उच्च न्यायालय द्वारा डेंगू के मामले पर स्वयं संज्ञान लेना तथा अधिकारियों को निजी तौर पर उपस्थित होने का ओदश देना सरकार की विफलता- कांग्रेस

लखनऊ (मानवी मीडिया)माननीय उच्च न्यायालय द्वारा डेंगू के मामले पर स्वयं संज्ञान लेते हुए जिस तरह से अधिकारियों को निजी तौर पर उपस्थित होने का ओदश दिया है, इससे स्पष्ट होता है कि सरकार शासन चलाने में पूरी तरह से असमर्थ है। प्रदेश सरकार के लिए सबसे शर्मनाक बात यह है कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा प्रदेश सरकार के ब्यूरोक्रेसी की कार्य प्रणाली पर असंतोष जाहिर किया गया। यह स्पष्ट तौर पर प्रदेश सरकार के ऊपर प्रश्नवाचक चिन्ह है।

  उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता कृष्ण कान्त पाण्डेय ने कहा कि ऐसा लगता है कि पूरी सरकार और सरकारी मशीनरी सरकार चलाने में विफल हो चुकी है, अब मुख्यमंत्री को यह निर्णय करना है कि अपनी कार्यप्रणाली बदलते हैं अथवा ब्यूरोक्रेसी के आगे समर्पण कर देते हैं। दोनों स्थितियों में जनता का हित ही प्रभावित होगा। पूरा प्रदेश डेंगू की चपेट में बुरी तरह फंसा हुआ है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ अन्य जनपदों के साथ ही बुरी तरह से प्रभावित है।

कांग्रेस प्रवक्ता कृष्ण्कांत पाण्डेय ने कहा कि फागिंग की कहीं कोई व्यवस्था नहीं दिख रही है, डीडीटी का छिड़काव तो अब सपना हो गया है। भाजपा पार्षद द्वारा स्वयं स्वीकार किया जा रहा है कि फागिंग के लिए नगर आयुक्त ना तो तेल दे रहे हैं और ना ही केमिकल दे रहे हैं, यह अपने आप में सरकार, नगर निगम की लापरवाही का सबसे बड़ा सबूत है।

प्रवक्ता कृष्ण्कांत पाण्डेय ने कहा कि प्रदेश मुख्यालय के सिविल हॉस्पिटल में लगभग दो घंटे से ज्यादा समय तक मरीज तड़पता रहा लेकिन उसे बेड़ नहीं मिल पा रहा, सच तो यह है कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार कागजों तक ही सीमित है। नगर निगमों में मशीनों और संसाधनों की भारी कमी है। शहर के कई मुहल्लों में कूड़ा हफ्तों तक नहीं उठ पा रहा है। यही स्थिति पूरे प्रदेश में बनी हुई है।

कृष्ण्कांत पाण्डेय ने आगे कहा कि जनपद बरेली में एक टेंट व्यापारी सहित कई लोगों के दम तोड़ने का जहां समाचार मिला वहीं डेंगू मरीजों का आकड़ा भी सैकड़ा पार कर चुका है। बाराबंकी में तेज बुखार से कई लोगों की मृत्यु की सूचना है जबकि बुखार से पीड़ित दर्जनों मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है, जिला अस्पतालों पर मरीजों की भीड़ देखी जा सकती है। प्राइवेट अस्पतालों में भी बेड़ो का आभाव देखने को मिल रहा है। जनवरी 2022 से अब तक लगभग आठ हजार रोगी सामने आ चुके हैं।

प्रवक्ता कृष्ण्कांत पाण्डेय ने आगे कहा कि पूरे प्रदेश के अधिकांश नगर निगमों में भाजपा के मेयर व पार्षद हैं तथा देश व प्रदेश में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, इसके बावजूद फागिंग, छिड़़काव व कूड़ा प्रबन्धन की समुचित व्यवस्था ना हो पाना पूरी तरह से सरकार की लापरवाही का नतीजा है। नगर विकास मंत्री लगातार हिदायतें देते सुने गये परन्तु व्यवस्था में कोई सुधार ना होना उनकी नाकामी ही दिखाता है।

  प्रवक्ता कृष्ण्कांत पाण्डेय ने आगे कहा कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री जो उपमुख्यमंत्री भी हैं उनकी विवशता किसी से छिपी नहीं है। उनके अधिकारी ही उनकी बात नहीं मानते यह पहले ही उजागर हो चुका है। लखनऊ स्थित केजीएमयू के निरीक्षण के उपरान्त भी स्ट्रेचर ना मिलने की वजह से एम्बुलेंस में तड़प कर महिला मरीज की मौत, खुले बाजार में एचआरएफ स्टोर की बिक रही दवाईयां, चार हजार रोजाना की ओपीडी अस्पताल में मात्र 70 लोगों को ही निशुल्क दवा का मिल पाना, तीमारदार का स्वयं ही ग्लूकोज स्टैण्ड बन जाना अल्टरासाउण्ड के लिए दो-दो घंटे की लाइन तथा लंबी वेटिंग डेट उपमुख्यमंत्री की विवशता ही दर्शाता है। लखनऊ की मेडिकल यूनिवर्सिटी जो 23वें स्थान पर हुआ करती थी मात्र पांच साल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार में 75वें स्थान पर पहुंच गई यह भाजपा सरकार की स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र में उपलब्धि है।
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