ग्राम पंचायत विकास योजना से लेकर ऑडिट तक सभी कार्य को ऑनलाइन सम्पादित कर एक बहुआयामी भूमिका निभा रही है


लखनऊ (मानवी मीडिया)
अपर सचिव, पंचायतीराज मंत्रालय, भारत सरकार, चन्द्रशेखर कुमार ने कहा कि वर्ष 2022-23 से पंचायती राज मंत्रालय द्वारा ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना को सतत् विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण पर केन्द्रित कर 09 विषयगत क्षेत्रों में कार्य करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है एवं इसके अनुसार ही ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर लक्ष्य आधारित गतिविधियों के साथ कार्ययोजना को अपलोड किया जाना है। एल.एस.डी.जी. के सफल क्रियान्वयन हेतु भारत सरकार के स्तर से 26 विभागों तथा मंत्रालयों के संयुक्त सचिवों द्वारा संकल्प पत्र पर हस्ताक्षर किये गये हैं तथा सभी 09 विषयों पर ज्वाइंट एडवाजरी भी जारी की गयी है। ग्राम पंचायत विकास योजना का लक्ष्य पंचायतों का समग्र विकास है इस कारण पंचायती राज विभाग की गतिविधियों के अतिरिक्त ग्राम विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एस.आर.एम.एम.) एवं वन विभाग महत्वपूर्ण विभागों की आवश्यक गतिविधियों/योजना सम्मिलित किया जाना आवश्यक है।

यह जानकारी  कुमार ने आज प्रदेश के पंचायती राज विभाग द्वारा पंचायतीराज निदेशालय, अलीगंज के प्रेक्षागृह में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में दी। उन्होंने कार्यशाला में आये विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को बताया कि ग्राम पंचायतों के समग्र एवं समेकित विकास हेतु ग्राम पंचायत विकास योजना (जी.पी.डी.पी.)/वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया को वर्ष 2015-16 में लागू किया गया है। प्रतिवर्ष योजना ससमय तैयार करने के लिए 02 अक्टूबर-31 जनवरी के मध्य "जन योजना अभियान" का भी संचालन किया जाता है।  कुमार ने बताया कि भारत सरकार सतत् विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण के माध्यम से सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की बात कर रही है, निर्धारित 09 थीम की प्राप्ति बिना विभागीय सहयोग एवं अन्तर्विभागीय समन्वय के सम्भव नही है। पंचायतों में हमेशा अपनी क्षमता से अधिक कार्यप्रदर्शन किया है। इस समय प्रदेश में सभी पंचायतें डिजिटल प्लेटफार्म पर है एवं भारत सरकार के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से भुगतान कर रही है। ग्राम पंचायत विकास योजना से लेकर ऑडिट तक सभी कार्य को ऑनलाइन सम्पादित कर एक बहुआयामी भूमिका निभा रही है। जहाँ एक ओर कोविड-19 महामारी में भी पंचायतों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया तथा राज्य वित्त आयोग की रु0 149.50 करोड़ की धनराशि को स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाये जाने हेतु हस्तान्तरित किया गया वहीं दूसरी ओर आपरेशन कायाकल्प के अन्तर्गत प्रदेश में प्राथमिक/ उच्च प्राथमिक विद्यालयों/ आंगनबाड़ी, बाल मैत्रिक शौचालय, पुस्कालय आदि पर सराहनीय कार्य करते हुए विगत पाँच सालों कार्ययोजना के माध्यम से 79,718 शासकीय विद्यालयों/आंगनबाड़ी केन्द्रों में बाल मैत्री शौचालय का निर्माण 24,580 ए०एन०एम० सेण्टर/आंगनबाड़ी केन्द्रों की मरम्मत 3,72,000 हैण्डपम्प रिबोर व
मरम्मत, 32,02,931 सी०सी, खड़ण्जा रोड, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था एवं करीब 83,066 प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों का जीर्णोद्वार का कार्य कराया और यह आकड़े ऑनलाइन आमजनमानस के लिए सुलभ है।

निदेशक, पंचायती राज विभाग  अनुज कुमार झा ने कहा कि कार्यशाला अन्तर्विभागीय समन्वय पर आधारित है एवं यही आधार पंचायतों द्वारा तैयार की निर्देशन जाने वाली वार्षिक कार्ययोजना को मजबूती प्रदान करता है। आप सभी इस बात से भी अवगत है कि उत्तर प्रदेश में प्रत्येक स्तर की पंचायत की भूमिका एक पृथक स्थानीय स्वशासन के रूप में स्थापित है एवं प्रदेश सरकार की विस्तरित इकाई के रूप में प्रभावी रूप से कार्यों का सम्पादन कर रही है। समस्त विभागों
के कार्यो की आधारभूत इकाई भी ग्राम पंचायत है, अतएव इस स्तर पर विभागीय समन्वय की सर्वाधिक आवश्यकता होती है एवं इस स्तर ही समन्वय करते हुए विभागीय कन्वर्जेस के माध्यम से उल्लेखनीय कार्यों को सम्पादित किया जा सकता है।
निदेशक पंचायतीराज ने विभिन्न विभागों से आये अधिकारियों से अपेक्षा की कि पंचायतों को सतत् विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण पर कार्य किये जाने का सुझाव दिया जा रहा जोकि विभागों के समन्वयन के सम्मव नही है और इसके लिए विभागों को पंचायतों के पास जाना होगा और उनके कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा। सभी लाइन डिपार्टमेंट के कर्मी जी.पी.डी.पी. तैयार किए जाने हेतु आयोजित ग्राम सभा में प्रतिभाग करें, अपनी विभागीय कार्ययोजना को जी.पी.डी.पी. का भाग बनाए। एल.एस.डी.जी. के लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु विभागों द्वारा हैंडहोल्डिंग सपोर्ट ग्राम पंचायतों को दिया जाना एवं इस हेतु विभागीय दिशा-निर्देश निर्गत किया जाना। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जी.पी.डी.पी. के क्रियान्वयन एवं समन्वयन हेतु नियमित बैठकें एवं उनमें लाइन डिपार्टमेंट की उपस्थिति के साथ प्रत्येक स्तर पर विभागों द्वारा प्रक्रिया का अनुश्रवण करके ही हम सही मायने में पंचायतों को सपोर्ट दे सकते है। यह बात एक उदाहरण से हमसब बेहतर समझ सकते है कि वन विभाग के सहयोग से तैयार किये जाने वाले जन जैव विविधता रजिस्टर (People's Bio-Diversity Register-PBR) सम्बन्धी गतिविधियों तथा पंचायत की वानिकी योजना (Forestry
Plan) को जी.पी.डी.पी. में सम्मिलित करने के लिए वन विभाग को ग्राम पंचायत की तकनीकी सहायता देनी होगी।
कार्यशाला मे पंचायती राज मंत्रालय से  पंकज कुमार, अनुसचिव,  तौकीर अहमद, राष्ट्रीय सलाहकार,  योगेश कुमार तकनीकी कन्सलटेंट, एन.आई.सी. विभाग से  राज कुमार, अपर निदेशक, पं.रा., ए.के.शाही, संयुक्त निदेशक, पं.रा.,  एस.एन.सिंह, उपनिदेशक (पं0),  प्रवीणा चौधरी, संयुक्त निदेशक, पंचायती राज प्रशिक्षण संस्थान एवं नोडल अधिकारी, आर.जी.एस.ए.  योगेश कटियार, उपनिदेशक, पं.रा.निदेशालय का ग्रामीण क्षेत्र के विकास से जुड़े विभिन्न विभागों के राज्य स्तरीय अधिकारी एवं जनपद स्तरीय अधिकारी, कार्यशाला में उपस्थित मंडलीय उपनिदेशक (पं०) एवं जिला पंचायत राज्य अधिकारी, विभागीय कन्सलटेंट, कार्यशाला में ऑनलाइन जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे
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