कोरोना से माता-पिता को खोने वाले बच्चों का सहारा बनी योगी सरकार


यूपी (मानवी मीडियाकोविड का संकटकाल कई परिवारों पर कहर बन कर टूटा था. कई परिवारों के कमाने वाले सदस्य की जान कोविड में चली गई तो वहीं कई बच्चे अनाथ हो गए. पर 18 वर्ष से कम उम्र के ऐसे बच्चों की पढ़ाई जारी रहे और उनका भरण पोषण हो सके, इसके लिए यूपी सरकार ने उनकी जिम्मेदारी उठाने की पहल की है. यूपी की योगी सरकार  ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ शुरू कर इसकी शुरुआत की.

13371 बच्चों के लिए प्रथम छमाही किस्त की धनराशि सभी जिलों को भेजी गई है. इससे बच्चों को अपने पढ़ाई और भरण पोषण में आर्थिक सहायता मिलेगी. प्रथम छमाही के लिए 2217 बच्चों को लैपटॉप भी मिलेगा. इसके लिए भी जिलों को धनराशि जारी की गई है.

योगी सरकार इन बच्चों की पढ़ाई में कोई रुकावट न आए, इसके लिए उनको आर्थिक सहायता दे रही है. इस बार 18 वर्ष पूर्ण करने वाली लड़कियों की संख्या 5 है. ये वो बालिकाएं हैं जिनके माता-पिता या घर में जीविकोपार्जन करने वाले अभिभावक की कोविड काल के दौरान कोविड से मौत हो गई थी. इन 5 बालिकाओं के लिए शादी अनुदान की धनराशि भी जारी की गई है.

अगर कोविड के अतिरिक्त किसी अन्य कारण से भी मौत हो गई है, तो उन्हें भी योजना के तहत राशि आवंटित हो चुकी है. योजना की शुरुआत में 18 साल तक के बच्चों को इसका लाभ दिया गया, जबकि बाद में 18 से 23 साल के ऐसे किशोरों को भी सहायता दी गई, जिन्होंने अपने माता-पिता अथवा अभिभावक को कोविड या अन्य कारणों से खो दिया है.

ऐसे बच्चे जिन्हें बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति या बाल वेश्यावृत्ति से मुक्त कराकर परिवार या पारिवारिक वातावरण में समायोजित कराया गया है, उनका भरण पोषण और पढ़ाई हो सके, इसके लिए उन्हें भी इस योजना में शामिल किया गया है. इस योजना का लाभ एक परिवार के अधिकतम दो बच्चों को दिया जा रहा है

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