अच्छे दिन की आस में एक और ड्रीम प्रोजेक्ट हो गया ‘खंडहर’


कन्नौज (मानवी मीडिया
सूबे में सपा शासन के दौरान अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार बच्चों का म्यूजियम अब खंडहर बन गया है। न सिर्फ पांच साल से ज्यादा समय से इसका काम रुका पड़ा है, बल्कि अब वहां से जरूरी और कीमती सामान की चोरी भी होने लगी है। इस ओर किसी का ध्यान भी नहीं है।

अपने आसपास के जिलों में कन्नौज ऐसा इकलौता शहर है, जहां इलाकाई विरासत को सहेजे हुए म्यूजियम है। वह भी एक नहीं बल्कि दो-दो। जी हां, कन्नौज में दो-दो म्यूजियम हैं। एक तो पांच साल पहले ही बनकर तैयार हो चुका है। एक को पांच साल से काम आगे बढ़ने का इंतजार है। यह दोनों ही म्यूजियम सूबे की हुकूमत से नजर-ए-इनायत की राह तक रही हैं।

खुशबू का शहर कन्नौज अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए भी मशहूर है। सम्राट हर्षवर्द्धन, राजा जयचंद, राजकुमारी संयोगिता की यादों को अपने दामन में समेटे यह शहर अपने गौरवशाली इतिहास पर इठलाता रहता है। यहां की ऐतिहासिक विरासत को सहेजने के लिए ही यहां बाकायदा म्यूजियम बनाया गया है। पहले तो एक म्यूजियम में यहां की विरासत को सहेजा गया, फिर दूसरा म्यूजियम बच्चों के लिए बनना मंजूर हुआ। इलाकाई विरासत को सहेजे हुए म्यूजियम को बनकर तैयार हुए पांच साल से ज्यादा हो चुका है। इसकी शुरुआत अब तक नहीं हो सकी है। बच्चों के लिए बनने वाला म्यूजियम का काम पिछले पांच साल से ठप पड़ा है। शुरू में जितना काम हुआ, वह वहीं पर रुका हुआ है।

पांच साल में बदरंग हो गई आधी-अधूरी इमारत

शहर में गैस गोदाम रोड पर बच्चों के लिए म्यूजियम बनने का काम शुरु हुआ था। वर्ष 2016 में तब की सरकार ने इसके निर्माण के लिए आठ करोड़ रुपए मंजूर किया था। करीब आधी रकम जारी करके उत्तर प्रदेश निर्माण निगम लिमिटेड को इसके बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तीन मंजिला इमारत बनकर तैयार भी हो गई। लेकिन उसके आगे का काम नहीं बढ़ सका। न तो बजट जारी हुआ, न ही इसे आगे बढ़ाने के लिए फिर से कोई सार्थक कोशिश ही हो सकी। इस म्यूजियम का मकसद बच्चों के किताब की दुनिया से बाहर की दुनिया को रूबरू कराना था। 

खिलौना म्यूजियम बनने की चर्चा, आगे नहीं बढ़ी बात

बाल संग्रहालय तो शुरू नहीं हो सका। बीच-बीच में उसी इमारत को पूरी करके उसमें खिलौना म्यूजियम खोले जाने की सुगबुगाहट होती रही। उस सिलसिले में शासन के निर्देश पर अलग-अलग एजेंसियों ने मुआयना किया। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक फाइल दौड़ी, लेकिन बात नहीं बन सकी है। मुख्य म्यूजियम के अध्यक्ष दीपक कुमार के मुताबिक पिछले महीने दिल्ली में हुई बैठक में भी इसकी चर्चा हुई है। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश निर्माण निगम लिमिटेड की कानपुर इकाई को जरूरी निर्देश दिए गए हैं।

बाल संग्रहालय एक नजर में

  • 2016 में गैस गोदाम रोड पर बच्चों के लिए म्यूजियम का निर्माण शुरू हुआ
  • तीन मंजिला इमारत में ग्राउंड फ्लोर पर सभागार और गैलरी बनी है।
  • आठ करोड़ रुपए तत्कालीन सरकार ने म्यूजियम निर्माण के लिए मंजूर किया
  • करीब आधी रकम निर्माण के लिए पहले जारी की गई
  • पहली किस्त के बाद दूसरी किस्त जारी नहीं हुई, काम पूरी तरह से रुक गया

म्यूजियम अध्यक्ष दीपक कुमार का कहना है कि म्यूजियम को औपचारिक रूप से शुरू कराने के लिए निदेशालय को पत्र भेजा गया है। शासन से मंजूरी मिलते ही आगे का काम शुरू हो जाएगा। उदघाटन होने पर स्टाफ भी बढ़ सकेगा।

डीएम शुभ्रांत शुक्ल का कहना है कि बाल संग्राहलय निर्माण का काम रुका होने की वजह पता की गई है। शासन को अवगत कराया गया है। म्यूजियम को शुरू कराने का भी प्रयास हो रहा है।

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