डिम्पल यादव की रिकार्ड मतों से जीत की खबर आते ही लखनऊ सहित प्रदेश भर में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर

लखनऊ (मानवी मीडिया) मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी डिम्पल यादव की रिकार्ड मतों से ऐतिहासिक जीत की खबर आते ही राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश भर में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर छा गई। उत्साह से भरे कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को मिठाई खिलाई और बधाई दी।

    समाजवादी-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी  मदन भैया की जीत पर भी कार्यकर्ताओं ने हर्ष जताया। रामपुर में पार्टी प्रत्याशी की हार पर दुःख एवं क्षोभ जताते हुए कहा गया कि वहां भाजपा सरकार और प्रशासन ने खुलकर धांधली की है जो शर्मनाक है।

    समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय लखनऊ में सुबह से ही कार्यकर्ता एकत्र होने लगे थे। जैसे ही डिम्पल  की बड़ी बढ़त की सूचना टीवी पर दिखी, कार्यकर्ताओं में जोश आ गया। मिठाई बांटने लगी। एक दूसरे के गले लगकर बधाइयां दी गई। किशन सिंह धानुक के बैंडबाजे के साथ किन्नर सभा की निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष पायल सिंह की टीम ने नेताजी अमर रहे और अखिलेश यादव जिंदाबाद-डिम्पल यादव जिंदाबाद के नारों के साथ पुष्प वर्षा की। महिलाएं भी बड़ी संख्या में मौजूद रही।

    इस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री  राजेन्द्र चौधरी ने  डिम्पल यादव को जीत की बधाई देते हुए कहा कि इस जीत ने सन् 2024 की दिशा का संकेत दे दिया है। उन्होंने कहा कि जबसे भाजपा सत्ता में आई है उसका आचरण अलोकतांत्रिक और उसकी भाषा अमर्यादित रही है। मतदाताओं ने दिखा दिया है कि जो लोकतंत्र का अपमान करते हैं उन्हें मान्यता नहीं मिलती है।

     चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी जनता के हितों के लिए संघर्ष करती आई है। वही भाजपा का राजनीतिक विकल्प साबित हुई है। भाजपा नेतृत्व को भी जनादेश का सम्मान करना चाहिए। भाजपा ने उत्तर प्रदेश को अराजकता में झोंक दिया है। श्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में जो जीत हासिल हुई है उसके लिए क्षेत्रीय जनता में नेताजी के प्रति सम्मान और व्यापक सहानुभूति रही है। भाजपा राज में किसान, नौजवान, गरीब सभी परेशान हैं, महंगाई-भ्रष्टाचार का बोलबाला है। श्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में भाजपा का सफाया तय है।

    राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि राजनीति में चुनाव सिर्फ एक पड़ाव है, असली ताकत जनता की है और लोकतंत्र में उसकी ही स्वीकारिता है। घमण्डी राजनीति का जीवन अल्पकालिक ही होता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में तानाशाही राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं होता है। भाजपा को अपने भविष्य की चिंता करनी चाहिए।         

               

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