पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम *पुरानी बोतल से निकला घोटाले का जिन्न,23 इंजीनियर पाये गए दोषी,पूर्वांचल में हड़कम

लखनऊ (मानवी मीडिया) आज कल शक्तिभवन से ले कर वाराणसी के भिखारीपुर स्थित पूर्वांचल के मुख्यालय तक पर चर्चाओ का बाजार गर्म है इन चर्चाओ मे *भ्रष्टाचार और घोटाले की सुर्खियों में रहने वाले उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन में 2019 में हुए कुम्भ घोटाले की लापता फाइल की चर्चा आज कल सुर्खकियो मे है कुम्भ धोटाले की फाईल उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन के अवैध रूप से नियुक्त चेयरमैन एम देवराज के दरबार मे पहुंच चुकी है* 

वैसे कुछ समय पूर्व इस फ़ाइल के लापता होने की खबर भी सुर्खियों मे थी और इस मामले को समय का उपभोक्त राष्ट्रीय हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र ने प्रमुखता से उठाया था *क्योंकि यह फाइल लापता नही बल्कि भ्रष्टाचारीयो ने इसे अपने भ्रष्टाचार से कमाई दौलत के बल पर गुमनामी के कुएं में डलवाकर दफन करने की तैयारी कर रखी थी परन्तु खबर प्रकाशित होने के बाद चेयरमैन ने सख्त रुख अपनाते ही पूर्वांचल प्रबन्धन की गुमनामी के कुएं से कुम्भ घोटाले के जिन्न की फाइल बाहर ही नही निकाली वरन वो धोटाले की फाइल अब शक्तिभवन मे स्थित बडकऊ के कार्यालय मे भी पहुच चुकी है चर्चा यहाँ तक है कि इस कुम्भ घोटाले में शामिल लगभग सभी अधिकारियो के प्रमोशन से सम्बन्धित लिफाफे बन्द होने के कारण  विभागीय प्रमोशन की दौड़ से  सभी भ्रष्टाचारी बाहर निकाले नजर आ रहे है* इस खबर की चर्चा से ही समूचे पूर्वांचल में हड़कंप मच गया ख़ास तौर पर घोटाले में शामिल इंजीनियरों औऱ उनके शुभचिंताको मे

*कई सौ करोड का पकड़ा गया था घोटाला*

पाठको को याद दिलाते चले कि कुम्भ मेले मे पोस्टिग के लिए तत्कालीन निदेशक कार्मिक प्रशासन के यहा बोली लगने की भी चर्चाए  उस वक्त सुनाई दे रही थी और  धोटाले की फाइल को भी तत्कालीन निदेशक महोदय द्वारा ही दबाया गया था चर्चा थी कि निदेशक महोदय को कमरा बन्द कर के खूब चादी के जूते से सेवा की गयी थी वैसे कुम्भ *मेला-2019 के कार्य निष्पादन की 7 इकाइयो की करायी गई जांच मेले में किये जाने वाले कार्यो के स्वीकृत प्राकल्लन, निष्पादित अनुबंध, निष्पादित प्राकलन, जमा योजना के संबंध में अस्थाई मेला इकाई के सम्बंधित विभागों द्वारा प्राप्त धनराशि के सापेक्ष बिना अनुमोदन के कई सौ करोड़ रुपये अपने स्तर से खर्च किये गये थे उक्त की जांच औऱ निष्पादित प्राकल्लन, प्राविधानिक कार्य के सापेक्ष कई सौ करोड़ अधिक के कार्य निविदा निस्तारित करने की जांच औऱ जमा योजनाओं में जमा रुपये के सापेक्ष ज्यादा रुपये के कार्य कराए* जाने की जांच में हजारों करोड़ों के घोटाला पकड़ा गया था जिसमे 

*कुल 23 इंजीनियर दोषी पाएगए ,जिनमे 2  सेवानिवृत्त भी हो चुके है , चर्चा मे जिन वो  अभियंताओ के नाम है जिन्होने कुम्भ मेले में भ्रष्टाचार के खेल मे जम कर लगाए है गोते*

1-शैलेंद्र कुमार,तत्कालीन अधीक्षण अभियंता,सेवानिवृत्त

2-अनिल वर्मा,तत्कालीन अधीक्षण अभियंता,सेवानिवृत्त

3-आशुतोष,अधीक्षण अभियंता

4-राजीव कुमार,अधीक्षण अभियंता

5-आनंद पाण्डेय,अधीक्षण अभियंता

6-सुशील कुमार श्रीवास्तव,अधीक्षण अभियंता

7-सैयद तारिक़ जलील,अधीक्षण अभियंता

8-राकेश कुमार,अधीक्षण अभियंता

9-अखिल किशोर लाल,अधीक्षण अभियंता

10-राजेन्द्र प्रसाद,अधीक्षण अभियंता

11-अनूप कुमार सिन्हा, अधिषासी अभियंता

12-मनोज कुमार गुप्ता, अधिषासी अभियंता

13-रमाकान्त, अधिषासी अभियंता 

14-अवधेश कुमार मिश्रा, अधिषासी अभियंता

15-सुजीत कुमार सिंह,अधिषासी अभियंता 

16-राम सेवक,अधिषासी अभियंता

17-अशोक कुमार,अधिषासी अभियंता

18-अविनाश,अधिषासी अभियंता

19-विष्णु दयाल यादव,अधिषासी अभियंता

20-भविष्य कुमार सक्सेना, अधिषासी अभियंता 

21-मनोज कुमार,अधिषासी अभियंता

22-रमेश चन्द्र पांडेय,अधिषासी अभियंता

23-राहुल सिंह,अधिषासी अभियंता

यह जो भी अभियन्ताओ के नाम है उनकी चर्चा शक्तिभवन से ले कर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम मे खुलेआम चल रही है और साथ ही पूर्व के निदेशक कार्मिक प्रशासन के सरक्षण की चर्चाऐ आम है कि उन्हो ने किस तरह से भ्रष्टाचारियो को सरक्षण दिया और किस तर से लूट की छूट दी । अब देखना यह है कि अवैध रूप से नियुक्त अध्यक्ष पावर कार्पोरेशन इन भ्रष्टाचारियो पर क्या कार्रवाई करते है या यू ही लिफाफा बन्द रखेगे । खैर 

*युद्ध अभी शेष है*


*अविजित आनन्द संपादक और चन्द्र शेखर सिंह 

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