गलत बिल भेजने से बाज नहीं आ रहा बिजली विभाग : अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय को मिल रहा महीने में दो-दो बिल


लखनऊ (मानवी मीडियाउपभोक्ताओं को गलत बिजली का बिल भेजने पर हाईकोर्ट से लेकर सरकार तक की फटकार का महकमे के कार्मिकों पर कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। गलत बिलिंग से केवल आम उपभोक्ता ही नहीं बल्कि सरकारी संस्थान तक परेशान हैं। विभागीय अधिकारी-कर्मचारी गलत बिल भेजने से बाज नहीं आ रहे हैं। अयोध्या स्थित अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय को महीने में दो-दो बिल भेजे जा रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों द्वारा बिल संशोधन न किए जाने पर संग्रहालय प्रशासन ने अब मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी के दरवाजा खटखटाया है।

संग्रहालय के उप निदेशक योगेश कुमार ने मध्यांचल के एमडी को भेजे पत्र में कहा है कि 16 फरवरी 2022 को एक बिल 3,78,673 रुपये और उसी तारीख में दूसरा बिल 19,42,599 रुपये का भेजा गया है। इसी तरह 16 मार्च को एक बिल 3,56,276 रुपये और दूसरा बिल 22,98,866 रुपये का भेजा गया है।
मुख्यमंत्री से लेकर ऊर्जा मंत्री और विभाग के आला अधिकारी तक हर बैठक में अधिकारियों को सही बिल भेजने की नसीहत दे रहे हैं। पिछले महीने हाईकोर्ट भी गलत बिलिंग पर अफसरों को फटकार लगाते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने तक का आदेश दे चुका है। पर विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है। उधर, राजस्व वसूली प्रभावित होने की एक बड़ी वजह गलत बिलिंग भी है।

ताजा मामला अयोध्या का है। अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में 50 किलोवाट का कनेक्शन लिया गया है। इसका खाता संख्या 5239489404 है। बिजली विभाग इस खाते पर दो-दो बिल भेज रहा है। स्थानीय बिजली अधिकारियों से बिल संशोधन कराने में जब सफलता नहीं मिली तो संग्रहालय प्रशासन ने सीधे मध्यांचल विद्युत वितरण के एमडी से इस बाबत अनुरोध किया है। जबकि विद्युत वितरण संहिता 2005 के प्रावधानों के अनुसार बिल संशोधन अधिशासी अभियंता के स्तर पर ही हो जाना चाहिए।

संग्रहालय के उप निदेशक योगेश कुमार ने मध्यांचल के एमडी को भेजे पत्र में कहा है कि 16 फरवरी 2022 को एक बिल 3,78,673 रुपये और उसी तारीख में दूसरा बिल 19,42,599 रुपये का भेजा गया है। इसी तरह 16 मार्च को एक बिल 3,56,276 रुपये और दूसरा बिल 22,98,866 रुपये का भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि फरवरी व मार्च में एक ही तिथि को दो-दो बिल जारी किए गए हैं, जिनमें काफी अंतर है। इसकी जांच कराया जाना आवश्यक है। पत्र में कहा गया है कि 16 अप्रैल 2022 को बिल संशोधन न होने से बिल की धनराशि बढ़ गई है। कुमार ने बिलों में हो रही त्रुटियों को सही कराने और जमा की गई अतिरिक्त धनराशि के समायोजन का अनुरोध किया है।
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