पहले से लागू है सम्पत्ति के बाजार मूल्य एवं उस पर स्टाम्प शुल्क की देयता की जानकारी के आवेदन का शुल्क -- डॉ रोशन जैकब

 पहले से लागू है सम्पत्ति के बाजार मूल्य एवं उस पर स्टाम्प शुल्क की देयता की जानकारी के आवेदन का शुल्क

प्रदेश सरकार ने अपनी अधिसूचना में इस शुल्क की रकम 100 रुपये निर्धारित किया है 

-डा0 रोशन जैकब महानिरीक्षक स्टाम्प एवं निबंधन


लखनऊ: (मानवी मीडिया) उत्तर प्रदेश के कतिपय समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर के अनुसार अचल सम्पत्यिों की खरीद-फरोख्त से संबंधित विलेखों के पंजीकरण से पूर्व स्टाम्प शुल्क की प्रभार्यता एवं देयता निर्धारण के लिए कलेक्टर के समक्ष आवेदन करके उचित स्टाम्प शुल्क की पूर्व जानकारी किये जाने की अनिवार्यता के बारे में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। कतिपय लोगों ने इसका यह अर्थ लिया है कि सम्भवतः अब सभी विलेखों को अनिवाय्र रूप से कलेक्टर के समक्ष अधिनिर्णीत कराकर ही पंजीकरण कराये जाने का प्राविधान सरकार ने कर दिया है। वस्तुतः ऐसा नहीं है। विलेखों के पंजीकरण के संबंध में जो व्यवस्था पूर्व से प्रचलित थी उसमें किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया गया है।

यह जानकारी देते हुए महानिरीक्षक स्टाम्प एवं निबंधन डा0 रोशन जैकब ने बताया कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा-31 में यह प्राविधान पूर्व से ही विद्यमान है कि यदि किसी पक्षकार/व्यक्ति को अपनी सम्पत्ति के बाजार मूल्य एवं उस पर स्टाम्प शुल्क की देयता के बारे में संदेह हो तो वह कलेक्टर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर जानकारी कर सकता है, किन्तु ऐसे आवेदन पत्र के लिए पूर्व में शुल्क का निर्धारण नहीं था। उन्होंने बताया कि शुल्क के विषय में लिखा है कि ‘‘वह फीस, ऐसी रकम जो राज्य सरकार द्वारा सरकारी गजट में अधिसूचना द्वारा नियत की जाये, अदा करें।’’ अब इसी बिन्दु पर राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना दिनांक 15 जून, 2021 के माध्यम से 100 रुपये शुल्क निर्धारित कर दिया गया है।

डा0 रोशन जैकब ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा-31 के प्राविधान ऐच्छिक है। ऐसे किसी प्रकरण में जहां पक्षकारों को यह लगता हो कि उनके द्वारा विलेख में व्यक्त बाजार मूल्य और उस पर अदा किये जाने वाले स्टाम्प शुल्क पर कोई आशंका हो, तभी इस प्रकार का आवेदन कोई व्यक्ति या पक्षकार कर सकता है।

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