तेजाब से चेहरा जलाने के बाद भी हौसला नहीं हारी अंशु


नोएडा (
मानवी मीडियावर्षों पहले मशहूर गीतकार गुलजार ने लिखा था, ‘नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदल जाएगा, मेरी आवाज ही पहचान है’. इस गाने को उत्तर प्रदेश के नोएडा में रहने वाली अंशु ने सच कर दिखाया है. वर्ष 2015 में अंशु का चेहरा एसिड अटैक में झुलस गया था, लेकिन इस घटना को अंशु ने अपनी कमजोरी नहीं बनने दी. मौजूदा समय में सोशल मीडिया पर अंशु के लाखों फॉलोअर हैं.

बिजनौर की रहने वाली अंशु राजपूत नोएडा सेक्टर 21 ए स्थित एसिड अटैक सर्वाइवर्स के द्वारा संचालित शेरोइज हैंगआउट कैफे में काम करती हैं. उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में मैं 11वी क्लास में थी जब मेरे ऊपर 50 साल के एक व्यक्ति ने तेजाब से हमला कर दिया था. इस घटना में मेरा पूरा चेहरा जल गया था. लेकिन इसके बावजूद मैंने हिम्मत नहीं हारी. मैने इस कमजोरी को ताकत बनाने की ठान ली. फिर 2015 में ही मैं स्टॉप एसिड अटैक कैंपेन से जुड़ी और तेजाब हमले के खिलाफ काम किया. उस वक्त मैंने मोबाइल फोन खरीदा और सोशल मीडिया पर एक्टिव हो गई. आज मेरे सभी सोशल मीडिया साइट्स पर लाखों फॉलोअर हैं.

लोगों को मोटिवेट करती हैं अंशु
अंशु ने बताया कि मेरे मौज अकाउंट पर ढाई लाख, इंस्टाग्राम पर 45 हजार फॉलोअर हैं. मैं ऐसे कंटेंट डालती हूं जो लोगों को मोटिवेट करें. हालांकि, कभी-कभार कुछ कॉमेडी वाले भी होते हैं. मेरा उद्देश्य है कि मुझे देखकर लोग सीखें कि सब कुछ कभी भी खत्म नहीं होता. एक आशा की किरण हमेशा बनी रहती है. इसके साथ ही वो यह भी बताती हैं कि शुरुआत में मैने टिकटॉक पर वीडियो बनाया था, जो वायरल हुई थी. उस समय मुझे 30 हजार से ज्यादा रुपये मिलते थे. आज भी मौज और अन्य साइट्स से यह मुझे मिलते हैं.

अंशु बताती हैं कि लोग मुझसे anshu_saa से सभी सोशल मीडिया साइट जैसे इंस्टाग्राम व मौज पर जुड़ सकते हैं. मेरे नाम में saa लिखा है जिसका अर्थ स्टॉप एसिड अटैक होता है. यह नाम मैंने लोगों को तेजाब हमले के बारे में जागरूक करने के लिए लिखा है.

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