विभू एजुकेशनल सोशल एंड कल्चरल सोसाइटी के द्वारा आयोजित नटखट उत्सव

लखनऊ (मानवी मीडिया)संस्कृति मनुष्य को जीने की कला सिखाती है और कला उसकी मानवीय संवेदनाओं के प्रकटीकरण का एक सशक्त माध्यम होती है । जब कला एवं संस्कृति पारस्परिक रूप से एवं दूसरे के पूरक बनते हैं तब सृजन की नयी इबारत  खुद-ब-खुद लिख उठती है । यह उदगार आज विभू एजुकेशनल सोशल एंड कल्चरल सोसाइटी के द्वारा आयोजित नटखट उत्सव - 2022  के उद्घाटन  अवसर पर  मुख्य अतिथि  के  रूप  में  प्रोफ. प्रदीप कुमार मिश्रा , कुलपति, 

डॉ० ए० पी० जे० अब्दुल कलम तकनीकी विश्वविद्यालय , उत्तर प्रदेश ने व्यक्त किये।  सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारम्भ लावण्या त्रिवेदी द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया जिसके बाद वैष्णवी डांस इंस्टिट्यूट की प्रस्तुति हुई । विशेष प्रस्तुति – “ विश्वगुरु भारत ” राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित लखनऊ की सुप्रसिद्ध कलाकार एवं नृत्य गुरु सुश्री विभू बाजपेयी जी द्वारा दी गयी।

सी० एम्० एस० गोमती नगर सभागार में नटखट उत्सव के आयोजन पर लखनऊ , अमेठी, जालौन, बछरावां आदि जनपदों से प्रतिभागियों ने चित्रकला एवं नृत्य प्रतियोगिता में सहभागिता कर अनेक पुरस्कार ग्रहण किये । कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रतिभागी छात्र छात्रों का पुरस्कार वितरण एवं उनका उनका प्रोत्साहन करने वाले विद्यालयों के प्रधानाचार्यों / शिक्षक - शिक्षिकाओं का सम्मान समारोह रहा । यह प्रतियोगिताएं जुलाई माह से ऑनलाइन मोड तथा ऑफलाइन मोड से विभिन्न विद्यालयों में नटखट उत्सव की टीम द्वारा आयोजित कराइ जा रही हैं जिनमे कुल प्रदेश भर से अनेक विद्यालयों की सहभागिता रही और ऑनलाइन मोड से महाराष्ट्र, असम, मध्य प्रदेश इत्यादि प्रदेशों से बच्चों ने प्रतिभाग किया । इन विद्यालयों से हज़ारों बच्चों ने प्रतिभाग किया । प्रतियोगिता की थीम सनातन संस्कृति पर केंद्रित रही जिसमे  200 से अधिक बच्चो को ऑनलाइन व् ऑफलाइन चयनित किया गया और विजेता बच्चों को स्मृति चिन्ह व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया ।
कार्यक्रम की आयोजक व संस्था की सचिव  डॉ० अलका बाजपेयी ने बताया कि यह कार्यक्रम युवा चित्रकार मीनाक्षी त्रिपाठी  की स्मृति में  विगत 10 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है जिसमे इस वर्ष अपने - अपने क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धियां प्राप्त करने वाली विभूतियों को संस्था  द्वारा मीनाक्षी त्रिपाठी स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया  अनिल जैस्वाल जी को सामाजिक- सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संवर्धन हेतु ,  शैलेन्द्र सक्सेना को समाजसेवा हेतु ,  प्रकाश बाजपेयी जी को अभिनय के क्षेत्र में व चित्रकला में विशेष स्थान रखने वाले और इस प्रतियोगिता विगत 10  वर्षों से निर्णायक की भूमिका निभाने के लिए डॉ० अवधेश मिश्र को ।

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