जेम्स टेलीस्कोप ने दुनिया को फिर किया हैरान

 


न्यूयॅार्क  (मानवी मीडिया अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा  के जेम्स वेब अंतरिक्ष टेलीस्कोप  ने एक बार फिर कुछ कमाल की तस्वीरें दुनिया से साझा की है। इस बार जेम्स वेब ने नेपच्युन ग्रह की तस्वीर ली है, जिसमें नेप्च्यून  की रिंग्स बुल्कुल साफ पर दिखाई दे रही है। यह 30 से अधिक सालों में किसी टेलीस्कोप द्वारा नेपच्युन की ली गई सबसे शानदार तस्वीरें है।


समाचार एजेंसी एआइएएनएस के मुताबिक, साल 1989 मे नासा के वोयाजर 2  स्पेसक्राफ्ट ने नेप्च्यून की सबसे पहली तस्वीर ली थी लेकिन जेम्स वेब द्वारा ली गई तस्वीरों की तुलना में वोयाजर 2  की तस्वीर उतनी स्पष्ट नहीं थी

इसके अलावा तस्वीरों में धुंधली धूल वाली बैंड भी दिख रही है। नेप्च्यून सिस्टम विशेषज्ञ और जेम्स वेब के अन्तर्विषयी विशेषज्ञ  हेइडी हैमेल ने बताया कि हमनें आखिरी बार इन धुंधली रिंग्स को तीन दशक पहले देखा था। वहीं, जेम्स वेब की मदद से हली बार हमनें नेप्चयून को इन्फ्रारेड में देखा है। नेप्च्यून ग्रह के आसपास दिख रहे हैं कई चमकीले तत्व भी दिख रहे हैं।

नासा के अनुसार, जेम्स वेब बेहद स्थिर और सटीक तस्वीरों को खींचने में समर्थ है। इस टेलीस्कोप की मदद से बेहद कमजोर और धुंधले रिंग्स का भी पता लगाया जा सकता है। नेप्च्यून के 14 ज्ञात चंद्रमाओं में से सात की तस्वीर खींचने में यह टेलीस्कोप कामयाब रहा है। तस्वीर में नेप्च्यून ग्रह के आसपास कई चमकीले तत्व भी दिख रहे हैं, लेकिन यह कोई तारी नहीं है।

दरअसल, यह सभी चमकीले पदार्थ चंद्रमा या फिर ट्राइटन हैं, जो नाइट्रोजन के अणुओं से ढका हुआ है। यह सूरज की रोशनी से 70 प्रतिशत चमकता है। बता दें कि टेलीस्कोप द्वारा ली गई तस्वीर में आकाशगंगाओं और सितारों को भी देखा जा सकता है।

दुनिया का सबसे शक्तिशाली है यह टेलीस्कोप

बता दें कि साल 1846 के बाद नेपच्यून की खोज के बाद इस ग्रह ने शोधकर्ताओं को खूब आकर्षित किया है। नेपच्यून, पृथ्वी से सूर्य की तुलना में 30 गुना दूर मौजूद है। बता दें कि जेम्स स्पेस टेलीस्कोप दुनिया का सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोप है जिसे नासा, यूरोपियन स्पेस एजेंसी और कनाडाई स्पेश एजेंसी ने मिलकर बनाया है।

बता दें कि इस एक गोल्डन मिरर लगा हुआ है, जिसकी चौड़ाई करीब 21.32 फीट है। यह मिरर बेरिलियम से बने 18 षटकोण टुकड़े को जोड़कर बनाया गया है। हर टुकड़े पर 48.2 ग्राम सोने की परत चढ़ी हुई है जिससे यह एक परावर्तक की तरह काम करता है।

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