अधिवक्ता आयुक्त को बदलने के मामले में अब कोर्ट पर टिकीं सबकी निगाहें


वाराणसी (मानवी मीडिया ज्ञानवापी परिसर में श्रृंगार गौरी के साथ विग्रहों के सर्वे और वीडियोग्राफी मामले में आज न्यायालय में सुनवाई खत्म हो गई। अधिवक्ता आयुक्त को बदलने के लिए अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र सुनवाई हुई। मामले में पैरोकार डॉ. सोहनलाल आर्य ने बताया कि मंगलवार को फिर बहस होगी। अदालत के आदेश के बाद स्पष्ट होगा कि आगे क्या होना है। सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में गहमा-गहमी भी रही। सिविल जज (सीनियर डिविजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत में अब मंगलवार को इस पर सुनवाई होगी।  


ज्ञानवापी परिसर की कमीशन की कार्यवाही प्रकरण में अधिवक्ता आयुक्त को बदलने को लेकर अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई तीन बजे शुरू हुई थी।आज ही वादी पक्ष की ओर से प्रतिवादी की ओर से दाखिल आपत्ति पर जवाब प्रस्तुत किया गया। ऐसे में ज्ञानवापी परिसर में सर्वे की अग्रिम कार्रवाई पर अब सबकी निगाहें न्यायालय पर टिकी हैं। 

उधर, दो दिन की जद्दोजहद के बाद पुलिस प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुस्तैद है। ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी सहित अन्य विग्रहों की वस्तुस्थिति जानने के लिए सिविल जज (सीनियर डिविजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत से नियुक्त अधिवक्ता आयुक्त न्यायालय में उपस्थित हुए।  

अधिवक्ता आयुक्त पर पक्षपात का आरोप

दरअसल, शनिवार को दूसरे दिन सर्वे की कार्रवाई के विरोध में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ताओं ने न्यायालय में अधिवक्ता आयुक्त पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए उन्हें बदलने की याचिका दाखिल की थी।  न्यायालय ने इस याचिका पर अधिवक्ता आयुक्त व वादी पक्ष से सोमवार को जवाब मांगा था।

मालूम हो कि सिविल जज (सीनियर डिविजन) ने अधिवक्ता आयुक्त से कमीशन की कार्रवाई पूरी कर ज्ञानवापी परिसर के सर्वे और वीडियोग्राफी की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए 10 मई की तिथि तय की थी। छह और सात मई को हंगामे व विरोध के चलते सर्वे की कार्रवाई रुकने और प्रतिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता आयुक्त पर आरोप के बाद न्यायालय में आज सभी पक्षों की मौजूदगी में सुनवाई हुई।  

18 अगस्त 2021 को दर्ज हुई थी याचिका

दरअसल 18 अगस्त 2021 को पांच महिलाएं शृगांर गौरी में नियमित दर्शन पूजन की मांग को लेकर कोर्ट पहुंची थीं। महिला वादियों ने कहा था कि शृंगार गौरी मंदिर में पहले की परंपरा के अनुसार साल में एक बार पूजा होती थी, लेकिन हमारी मांग है कि देवी विग्रहों का नियमित दर्शन-पूजन करने की अनुमति दी जाए। इसमें किसी प्रकार की बाधा न डाली जाए। कोर्ट ने इस अपील पर ज्ञानवापी परिसर में सर्वे और वीडियोग्राफी का आदेश दिया।

एक वादी के मुकदमा वापस लेने की घोषणा से हलचल

ज्ञानवापी परिसर में सर्वे के लिए  कमीशन कायर्वाही के बीच वादी पक्ष की एक महिला के रिश्तेदार की ओर से मुकदमा वापस लेने संबंधी बयान से  हलचल मची है। मुस्लिम पक्ष के विरोध के कारण सर्वे की कार्रवाई रुकने के अगले दिन रविवार को वादी पक्ष को सहयोग कर रहे विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह बिसेन ने याचिका वापस लेने का दावा कर किया। 

जितेंद्र सिंह के मुताबिक सोमवार को याचिका वापस ली जाएगी। वादी राखी सिंह का रिश्तेदार होने के कारण जितेंद्र सिंह बिसेन के इस बयान को गंभीरता से लिया जा रहा है। वाद से जुड़ी चार अन्य महिलाएं मंजू व्यास, सीता साहू, लक्ष्मी देवी और रेखा देवी ने ऐसे किसी फैसले से इनकार किया और कहा कि हमारी तरफ से मरते दम तक यह केस लड़ा जाएगा। हालांकि, खुद राखी सिंह की तरफ से इस संबंध में कोई बयान नहीं आया है। 
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