एक शासन में तिलक लगाना कलावा बांधना और शिखा रखना बनता था अपराध --डॉ दिनेश शर्मा


लखनऊ (
मानवी मीडिया)उपमुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा ने कहा कि  मोदी योगी सरकार द्वारा कराए गए विकास कार्यं  विपक्ष  के दर्द का कारण बन गए  हंै। उन्हे  यह विकास  हजम नहीं हो पा रहा है। आज भाजपा की सरकारों ने देश की राजनीति के एजेन्डे को ही बदल दिया है। पार्टी ने बिना भेदभाव के हर वर्ग के कल्याण के लिए कार्य किया है। अब विपक्ष को जातीय सांप्रदायिक उन्माद पैदाकर लोगों को बांटने का अपना पुराना प्रयोग याद आ रहा  है। उनका कहना था कि  अब यूपी विकास की राह पर चल रहा है।  भाजपा की सरकारों का एकमात्र मुद्दा विकास है। विपक्ष विकास पर बात करने से बच रहा है क्योंकि उसने अपने समय में विकास कार्य नहीं कराए थे। जब विपक्ष को अवसर मिला तो वे साम्प्रदायिक दंगे कराने , जातिगत विभेद कराने , एक वर्ग का तुष्टीकरण और दूसरे का अपमान कराने  में लगे रहे। भाजपा ने ऐसा कोई काम नहीं किया है। लखनऊ में भगवान परशुराम की मूर्ति की स्थापना कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए भगवान परशुराम तथा अन्य आराध्य आस्था का केन्द्र हैं जबकि विरोधियों के लिए चुनावी विषय है। भगवान परशुराम में भी राम हैं । प्रभु राम  और भगवान परशुराम दोनो में ही भगवान विष्णु का अंश है। चुनाव आते ही  उन्हें  भी भगवान परशुराम की याद आने लगी है जिन्हे  राम के नाम से भी गुरेज  था। भाजपा और अन्य दलों के बीच के अन्तर  को समझाते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए प्रभु राम आस्था का विषय हैं। एक तरफ प्रभु राम में आस्था रखने  तथा उनका  मंदिर बनवाने  वाले लोग हैं तो दूसरी ओर ऐसे लोग हैं जो मौसमी राम भक्त  हैं। ये वे लोग हैं जो राम भक्तों पर गोली चलवाते हैं।  डा शर्मा ने कहा कि भाजपा के लिए भगवान भगवान परशुराम आस्था का विषय हैं। वे उद्धारक रहे है और समाज में समानता के लिए कार्य किया है। जैसे भगवान राम ने लंका पर विजय के लिए केवट निषाद वानर आदिवासी आदि सबको एकजुट किया था उसी प्रकार से भाजपा की सरकारें सभी जाति एवं वर्गों के लिए काम कर रही हैं।  पार्टी सबका साथ सबका विकास में विश्वास रखती है। पार्टी ने   रानी उदादेवी  से लेकर गुरु गोविन्द सिंह , महाराणा प्रताप ,   भगवान बाल्मीकि रविदास     सहित तमाम महापुरुषों की मूर्ति की स्थापना कराई है। सभी महापुरुष आराध्य हैं। सारे धर्म हमारे हैं और हम  सभी धर्मों का आदर करते हैं।  हम तो उस हिन्दू  चिन्तन की बात करते हैं जिसमें चीटी  के भी अहित से बचने की बात कही जाती है क्योंकि वह पूरे आवरण को ही अपना मानता है।  

डिप्टी सीएम ने कहा कि  भाजपा वोट के लिए समाज में विभाजन करने का काम नहीं करती है। तिलक तराजू और तलवार  जैसे नारे देने वाले भी आज भारत की संस्कृति का प्रतिपादन करने के लिए मजबूर हुए हैं। राम के अस्तित्व को ही नकारने वाले आज दिल्ली के एसी कमरों से निकल कर राजनैतिक पर्यटन यात्रा कर रहे हैं। भाजपा की देश की संस्कृति का प्रतिपादन करने वाली राजनीति का अनुसरण हो रहा है। पार्टी का साफ  कहना है  कि तुष्टीकरण किसी का नहीं और न्याय सबके साथ।आज भाजपा ने राजनीति का एजेन्डा ही बदल दिया है।  पहले राम का नाम  लेना भी साम्प्रदायिक माना जाता था। कार सेवकों पर गोली तक चलाई गईं। जय श्रीराम कहने वालों पर लाठियां चलती थीं। ऐसे लोग किसी समाज का उद्धार नहीं कर सकते हैं।  उन्होंने कहा कि ब्राह्मण जाति नहीं बल्कि  संयत संस्कारित जीवन जीने की प्रवृत्ति का नाम है। यह अपने लिए नहीं बल्कि लोक कल्याण की भावना का प्रतिपादन करता है। वह  सर्वे भवन्तु सुखिना अर्थात  सबके  सुख में अपना सुख देखता है।  वह भिक्षाटन  करने के साथ ही विद्या का दान करता है। दूसरों के सुख की कामना करता है। भारत की संस्कृति का प्रतिपादन करता है। वह चाहता है कि उसके देवी देवताओं का सम्मान बना रहे। शिक्षा का विस्तार हो  व संस्कृत का प्रसार हो। आज  हर माध्यमिक संस्कृत विद्यालय में शिक्षक उपलब्ध हैं। विश्वविद्यालयों में संस्कृत की शिक्षा आरंभ हुई है।  संस्कृत के मेधावी देश में प्रथम 10 स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को एक लाख रुपए और टेबलेट देने के साथ ही उनके नाम पर गौरव पथ बन रहे हैं। संस्कृत के शिक्षकों को भी प्रदेश सरकार का शिक्षक पुरस्कार मिल रहा है। संस्कृत को हर स्तर पर प्रोत्साहन मिल रहा है। डा शर्मा ने  कहा कि उनके कुछ परिजन आज भी पंडिताई का कार्य करते हैं और इसमे हम गर्व की अनुभूति करते है। सरकार ने कर्म कांड ज्योतिष योग प्राकृतिक चिकित्सा आयुर्वेद आदि को पाठ्यक्रम तक में शामिल किया है। 

उन्होंने कहा कि  ब्राह्मण को जाति के शिकन्जे में जकडकर तिरस्कृत करने वाले लोग आज उसके महत्व को जानना चाहते हैं। एक शासन ऐसा भी था जिसमें तिलक लगाना , कलावा बांधना , शिखा रखना भी अपराध था। ऐसा करने वाले अपमानित तक होते थे। ऐसा नहीं होना चाहिए था क्योंकि सभी को अपने धर्म के प्रतिपादन का बराबरी से अधिकार है। आज लोग खोज खोज कर महापुरुषों  को याद कर रहे हैं। यह वहीं लोग हैं जो  साम्प्रदायिक कहलाये जाने के डर से मंदिर तक  नहीं जाते थे । प्रधानमंत्री ने जब काशी के भव्य  कारीडोर को जनता को समर्पित किया  उस समय यह एजेन्डा तय हुआ कि भारत अपनी संस्कृति को मानने वालों का देश है। प्रधानमंत्री ने जिस समय काशी में मां गंगा में डुबकी लगाई तो  विरोधी दल के एक नेता ने अंत  शब्द का प्रयोग कर दिया। भारत की जनता उनके शतायु होने की कामना करती है। पंजाब की सरकार को निरंकुश बताते हुए उन्होंने कहा कि वहां पर  पीएम का रास्ता रोका गया।  देश के प्रधानमंत्री ने लोगों के लिए अपना जीवन समर्पित किया है और लोगों की शुभकामनाए उनके साथ हैं।  अंत में उन्होंने पूछा राम मंदिर कौन बनवाएगा? उपस्थित लोगों ने गगनभेदी स्वर में जवाब दिया मोदी योगी।  कार्यक्रम में रीता बहुगुणा जोशी  बृजेश पाठक  रवीन्द्र त्रिपाठी  विधायक  अशोक बाजपेई  अभिजात मिश्रा पंडित राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी विनय तिवारी मयंक जोशी पंडित शिव गोपाल मिश्रा शिव शंकर अवस्थी  विधान परिषद सदस्य उमेश द्विवेदी गुड्डू त्रिपाठी आदि उपस्थित थे

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