कतर की कैद में भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारी


नई दिल्ली (मानवी मीडिया
कतर की कैद में बंद आठ पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारियों को लेकर भारत का रिएक्शन आया है। भारत का कहना है कि उसे भारतीय नागरिकों तक कांसुलर एक्सेस मिल गया है और वे सभी सुरक्षित हैं। बता दें कि कतर में काम कर रहे आठ पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारी इस समय कतरी एमिरी नौसेना को प्रशिक्षण और अन्य सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी की हिरासत में हैं।

इस संबंध में पूछे जाने पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत को उन तक कांसुलर एक्सेस मिला है। विदेश मंत्रालय ने कहा, "कतर में भारतीय दूतावास के अधिकारियों को हिरासत में लिए गए भारतीय नागरिकों तक कांसुलर एक्सेस मिला है और उनका हाल चाल जाना है। हमने एक बार और कांसुलर एक्सेस मांगा है। उनकी जल्द रिहाई के प्रयास किए जा रहे हैं।"

बता दें कि करीब एक हफ्ते पहले ये मामला सामने आया था। @DrMeetuBhargava नाम के ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया गया था जिसमें कहा गया था कि पूर्व नौसेना अधिकारी दोहा में "57 दिनों से" अवैध हिरासत में हैं। पोस्ट में प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एस जयशंकर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी सहित कई मंत्रियों को टैग किया गया था।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व नौसेना अधिकारी दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज नामक कंपनी के लिए काम करते थे। यह कंपनी खुद को कतर रक्षा, सुरक्षा एवं अन्य सरकारी एजेंसियों की "स्थानीय व्यापार भागीदार" बताती है। समूह के सीईओ, खामिस अल अजमी, रॉयल ओमान वायु सेना के एक सेवानिवृत्त स्क्वाड्रन लीडर हैं।

कतर की इस कंपनी द्वारा हिरासत में लिए गए आठ भारतीयों में फर्म के प्रबंध निदेशक कमांडर पूर्णेंदु तिवारी (सेवानिवृत्त) भी हैं। उन्हें भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से 2019 में प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार मिला था। कंपनी की वेबसाइट पर उनकी प्रोफाइल कहती है कि जब उन्होंने भारतीय नौसेना में सेवा दी, तो उन्होंने कई बड़े जहाजों की कमान संभाली थी। इस बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है कि उन्हें हिरासत में क्यों रखा गया है। फिलहास दोहा में भारतीय मिशन के अधिकारी मामले से अवगत हैं। 

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