हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के लिए मैरिटल रेप को बताया मजबूत आधार


कोच्चि (मानवी मीडियाकेरल उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि मैरिटल रेप तलाक का दावा करने के लिए एक मजबूत आधार है। न्यायमूर्ति ए. मोहम्मद मुस्ताक और न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ की डिविजन बेंच ने पति की फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला देते हुए कहा कि हालांकि भारत में वैवाहिक बलात्कार के लिए दंड का प्रावधान नहीं किया गया है लेकिन इसके बावजूद भी ये तलाक का आधार हो सकता है। हाईकोर्ट ने पति की अर्जी को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

पति की ओर से परिवार न्यायालय के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी जिसमें क्रूरता के आधार पर तलाक की अनुमति दी गई थी। अर्जी में फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, पत्नी की मर्जी के खिलाफ जाकर संबंध वैवाहिक बलात्कार है। इस तरह के आचरण को दंडित नहीं किया जा सकता है लेकिन इसे शारीरिक और मानसिक क्रूरता के दायरे में माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि ये मामला एक महिला के साथ ज्यादती को दिखाता है। 12 साल तक एक महिला अपने पति के बुरे बर्ताव से खिलाफ लड़ती रही।

बता दें कि मैरिटल रेप को लेकर भारत में काफी बहस रही है। इस पर कानून बनाने की मांग भी होती रही है। इसी साल जुलाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने मैरिटल रेप को तलाक का आधार बनाने की याचिका को खारिज दिया था। ऐसे में केरल हाईकोर्ट का ये फैसला काफी अहम है।

क्या है मैरिटल रेप
भारत में आईपीसी में वैवाहिक बलात्कार (पत्नी का पति द्वारा रेप) का कोई जिक्र नहीं है। आईपीसी में पत्नी से रेप करने वाले पति के लिए सजा का प्रावधान है बर्शते पत्नी 12 साल से कम की हो। इसमें कहा गया है कि 12 साल से कम उम्र की पत्नी के साथ पति अगर बलात्कार करता है तो उस पर जुर्माना या उसे दो साल तक की कैद या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं। 12 साल से बड़ी उम्र की पत्नी की सहमति या असहमति का कोई मतलब नहीं है।

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