हिंदुओं को मिलेगा अल्पसंख्यक का दर्जा, देने पर विचार करेगा केंद्र


नई दिल्ली (मानवी मीडिया) : जिन राज्यों में हिंदुओं की संख्या कम है, क्या वहां पर उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जा सकता है? सोमवार को ये सवाल सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर से उठा। दरअसल, केंद्र सरकार राज्यों और अन्य हितधारकों के साथ एक ‘व्यापक परामर्श’ शुरू करेगी, ताकि एक याचिका की जांच की जा सके कि क्या हिंदुओं को उन राज्यों में अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जा सकता है, जहां उनकी संख्या अन्य समुदायों की तुलना में कम है। मौजूदा समय में देश में कई ऐसे राज्य हैं, जहां हिन्दुओं की संख्या बेहद कम है। इनमें लद्दाख, मिजोरम, जम्मू-कश्मीर, नागालैंड और मेघालय सहित कई राज्य शामिल हैं।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) के तहत, केंद्र सरकार ने अभी केवल छह समुदायों ईसाई, सिख, मुस्लिम, बौद्ध, पारसी और जैन को राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक के रूप में अधिसूचित किया है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान आयोग (NCMEI) इन छह समुदायों को उनकी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन करने का अधिकार देता है। ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के मुताबिक, केंद्र ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि अल्पसंख्यकों को अधिसूचित करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है और इस संबंध में कोई भी निर्णय राज्यों और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।

सरकार ने स्पष्ट रूप से 2020 में दिल्ली भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय के नेतृत्व वाली याचिकाओं में अपने रुख से पीछे हटने का फैसला किया है। अधिवक्ता अश्विनी दुबे के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि लद्दाख में हिंदू केवल 1%, मिजोरम में 2.75%, लक्षद्वीप में 2.77%, जम्मू और कश्मीर में 4%, नागालैंड में 8.74%, मेघालय में 11.52%, अरुणाचल में 29% हैं। इसके अलावा पंजाब में 38।49 फीसदी और मणिपुर में 41.29 फीसदी हिन्दू हैं।

भविष्य में देश के लिए अनपेक्षित जटिलताओं को दूर करने के लिए सरकार ने कहा कि वह 27 मार्च को दायर अपने पिछले हलफनामे के स्थान पर एक नया हलफनामा प्रस्तुत कर रही है। तब केंद्र ने रिट याचिकाओं के एक समूह को खारिज करने की मांग की थी और 1992 के राष्ट्रीय आयोग का बचाव किया था। अपने पिछले हलफनामे में केंद्र ने उपाध्याय की याचिका को ‘अयोग्य और कानून में गलत’ करार दिया था। हालांकि, सोमवार शाम को दायर हलफनामे में सरकार ने कहा कि उपाध्याय की याचिका में शामिल सवाल का पूरे देश में दूरगामी प्रभाव है।

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