साथी छात्रों ने मिलकर दलित IIT छात्रा का दो बार किया रेप


तमिलनाडु (मानवी मीडिया पुलिस ने आईआईटी, मद्रास के एक पीएचडी स्कॉलर को करीब एक साल पहले एक साथी छात्रा का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में हिरासत में लिया है। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। 29 वर्षीय पीड़िता ने लोगों पर बलात्कार और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

 
जांच अधिकारी और चेन्नई पुलिस के विशेष जांच दल के सदस्य सुब्रमण्यम ने बताया कि एक आरोपी को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा, “हमने उसे कोलकाता की एक अदालत में पेश किया है और ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है। हमने अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है।”


पीड़ित दलित छात्रा भी पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखती है। AIDWA के महासचिव पी सुगंती ने कहा कि सात आरोपियों में से चार बंगाल के हैं और शेष तमिलनाडु के त्रिची, केरल और आंध्र प्रदेश के हैं। पीड़िता ने अपने मामले को आगे बढ़ाने के लिए AIDWA से मदद मांगी है।

आरोपियों में से दो कर्मचारी हैं जिनमें एक पीएचडी को-गाइड, एक लैब असिस्टेंट और बाकी पीड़ित के साथी हैं। पीड़िता ने शिकायत की है कि 2017 से उसका यौन उत्पीड़न और यौन शोषण किया गया और दो बार बलात्कार किया गया। पीड़िता ने बताया कि एक बार कैंपस में एक लैब में और दूसरी बार जब वे संस्था द्वारा आयोजित बेंगलुरु के दौरे पर थीं तब उनका रेप किया गया। 

साथी ने रेप कर बनाई थी फिल्म

पीड़िता द्वारा जिन पर आरोप लगाया गया उनमें से मुख्य आरोपी ने उसके साथ बलात्कार किया और उसे फिल्माया और अन्य आरोपियों के साथ उसकी तस्वीरें शेयर कीं। AIDWA महासचिव पी सुगंती ने कहा, "उसकी तस्वीरों का इस्तेमाल करके, उन्होंने उसे धमकाया और उसके साथ गलत व्यवहार किया।" 

उन्होंने कहा, “जब वह लैब में काम कर रही थी तो उन्होंने उसे छेड़ा और बॉडी शेमिंग की। उन्होंने उसके खिलाफ उसकी जाति का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि उसके (जाति) जैसा कोई व्यक्ति उनके खिलाफ कभी शिकायत नहीं कर सकता। आरोपी उच्च जाति के पुरुष हैं। जब उसने अपने को-गाइड से शिकायत की, तो उसने भी उसकी जाति के आधार पर उसके साथ भेदभाव करते हुए कहा कि वह ऐसे पुरुषों के खिलाफ नहीं जा सकती।" 

'केवल गाली देने के दोषी पाए गए थे आरोपी'

अगस्त 2020 में पीड़िता ने आईआईटी-मद्रास में शिकायत दर्ज कराई थी। उनके एक बयान में कहा गया है, "संस्थान ने तुरंत मामले को सीसीएएसएच (यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत समिति) को जांच के लिए भेज दिया।" सीसीएएसएच की आंतरिक रिपोर्ट में उनमें से चार को गाली देने का दोषी पाया गया था और शेष तीन को मुख्य आरोपी की मदद करने के लिए दोषी पाया गया था। 

सुगंती ने कहा, "आरोपियों को कैंपस में प्रवेश नहीं करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने फिर भी ऐसा किया जिससे पीड़िता को पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के लिए जाना पड़ा।"

उसने जनवरी 2021 में मायलापुर ऑल वूमेन पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई और मार्च में एक सीएसआर दर्ज किया गया और जून 2021 में एक प्राथमिकी दर्ज की गई। प्राथमिकी में बलात्कार के आरोप और एससी / एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के प्रावधान शामिल नहीं थे।

जय भीम वाले वकील चंद्रू से किया संपर्क

इस बीच, पीड़िता ने राष्ट्रीय महिला आयोग, एससी/एसटी आयोग, तमिलनाडु के डीजीपी और सरकार के अन्य लोगों को याचिकाएं भेजीं। सुगंती ने कहा, "उसके दोस्तों ने जय भीम फिल्म देखी और जस्टिस चंद्रू (जिनके वास्तविक जीवन की कहानी पर फिल्म बनी है) से संपर्क करने का आइडिया आया। जस्टिस चंद्रू ने उसे एआईडीडब्ल्यूए से जोड़ा और शहर के पुलिस आयुक्त को भी फोन किया और जांच अधिकारी को सुब्रमण्यम में बदल दिया गया।"

AIDWA ने पीड़िता की मानसिक पीड़ा को देखते हुए काउंसलिंग में उसकी मदद की है। पश्चिम बंगाल में उसका परिवार कथित तौर पर जाति और धन में उनकी स्थिति को देखते हुए शिकायत दर्ज कराने के पक्ष में नहीं था।

उसने अभी तक अपनी थीसिस जमा नहीं की है। पीड़िता बोलना नहीं चाहती थी और सुगंती ने कहा कि वह न्याय मिलने तक अपनी थीसिस जमा नहीं करना चाहती। IIT मद्रास ने सोमवार को कहा कि वे पुलिस को पूरा सहयोग दे रहे हैं।

संस्थान ने बयान में कहा, “छात्रवृत्ति की अवधि समाप्त होने के बाद भी, संस्थान ने बाहरी जाँच के दौरान भी उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की है। छात्रा कैंपस में रह रही है और संस्थान उसे अपनी डिग्री पूरी करने में सक्षम बनाने के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान कर रहा है। हम छात्रा के साथ सहानुभूति रखते हैं और इसके माध्यम से उसका समर्थन करेंगे।”


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