लखनऊ सीएमओ ने बंद किया अंकुर हॉस्पिटल उर्वशी शर्मा की शिकायत पर हुई कार्यवाही

लखनऊ (मानवी मीडियाउत्तर प्रदेश के संत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज में गलत काम करने वाला कोई भी व्यक्ति कानून के धर्मदंड से बच नहीं पा रहा है. ताज़ा मामला सूबे की राजधानी लखनऊ की राजाजीपुरम कॉलोनी के ऍफ़ ब्लाक में कानून को धता-बता कर चल रहे अंकुर नर्सिंग होम का है जिसकी समस्त चिकित्सीय गतिविधियाँ लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ( सीएमओ ) ने प्रतिबंधित कर दी हैं. मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय ने अंकुर हॉस्पिटल के खिलाफ यह कड़ी कार्यवाही राजधानी निवासी समाजसेविका उर्वशी शर्मा की शिकायत पर की है.

मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में निजी चिकित्सा प्रतिष्ठानों का पंजीकरण और नवीनीकरण करने वाले नोडल अधिकारी ने बीती 17 अगस्त को अंकुर नर्सिंग होम के प्रबंधक और संचालक को पत्र जारी करके हॉस्पिटल की समस्त चिकित्सीय गतिविधियाँ अग्रिम आदेशों तक प्रतिबंधित किये जाने का आदेश पारित किया है और हॉस्पिटल के प्रबंधक और संचालक को इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन करना सुनिश्चित करने का फरमान भी सुनाया है.

मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के इस पत्र में अंकुर हॉस्पिटल के प्रबंधन द्वारा चिकित्सा प्रतिष्ठान के भवन के मानचित्र से सम्बंधित अनापत्ति प्रमाण पत्र बार-बार मांगे जाने पर नहीं दिए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज की गई है और तत्काल चिकित्सा प्रतिष्ठान के भवन के मानचित्र से सम्बंधित अनापत्ति प्रमाण पत्र  मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय को उपलब्ध कराने की बात कहते हुए हॉस्पिटल को बंद करने का आदेश दिया गया है.


मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय ने इस आदेश की प्रति लखनऊ के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रशासन,अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी क्षेत्रीय, थाना प्रभारी पुलिस थाना तालकटोरा और शिकायतकत्री एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा को भी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी है.

प्रायः जनहित के मुद्दे उठाने वाली उर्वशी कहती हैं कि अवैध रूप से बने भवन ढांचागत रूप से असुरक्षित और हॉस्पिटल्स के लिए नितांत असुरक्षित और अनुपयुक्त होते हैं क्योंकि कोई हादसा होने पर ऐसे भवनों से सभी मरीजों का सुरक्षित निकास संभव ही नहीं है. उर्वशी ने सूबे के स्वास्थ्य मंत्री से सार्वजनिक अपील के माध्यम से मांग की है कि अवैध रूप से बने भवनों में चल रहे सूबे के सभी जिलों के हॉस्पिटल्स को चिन्हित करके बंद कराने के लिए वे सूबे के सभी चिकित्सा अधिकारियों के मार्फत प्रदेश स्तर पर एक अभियान चलाकर सूबे की जनता को सुरक्षित स्वास्थ्य का तोहफा दें.

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