प्रदर्शित की गयीं।

प्रधानमंत्री  ने इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि गोरखपुर में फर्टिलाइजर प्लाण्ट का शुभारम्भ अनेक संदेश दे रहा है। नया भारत जब ठान लेता है, तो इसके लिए कुछ भी असम्भव नहीं है। डबल इंजन की सरकार होती है तो डबल तेजी से काम होता है। कोरोना काल में भी डबल इंजन की सरकार कार्य में जुटी रही, काम रुकने नहीं दिया। नेक नीयत से काम होने पर आपदाएं भी अवरोध नहीं बन पाती हैं। शोषित, वंचित की चिन्ता करने वाली सरकार परिश्रम भी करती है और परिणाम भी देती है। उन्होंने लोकार्पित परियोजनाआंे के लिए प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि 05 वर्ष पहले गोरखपुर खाद कारखाने एवं गोरखपुर एम्स की आधारशिला रखने वे गोरखपुर आये थे। आज उन्हें इनका उद्घाटन करने का भी सौभाग्य प्राप्त हो रहा है।

प्रधानमंत्री  ने कहा कि वर्ष 2014 में उन्हें राष्ट्र की सेवा का अवसर प्राप्त होने के समय देश में फर्टिलाइजर सेक्टर बुरी स्थिति में था। बड़े-बड़े खाद कारखाने वर्षाें से बन्द थे। विदेशों से खाद का आयात बढ़ता जा रहा था। उपलब्ध खाद का चोरी-छिपे, खेती के अलावा भी इस्तेमाल होता था। इसलिए यूरिया की किल्लत थी। किसान खाद के लिए लाठी-गोली खाता था। इस स्थिति से देश को निकालने के लिए एक नये संकल्प के साथ 03 सूत्रों-यूरिया का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए शत-प्रतिशत नीम कोटिंग, करोड़ों किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराकर जमीन की जरूरत के अनुसार खाद के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करने तथा खाद के उत्पादन पर जोर दिये जाने पर एक साथ कार्य किया गया। बन्द पड़े खाद कारखानों को खोलने पर बल दिया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज गोरखपुर खाद कारखाने की शुरुआत हो रही है। 04 और बड़े खाद कारखाने बनाये जा रहे हैं। अगले वर्षाें में यह भी शुरू हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि गोरखपुर फर्टिलाइजर प्लाण्ट को प्रारम्भ कराने के लिए एक और भगीरथ कार्य हुआ। इस खाद कारखाने को ईंधन उपलब्ध कराने के लिए ऊर्जा गंगा लायी गयी। पी0एम0 ऊर्जा गंगा गैस पाइपलाइन परियोजना के तहत हल्दिया से जगदीशपुर तक पाइपलाइन बिछायी गयी। इससे यहां के कारखाने को ईंधन मिलने के साथ ही पूर्वी भारत के दर्जनों जिलों में पाइप से सस्ती गैस भी मिलने लगी।

प्रधानमंत्री  ने कहा कि गोरखपुर खाद कारखाने के शिलान्यास के समय उन्होंने कहा था कि इस कारखाने के कारण गोरखपुर इस क्षेत्र में विकास की धुरी बनकर उभरेगा। यह सच हो रहा है। गोरखपुर खाद कारखाने से राज्य के किसानों को पर्याप्त मात्रा में यूरिया की उपलब्धता होगी। पूर्वांचल में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। अब यहां आर्थिक विकास की नयी सम्भावना फिर से पैदा होगी। अनेक नये बिजनेस शुरू होंगे, खाद कारखाने से जुड़े सहायक उद्योगों के साथ ही ट्रांसपोर्टेशन, सर्विस सेण्टर को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि गोरखपुर खाद कारखाने की यूरिया के उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका होगी। देश के अलग-अलग हिस्सों में बन रहे 05 खाद कारखानों के शुरू होने पर 07 लाख टन अतिरिक्त यूरिया देश को मिलेगी। इससे हजारों करोड़ रुपये विदेश नहीं भेजने होंगे।

प्रधानमंत्री  ने कहा कि खाद में आत्मनिर्भरता की जरूरत कोरोना काल में और अधिक स्पष्ट हुई। कोरोना के दौरान लॉकडाउन से आवाजाही रुकी। इससे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खाद की कीमतें बढ़ गयीं। किसानों के लिए समर्पित और संवेदनशील हमारी सरकार ने दुनिया में फर्टिलाइजर के दाम बढ़ने पर भी किसानों पर बोझ नहीं पड़ने दिया। दुनिया में फर्टिलाइजर का मूल्य बढ़ने के कारण, इसी साल एन0पी0के0 फर्टिलाइजर के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 43 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गयी। यूरिया के लिए सब्सिडी में भी 33 हजार करोड़ रुपये की वृद्धि की गयी। अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में यूरिया 60-65 रुपये प्रति किलोग्राम है। भारत में इसे 10 से 12 गुना सस्ता उपलब्ध कराने का प्रयास है।

प्रधानमंत्री  ने कहा कि वर्तमान में खाद्य तेल का आयात करने के लिए भी देश को हजारों करोड़ रुपये विदेश भेजने पड़ते हैं। देश में ही पर्याप्त खाद्य तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय मिशन प्रारम्भ किया गया है। पेट्रोल-डीजल के लिए कच्चे तेल हेतु देश हर वर्ष 5 से 7 लाख करोड़ रुपये व्यय करता है। इसे हम एथेनॉल और बॉयोफ्यूल पर बल देकर कम करने में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र गन्ना किसानों का गढ़ है। एथेनॉल गन्ना किसानों के लिए अतिरिक्त कमायी का साधन बन रहा है। उत्तर प्रदेश में बॉयोफ्यूल बनाने के लिए अनेक फैक्ट्रियां बन रही हैं। हमारी सरकार से पहले 20 करोड़ लीटर एथेनॉल तेल कम्पनियों को बेचा जाता था। आज लगभग 100 करोड़ लीटर एथेनॉल अकेले यूपी के किसान भारत की तेल कम्पनियों को बेच रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  के नेतृत्व की प्रदेश सरकार की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने बीते वर्षाें में गन्ना किसानों के लिए अभूतपूर्व कार्य किया है। गन्ना किसानों के लिए लाभकारी मूल्य, हाल में 350 रुपये तक बढ़ाया गया है। पूर्ववर्ती सरकारों ने गन्ना किसानों को 10 सालों में जितना भुगतान किया, वर्तमान राज्य सरकार ने 4.5 साल में लगभग उतना भुगतान किया है।

प्रधानमंत्री  ने कहा कि सही विकास वही है, जिसका लाभ सभी तक पहुंचे, जो संतुलित हो। यह वही समझ सकता है जो संवेदनशील हो, जिसे सबकी चिन्ता हो। लम्बे समय से गोरखपुर में केवल एक मेडिकल कॉलेज क्रियाशील है। इसलिए गरीब जनता को इलाज के लिए लखनऊ, बनारस जाना पड़ता है। 05 वर्ष पहले इस क्षेत्र में दिमागी बुखार के प्रकोप की स्थिति से सभी परिचित हैं। उन्होंने कहा कि दिमागी बुखार की वजह को हल करने तथा उपचार के लिए किये गये कार्य से वर्तमान में गोरखपुर व बस्ती मण्डल में दिमागी बुखार के मामलों में 90 प्रतिशत की कमी आयी है। बीमार का जीवन बचाने में भी सफलता मिल रही है। इसके लिए मुख्यमंत्री  के काम की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि एम्स गोरखपुर तथा रीजनल मेडिकल रिसर्च सेण्टर की स्थापना से दिमागी बुखार सहित अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव में मदद मिलेगी।

 प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी देश को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती और सर्वसुलभ हों। हमारी सरकार दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित, हर वर्ग को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए जी-जान से काम कर रही है। अच्छे से अच्छे इलाज, बड़े से बड़े अस्पताल को दूर-दराज के क्षेत्रों तक ले जा रही है। इस सदी की शुरुआत तक देश में सिर्फ एक एम्स था। अटल जी की सरकार ने 06 एम्स स्वीकृत किये थे। बीते 7 वर्षाें में 16 एम्स पर काम चल रहा है। हमारा लक्ष्य है कि प्रत्येक जनपद में एक मेडिकल कॉलेज जरूर हो। उन्होंने प्रसन्नता जतायी कि उत्तर प्रदेश के अनेक जनपदों में मेडिकल कॉलेज का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में उन्हें प्रदेश में 09 मेडिकल कॉलेजों के लोकार्पण का अवसर मिला। स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का नतीजा है कि उत्तर प्रदेश 17 करोड़ कोरोना टीकाकरण के पड़ाव पर है।

प्रधानमंत्री  ने कहा कि देश की 130 करोड़ जनता को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। बहन-बेटियों को आवास, शौचालय, रसोई गैस, पानी, पोषण, टीकाकरण उपलब्ध कराया गया है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं। हाल ही में आया फैमिली हेल्थ सर्वे कई सकारात्मक संदेश देता है। पहली बार महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक हुई है। जमीन व घर पर महिलाओं को अधिकार प्रदान किया गया है। बैंक खाते तथा मोबाइल के उपयोग में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि आज हमारी सरकार ने सरकारी गोदाम गरीबों के लिए खोल दिये हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी हर घर अन्न पहुंचाने में जुटे हैं। उत्तर प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को इसका लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को होली तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी प्रदेश के हर जिले को वी0आई0पी0 बनाकर बिजली पहुंचा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में माफिया जेल में हैं तथा निवेशक दिल खोलकर निवेश कर रहे हैं। यही डबल इंजन का डबल विकास है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने कहा कि देश की आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष तथा चौरी-चौरा शताब्दी महोत्सव के अवसर पर आज यहां लोकार्पित होने वाली योजनाएं देश को खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा की गारण्टी देने वाले आत्मनिर्भर भारत की एक नयी तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। आज का यह कार्यक्रम पूर्वी उत्तर प्रदेश के सपने को साकार करने जैसा है। तीन दशकों तक पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा जो सम्भव नहीं हो पाया, प्रधानमंत्री जी उसे मुमकिन बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर का फर्टिलाइजर कारखाना 10 जून, 1990 को बन्द हो गया था। वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री  ने गोरखपुर के इसी फर्टिलाइजर कारखाने का शिलान्यास किया। पहले से गोरखपुर में स्थापित उर्वरक कारखाने के स्थान पर बना यह नया कारखाना पहले की तुलना में 4 गुना अधिक क्षमता का है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश काफी समय से मलेरिया, काला जार, इंसेफेलाइटिस तथा अन्य विषाणुजनित संक्रामक बीमारियों से प्रभावित रहा है। प्रधानमंत्री  द्वारा देश के प्रति संवेदना तथा आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में जो कार्य प्रारम्भ किया गया है, उसी क्रम में आज गोरखपुर एम्स का लोकार्पण किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2016 में इसका शिलान्यास किया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  के नेतृत्व और मार्गदर्शन में देश की 130 करोड़ आबादी को सुरक्षित करने के लिए सबको वैक्सीन, निःशुल्क वैक्सीन का अभियान दुनिया का सबसे बड़ा अभियान है। प्रदेश आज 17 करोड़ कोरोना वैक्सीनेशन पूर्ण करने जा रहा है।

मुख्यमंत्री  ने कहा कि वर्ष 2014 तक प्रदेश में सरकारी व निजी क्षेत्र में कुल 17 मेडिकल कॉलेज थे। इससे मात्र 12 जनपद आच्छादित थे। आज प्रदेश के 59 जनपदों में मेडिकल कॉलेज हैं। शेष 16 जनपदों में भी मेडिकल कॉलेज के निर्माण की कार्यवाही युद्धस्तर पर आगे बढ़ रही है। जनपद देवरिया में मेडिकल कॉलेज प्रारम्भ हो चुका है। कुशीनगर में मेडिकल कॉलेज का काम प्रारम्भ हो गया है। सिद्धार्थनगर और बस्ती के मेडिकल कॉलेज प्रारम्भ हो चुके हैं। बलरामपुर में नया मेडिकल कॉलेज बन रहा है। गोण्डा में मेडिकल कॉलेज का कार्य प्रारम्भ हो रहा है। बहराइच व अयोध्या का मेडिकल कॉलेज प्रारम्भ हो चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया ने कोरोना प्रबन्धन के सम्बन्ध में प्रधानमंत्री की संवेदना और नेतृत्व का लोहा माना है। पूरी दुनिया में उनकी सराहना हो रही है। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में जब इंसेफेलाइटिस के मरीज आते थे, तो सैम्पल जांच के लिए एन0आई0वी0, पुणे भेजना पड़ता था। इसमें काफी समय लगता था, तब तक मरीज को काफी नुकसान हो जाता था। गोरखपुर में रीजनल मेडिकल रिसर्च सेण्टर के लोकार्पण के लिए प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस रिसर्च सेण्टर से अब कोरोना के साथ-साथ इंसेफेलाइटिस, कालाजार, डेंगू, चिकुनगुनिया, मलेरिया और अन्य तमाम विषाणु जनित बीमारियों की जांच सुविधा उपलब्ध होगी।

इस अवसर पर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल जी, उप मुख्यमंत्री  केशव प्रसाद मौर्य, डॉ0 दिनेश शर्मा, कृषि मंत्री श्री सूर्यप्रताप शाही, वन मंत्री  दारा सिंह चौहान, श्रम मंत्री  स्वामी प्रसाद मौर्य, स्वास्थ्य मंत्री  जयप्रताप सिंह, केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री  अनुप्रिया सिंह पटेल, केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री  पंकज चौधरी, प्रदेश के खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  उपेन्द्र तिवारी, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  सतीश द्विवेदी, पशुधन राज्य मंत्री  जय प्रकाश निषाद, उद्यान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  श्रीराम चौहान, ग्राम्य विकास राज्य मंत्री  आनन्द स्वरूप शुक्ल, विधान परिषद सदस्य  स्वतंत्रदेव सिंह,  संजय निषाद सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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