ED ने भेजा नोटिस, फिलिपकार्ड और उसके फाउंडर पर लग सकता है 10600 करोड़ रुपए का जुर्माना


नई दिल्ली (मानवी मीडिया): ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट और उसके फाउंडर बिन्नी बंसल और सचिन बंसल पर 1.35 अरब डॉलर यानी करीब 10,000 करोड़ रुपये का जुर्माना लग सकता है। दरअसल, भारत की वित्तीय-अपराध एजेंसी यानी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वॉलमार्ट के मालिकाना हक वाली फ्लिपकार्ट और उसके संस्थापकों से यह बताने के लिए कहा है कि उन्हें विदेशी निवेश कानूनों के कथित उल्लंघन के लिए $1.35 बिलियन के दंड का सामना क्यों नहीं करना चाहिए। 

ई-कॉमर्स दिग्गज फ्लिपकार्ट और Amazon.com पर कथित तौर पर विदेशी निवेश कानूनों को दरकिनार करने को लेकर प्रवर्तन निदेशालय कई सालों से जांच कर रही है। नाम न छापने की शर्त पर प्रवर्तन निदेशालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह मामला आरोपों की जांच से संबंधित है कि फ्लिपकार्ट ने विदेशी निवेश आकर्षित किया और फिर संबंधित पक्ष WS Retail ने उसकी शॉपिंग वेबसाइट पर सामान बेचा, जिसकी कानून के तहत इजाजत नहीं है।

वहीं, फ्लिपकार्ट ने गुरुवार को कहा कि कंपनी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों सहित भारतीय कानूनों का अनुपालन करती है और फेमा (FEMA) के कथित उल्लंघन को लेकर भेजे गए नोटिस पर प्रवर्तन निदेशालय के साथ सहयोग करेगी। आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फ्लिपकार्ट और उसके प्रवर्तकों को विदेशी मुद्रा कानून के कथित उल्लंघन के लिए 10,600 करोड़ रुपये का कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

फ्लिपकार्ट ने कहा कि वह एफडीआई नियमों सहित भारतीय कानूनों और विनियमों का अनुपालन करती है। ई-कॉमर्स कंपनी ने कहा, अधिकारी अपने नोटिस के अनुसार 2009-2015 की अवधि से संबंधित इस मामले की जांच करेंगे और इसमें हम उनके साथ सहयोग करेंगे। कंपनी के संस्थापकों से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

सूत्रों के अनुसार, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) की विभिन्न धाराओं के तहत पिछले महीने कुल 10 लोगों को नोटिस जारी किया गया था, जिनमें फ्लिपकार्ट, उसके संस्थापक सचिन बंसल और बिन्नी बंसल शामिल हैं। सूत्रों ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद नोटिस जारी किया गया और कंपनी पर लगे आरोपों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों का उल्लंघन और मल्टी-ब्रांड रिटेल को विनियमित करना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि फ्लिपकार्ट और उसके अधिकारी अब न्यायिक फैसले का सामना करेंगे। एजेंसी के चेन्नई स्थित एक विशेष निदेशक-रैंक के अधिकारी इस कार्यवाही का संचालन करेंगे।

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