दलित बहनों से रेप, 4 महीने बाद FIR:क्योंकि, पुलिसवाले आरोपी थे


(मानवी मीडिया
भैरव की जिंदगी की वह तारीख, जिसे वह एक पल के लिए भी भूल नहीं पाते। रात में नींद आती भी है तो उन्हें अपनी बेटियों की वो चीखें याद आ जाती हैं, जब वो खुद को बचाने के लिए 'पापा-पापा' चिल्लाई थीं। लेकिन वो कुछ नहीं कर पाए। भैरव उस पल को याद कर सिहर जाते हैं, जब ढाबे में 3 पुलिसवालों ने उनकी 15 साल की बेटी सरिता और 14 साल की कुसुम से रेप किया। घरवाले बच्चियों को बचाने दौड़े तो उनके आगे रिवाल्वर तान दी गई। मां रो-रोकर बेसुध हो गई, लेकिन आरोपी नहीं पसीजे।

घटना के 241 दिन बाद बेटियों के इलाज और कानूनी लड़ाई में भैरव के 8 लाख रुपए खर्च हो गए। जमीन बेचनी पड़ी, रिश्तेदारों से उधार लिया। स्थानीय नेताओं की मदद से परिवार का बोझ कुछ कम तो हुआ। लेकिन दर्द आज भी वैसा का वैसा है। उधर, केस में हाईकोर्ट के आदेश के बाद 21 अगस्त को FIR दर्ज की गई। हरदोई पुलिस ने 22 दिन पहले कोर्ट को बताया कि 2 आरोपी सिपाही (मनोज सिंह और प्रियांशु) गिरफ्तार हुए हैं। आरोपी सब-इंस्पेक्टर संजय सिंह अभी भी फरार है।

दैनिक भास्कर की टीम पीड़ित परिवार से मिलने हरदोई पहुंची। घरवाले आज भी इतने सहमे हैं कि कैमरे के आगे बात करने को तैयार नहीं। उन्हें भरोसे में लिया तब परिवार के लोग ऑफ-कैमरा बात करने को तैयार हुए। आइए पूरी बात जानते हैं, लेकिन पहले यह बता दें कि इस खबर में सभी पीड़ितों के नाम बदले हुए हैं।

शुरुआत 14 अप्रैल की घटना से करते हैं...

शराब नहीं दी तो घसीटकर ढाबे के पीछे ले गए
भैरव अपने घर से 1 किलोमीटर दूर लखनऊ-शाहजहांपुर रोड पर ढाबा चलाते थे। 14 अप्रैल को वह ढाबे पर नहीं थे। वहीं पास में कहीं गए थे। उस दिन उनकी पत्नी और दोनों बेटियां थी। शाम का वक्त था। परिवार ने बताया कि ढाबे पर 3 पुलिसवाले सब-इंस्पेक्टर संजय सिंह, मनोज और प्रियांशु आए। उसमें से एक ने दोनों बहनों को बुलाया। कहा, “शराब पीनी है गिलास लेकर आओ।” लड़की ने कहा, “शराब नहीं यहां खाना मिलता है। खाने का ऑर्डर दीजिए।”

लड़कियों के जवाब से पुलिसवाले गुस्से से लाल हो गए। वो खड़े हुए और दोनों लड़कियों को पीटना शुरू कर दिया। पास खड़ी मां गीता देवी दोनों बेटियों को बचाने के लिए दौड़ी, तो संजय सिंह ने रिवाल्वर निकाल ली। प्रियांशु और मनोज ने दोनों लड़कियों को पकड़ा और घसीटते हुए ढाबे के पीछे ले गए। लड़कियों की चीखें सुन भैरव भी आ गए। लेकिन पुलिसवाले भागे नहीं। तीनों ने बहनों से रेप किया। (लखनऊ हाईकोर्ट में वादी मां की याचिका में ये आरोप लगाए हैं।)

लड़कियों के कपड़े धूल से सने हुए थे
भैरव उस घटना को याद करते हुए बताते हैं, "पुलिसवाले बेटियों को ढाबे के पीछे ले गए। बच्चियों के चिल्लाने पर उनको पीटा, गलत काम किया। फिर तीनों गाड़ी में बैठकर वहां से चले गए।" भैरव और उनकी पत्नी भागते हुए बच्चियों के पास पहुंचे। उनके शरीर पर खरोच और कपड़े पर धूल-मिट्टी और खून के निशान थे। छोटी लड़की कुसुम को गहरी चोट आई थी। बच्चियों की हालत देख परिवार घबरा गया था। घटना में शामिल लोग स्थानीय पुलिसवाले ही थे। इसलिए भैरव के परिवार ने शिकायत करने से पहले बेटियों का इलाज करवाना सही समझा।

दो-दो प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवाया- कुसुम ठीक नहीं हुई

हमसे बात करते हुए भैरव लगातार सड़क पर आ रही गाड़ियों को देखते रहते। बीच-बीच में चुप हो जाते। उसे डर था कि कहीं पुलिसवाले न आ जाएं। दरअसल, घटना के बाद भैरव और उसके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिल चुकी हैं। भैरव ने बताया, "घटना के बाद मैंने दोनों बच्चियों को हरदोई से लेकर शाहजहांपुर तक प्राइवेट अस्पतालों में दिखाया। सरिता तो अब ठीक है, लेकिन कुसुम अभी भी बीमार रहती है। उसका इलाज कराने में खेत तक बेच दिया। लेकिन वो ठीक नहीं हो पाई।"

पुलिस का मैटर था-ढाबे के मालिक ने निकाल दिया

भैरव के मुताबिक, घटना के बाद उसका परिवार पूरी तरह से टूट गया। जिस किराए की जमीन पर वो ढाबा चलाते थे। उसके मालिक ने भी उसे वहां से निकाल दिया। पुलिस का मैटर होने की वजह से गांववाले भी इसपर ज्यादा नहीं बोलते थे। किसी तरह उसने अपने रिश्तेदारों और स्थानीय दलित नेताओं की मदद लेकर घर चलाया।

भैरव ने अक्टूबर में लखीमपुर खीरी जिले में किराए पर एक छोटा होटल लिया है। अब उसी से उसके परिवार की रोजी-रोटी चल रही है। लेकिन यहां भी वह पूरे दिन नहीं रहता। उसने खाने बनाने के लिए एक लड़का रखा है। वही होटल की रखवाली करता है। यहीं से मिलने वाले पैसे से वो बच्चियों के इलाज में लगाते हैं।

हम चाहते थे कि भैरव से घटना से जुड़े और केस में पुलिस के रवैए को लेकर और बात की जाए। उन्होंने मनाकर दिया। भैरव कहते हैं, "हम इससे ज्यादा आपको नहीं बता सकते। आपके जो भी सवाल हैं, वो हमारे वकील के सामने पूछ लीजिएगा।"

न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाऊंगी
सरिता और कुसुम की मां गीता देवी इंसाफ के लिए लड़ रही हैं। लोकल पुलिस और कचहरी के अनगिनत चक्कर लगाने के बाद कोई रास्ता नहीं दिखा, तब गीता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अलाव तापती गीता बताती हैं, "मैंने लखनऊ हाईकोर्ट में केस लड़ा तब जाकर 2 पुलिसवालों को गिरफ्तार किया गया। मैं चाहती हूं कि फरार चल रहे एक आरोपी को भी जल्द से जल्द पकड़ा जाए। इसके लिए अगर सुप्रीम कोर्ट भी जाना पड़े, तो मैं जाऊंगी।”

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