काशी विश्वनाथ मंदिर को मिला पहला तमिल ट्रस्टी


उत्तर प्रदेश (मानवी मीडिया
काशी विश्वनाथ मंदिर को अपना पहला तमिल ट्रस्टी मिल गया है. के वेंकट रमण घनपति तमिल मूल के पहले व्यक्ति हैं, जिन्हें यूपी सरकार ने काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट का ट्रस्टी बनाया है. योगी सरकार ने ‘काशी तमिल संगमम’ के उद्घाटन के दिन ही उन्हें यह अवसर प्रदान किया. 19 अगस्त 1973 को तमिलनाडु के चेन्नई में जन्मे के वेंकट रमण घनपति ने अपनी बी. कॉम तक की पूरी शिक्षा वाराणसी में पूरी की.

घनपति के पिता वी कृष्णमूर्ति घनपति काशी के एक बहुत प्रसिद्ध घनपदीगल और वैदिक विद्वान थे. संस्कृत और भारतीय शास्त्रों में उनकी प्रवीणता के लिए उन्हें 2015 में सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. बता दें कि काशी में काफी संख्या में तमिल प्रवासी परिवार रहते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को काशी में एक महीने तक चलने वाले कार्यक्रम ‘काशी तमिल संगमम’ का उद्घाटन किया.

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ‘काशी तमिल संगमम’ गंगा-यमुना के संगम की तरह अनंत संभावनाओं और सामर्थ्य को समेटे हुए है. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आज हमारे सामने एक ओर पूरे भारत को अपने आप में समेटे हमारी सांस्कृतिक राजधानी काशी है तो दूसरी ओर, भारत की प्राचीनता और गौरव का केंद्र, हमारा तमिलनाडु और तमिल संस्कृति है. गंगा-यमुना के संगम जैसा पवित्र यह संगमम अनंत संभावनाओं और सामर्थ्य को समेटे हुए है.’

उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के बीच ‘काशी-कांची’ का संबंध जोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘दोनों क्षेत्र, संस्कृत और तमिल जैसी विश्व की सबसे प्राचीन भाषाओं के केंद्र हैं. काशी में बाबा विश्वनाथ हैं तो तमिलनाडु में भगवान रामेश्वरम का आशीर्वाद है. काशी और तमिलनाडु दोनों शिवमय हैं. एक स्वयं में काशी है, तो तमिलनाडु में दक्षिण काशी है.’

काशी-तमिलनाडु में भारतीय संस्कृति के सभी तत्व समान-CM योगी

वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी और तमिलनाडु में भारतीय संस्कृति के सभी तत्व समान रूप से संरक्षित हैं. उन्होंने कहा कि आज हो रहे दक्षिण और उत्तर के अद्भुत संगम से सहस्त्राब्दियों पुराने संबंध को फिर से नवजीवन प्राप्त हो रहा है. सीएम योगी ने कहा, ‘काशी के धार्मिक महत्व के कारण देश के सभी भागों के लोग सदियों से यहां आते रहे हैं. गंगा जी के तट पर बसी ये पवित्र नगरी भारत की धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनी हुई है. इसी प्रकार तमिलनाडु प्राचीन काल से ही ज्ञान, कला और संस्कृति का केंद्र रहा है, जिसे पांड्य, चोल, पल्लव आदि राजाओं ने विस्तार दिया.’

‘काशी तमिल संगमम’ का उद्देश्य

इस कार्यक्रम का उद्देश्य काशी और तमिलनाडु के विद्वानों, विद्यार्थियों, दार्शनिकों, व्यापारियों, कारीगरों, कलाकारों सहित जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों को एक मंच पर लाना तथा अपने श्रेष्ठ परंपराओं को साझा करना और एक दूसरे के अनुभव से सीखने का अवसर प्रदान करना है

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