मुख्यमंत्री योगी ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मलेन का किया शुभारम्भ


लखनऊ (मानवी मीडिया)राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भारत सरकार एवं राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण उ0प्र0 के संयुक्त तत्वाधान में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के तृतीय दो दिवसीय सम्मलेन का शुभारम्भ बुधवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान लखनऊ में हुआ। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बतौर मुख्य अतिथि दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारम्भ किया। फीता काटकर शुभारम्भ करने के उपरान्त  मुख्यमंत्री  ने आपदा प्रबंधन से सम्बन्धित विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का अवलोकन किया।

बताते चलें कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भारत सरकार एवं राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण उ0प्र0 के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हो रहे सम्मेलन में नौ राज्यों असम, उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार, दिल्ली, हरियाण, चंडीगंढ, राजस्थान तथा पश्चिम बंगाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के अधिकारी तथा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाओं के प्रतिनिधि मण्ंडल प्रतिभाग कर रहे हैं। सम्मेलन का समापन एक दिसंबर को होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  ने कहा कि समय से प्रशिक्षण, तैयारी एवं जागरूकता आपदा प्रबंधन के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं। यदि समय से बचाव के उपाय अपनाए जाये ंतो निश्चित ही आपदा न्यूनीकरण बड़े पैमाने पर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मा0 प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आपदा न्यूनीकरण को लेकर आपदा मित्र योजना के तहत आपदा मित्रों को प्रशिक्षण देकर ग्राम स्तर पर आपदा न्यूनीकरण में सहयोग लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में आपदा मित्र योजना आपदा न्यूनीकरण में बेहद उपयोगी सिद्ध होंगी।

मुख्यमंत्री  ने विगत वर्ष और इस वर्ष आई बाढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि इस वर्ष गंगा-युमना के तटवर्ती जनपदों में पहले बाढ़ आई, इसके बाद नेपाल से सटे जनपदों में अक्टूबर में भयावह बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई। इसलिए अब किसी भी आपदा से निपटने के लिए समय से सदैव तत्पर रहने वाली तैयारी करनी होगी। आपदा न्यूनीकरण को लेकर किए गए प्रयासों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री  ने एल्गिन-चरसड़ी तटबंध गोण्डा के बारे में कहा कि जनपद गोण्डा-बाराबंकी में प्रतिवर्ष बाढ़ प्रबंधन के लिए करोड़ो रूपए खर्च करने पड़ते थे, परन्तु स्वयं उन्होने इसकी समीक्षा की और निर्देश दिए कि घाघरा नदी में ड्रेजिंग का कार्य कराया जाय तथा नदी की धारा को बीच में चैनलाइज किया जाय। इसके अप्रत्याशित नतीजे आये, मात्र पांच करोड़ रूपए में घाघरा नदी में ड्रेजिंग कार्य कराया गया जिससे घाघरा नदी से कटान नहीं हुई और नदी की धारा नदी के बीचोचीच बहने लगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के पहले प्रदेश में बाढ़ से 38 जनपद प्रभावित होते थे परन्तु अब इसे मात्र कुछ जनपदों तक सीमित करने में सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में उनकी सरकार द्वारा राज्य आपदा मोचक बल का गठन किया गया और वर्तमान में प्रदेश में तीन बटालियन एसडीआरएफ तथा पीएसी की 17 फ्लड बटालियन सदैव राहत एवं बचाव कार्य के लिए तत्पर रहती हैं।

आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री  ने निर्देशित किया कि स्कूलों एवं कालेजों के पाठ्यक्रमों में आपदा प्रबंधन सम्बन्धी विषयों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाय। आकाशीय विद्युत से होने वाली मृत्यु के बारे में मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के सोनभद्र ओर मिर्जापुर जनपद में सबसे ज्यादा आकाशीय विद्युत से मृत्यु की घटनाएं होती हैं। उन्होंने निर्देशित किया कि आकाशीय विद्युत से दुर्घटनाएं न हों इसके लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित किया जाय तथा उसे ग्राम स्तर पर लागू किया जाय।

उन्होंने विभिन्न प्रान्तों से आये हुए अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह सम्मेलन निश्चित ही आपदा प्रबंधन के लिए उपयोगी और मील का पत्थर सिद्ध होगा। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  ने फ्लड एटलस बुक का विमोचन भी किया। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ले0 जनरल आर0पी0 साही ने मा. मुख्यमंत्री जी को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की परियोजना निदेशक श्रीमती अदिति उमराव ने किया।

इस दौरान प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री राजस्व श्री अनूप प्रधान बाल्मीकि,  कमल किशोर सदस्य सचिव एनडीएमए, लेफ्टीरनेंट जनरल सैयद अता हसनैन,  प्रमुख सचिव राजस्व सुधीर गर्ग, डा0 कृष्णा एस0 वत्स सदस्य एनडीएमए, संजीव कुमार जिंदल संयुक्त सचिव आपदा प्रबंधन गृह मंत्रालय भारत सरकार, ज्वाइंट सेकरेटरी एनडीएम कुणाल सत्यार्थी, राहत आयुक्त उ0प्र0 प्रभु0 नारायण सिंह सहित जनपदों जिला आपदा विशेषज्ञ एवं अन्य गणमान्य तथा वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे

*तकनीकी सत्र में प्रतिनिधियों ने साझा किये अनुभव एवं नवाचार*

तकनीकी सत्र में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के ज्वाइंट सेकरेटरी  कुणाल सत्यार्थी केे निर्देशन मे असम, बिहार, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली के आपदा प्रबंधन प्रतिनिधि मंण्डल द्वारा अपने-अपने राज्यों में आपदा प्रबंधन को लेकर किए गए अभिनव प्रयासों का प्रस्तुतीकरण किया गया। बाढ़, नाव दुर्घटनाएं, भूकम्प, आकाशे़ीय विद्युत से बचाव व जागरूकता, भूस्खलन आदि के बारे में विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान प्रतिनिधि मण्डल के सदस्यों से सुझाव भी प्राप्त किए गये। तकनीकी सत्र में जलशक्ति मंत्रालय, भाखड़ा व्यास मेनेजमेन्ट बोर्ड, गंगा फ्लड कन्ट्रोल कमीशन, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा कमीशन, विश्वेसरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालाजी नागपुर, इनलेन्ड वाटर वेज अथारिटी आफ इन्डिया, केन्द्रीय भूगर्भ जल आयोग, कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग, आईआईटी मद्रास, आईआईटी रूड़की, नेशनल सेन्टर फॉर सीसमोलॉजी, भू विज्ञान विभाग, एनडीआरएफ, सेंटर फार डेवलपमेल्ट टेलीमेटिक्स, सेन्टर फार डेवलपमेन्ट आफॅ एडवांस कम्प्यूटिंग, गोरखपुर इनवायरमेन्टल एक्शन गु्रप सहित 16 तकनीकी संस्थानों द्वारा आपदा न्यूनीकरण को लेकर  प्रस्तुतीकरण किया गया।

प्रमुख सचिव राजस्व उ0प्र0  सुधीर गर्ग ने कहा कि आपदा प्रबंधन को लेकर विभिन्न राज्यों द्वारा किए गए नवाचारों को अपनाने के साथ ही सुझावों पर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित कराई जाएगी।

इस अवसर पर राहत आयुक्त उ0प्र0 प्रभु नारायण सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आयोजित हो रहा यह क्षेत्रीय सम्मेलन आपदा न्यूनीकरण के क्षेत्र में बेहद कारगर साबित होगा। उन्होंने विभिन्न प्रांतो से आये हुए प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विभिन्न प्रांतों में आपदा न्यूनीकरण के लिए किए गए अभिनव प्रयासों एवं नवाचारों से निश्चित ही सहायता मिलेगी।

*विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधि मण्डल को मुख्य सचिव ने दिया रात्रि भोज**

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों केे तृतीय क्षेत्रीय सम्मेलन में आये हुए अधिकारियों के सम्मान में मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश द्वारा रात्रि भोज आयोजित किया गया है।  

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