अग्निवीर की दौड़ में 7% ही पास: 11 हजार में से 300 ही पास,इस वजह से 30% रिजेक्ट

लखनऊ (मानवी मीडिया)अलवर: सेना भर्ती के लिए इस बार लागू की गई अग्निवीर भर्ती परीक्षा को अब पहले से ज्यादा कठिन कर दिया गया है। अलवर समेत भरतपुर और धौलपुर जिले की सेना भर्ती परीक्षा हो रही है। लेकिन, पहली बार ऐसा हो रहा है कि इस भर्ती में दौड़ के साथ अधिकांश युवा हाईट और डॉक्युमेंट की वजह से रिजेक्ट हो रहे हैं। पिछले तीन दिनों में 11 हजार में से केवल 300 ही युवाओं का सिलेक्शन हो पाया हैै।

दरअसल, बहरोड़ के CISF मैदान पर हो रही सेना भर्ती में 3 दिन के आंकड़े खंगाले तो चौंकाने डाटा सामने आए। इस भर्ती परीक्षा में रजिस्ट्रेशन कराने वाले कैंडिडेट्स में से महज 50 प्रतिशत ही इन भर्ती में पहुंचे। इनमें से भी करीब 5 पर्सेंट ही दौड़ पूरी कर पाए। अब दौड़ के बाद तो शेष फिजिकल (चेस्ट, बीम व अन्य), मेडिकल व रिटन एग्जाम बाकी है। मोटे तौर पर देखें तो फिजिकल, मेडिकल व रिटन एग्जाम के बाद तो मुश्किल से 100 में से 1 युवा को नौकरी मिल सकेगी। यह पुलिस, टीचर व पटवारी भर्ती परीक्षा से कहीं ज्यादा कठिन है।

*तीन दिन की भर्ती को पूरा समझें

अब तक के रिकॉर्ड के अनुसार इन तीन जिलों के कुल 67 हजार युवाओं का रजिस्ट्रेशन है। इनमें से करीब 45 पर्सेंट अनुपस्थित रहेंगे तो करीब 35 हजार युवा भाग लेने आएंगे। हाईट और डॉक्युमेंट में से यदि 30 प्रतिशत भी बाहर हो जाते हैं तो 12 हजार दौड़ में भाग लेंगे।

*बहरोड़ में 10 सितंबर भर्ती का पहला दिन*

बहरोड़ में 10 सितंबर का पहला दिन था। इस दिन किशनगढ़बास, नीमराणा, नारायणपुर व भरतपुर के पहाड़ी के युवाओं की भर्ती थी। भर्ती में कुल 3122 युवाओं का रजिस्ट्रेशन था। इसमें 1368 ही आए। इन 1368 में से 479 डॉक्युमेंट में बाहर हो गए। 889 ने दौड़ में हिस्सा लिया और केवल 74 पास हुए हैं। अब आगे शेष फिजिकल, मेडिकल व रिटन एग्जाम होना है।

एक बैच में इतने युवक दौड़ में भाग लेते हैं। जिनमें से औसतन करीब 15 ही दौड़ पास कर पाते हैं। दौड़ में भी पहले आने वालों को वरीयता मिलती है।

एक बैच में इतने युवक दौड़ में भाग लेते हैं। जिनमें से औसतन करीब 15 ही दौड़ पास कर पाते हैं। दौड़ में भी पहले आने वालों को वरीयता मिलती है।

परसेंट में देखिए अग्निवीर भर्ती को (पहला दिन)

43 परसेंट उपस्थित, 57 परसेंट अनुपस्थित

35 परसेंट डॉक्यूमेंट व हाइट में बाहर

8.32 परसेंट दौड़ पास

सेना भर्ती का दूसरा दिन 11 सितंबर

भरतपुर जिले के कामां, नदबई, बसई, कुम्हेर व भुसावर के 4083 युवाओं भर्ती में भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन था। 52 परसेंट 2133 युवा भर्ती में भाग लेने आए। इन 2133 में से केवल 131 पास हुए हैं। यहां भी करीब 30 परसेंट डॉक्युमेंट में बाहर हो गए।

पर्सेंट में देखिए अग्निवीर भर्ती को (दूसरा दिन)

52 परसेंट उपस्थिति, 48 परसेंट ​​​​​​​अनुपस्थित

30 परसेंट डॉक्यूमेंट व हाइट में बाहर

6 परसेंट दौड़ में पास

सेना भर्ती का तीसरा दिन, 12 सितंबर

सेना भर्ती के तीसरे दिन भरतपुर जिले से वैर व रूपबास के 4 हजार 353 युवाओं को भर्ती में बुलाया गया। इनमें से 2411 युवा ही भर्ती देखने आए। उनमें से 1575 ही दौड़ में शामिल हो सके। 112 दौड़ पूरी कर पाए।

55 परसेंट उपस्थिति, 45 परसेंट अनुपस्थित

35 परसेंट डॉक्यूमेंट व हाइट में बाहर 7 परसेंट दौड़ में पास

सबसे पहले यहां डॉक्युमेंट चेक होते हैं। कुछ डॉक्यूमेंट में बाहर हो जाते हैं। बाकी हाईट में सबसे ज्यादा बाहर होते हैं।

हाईट 170 होना जरूरी

सेना में अच्छे से अच्छे जवानों को लेने के मकसद आर्मी का मकसद होता है। इस बार भर्ती में आए कैंडिडेट का कहना है कि उनकी हाईट 170 थी। लेकिन, उनको बाहर कर दिया गया। इस बार आर्मी में 171 से अधिक हाइट वालों को मौका मिला है। कैंडिडेट मानवेंद्र का कहना है कि 50 युवकों में से 15 से 20 युवाओं को हाईट में बाहर कर दिया जात हैं। जबकि कुछ तो पहले सीआईएसएफ व बीएसएफ के एग्जाम दे चुके हैं। लेकिन, सेना के अधिकारियों का कहना है कि तय पैरामीटर को पूरा करना जरूरी होता है।

अलवर में 67 हजार युवाओं की भर्ती जारी

अलवर के बहरोड़ में अलवर, भरपतुर व धौलपुर इन तीन जिलों की सेना भर्ती जारी है। सबसे अधिक अलवर से 34 हजार, भरतपुर से 24 हजार व धौलपुर से 8 हजार युवाओं का रजिस्ट्रेशन है। सोमवार को भर्ती का तीसरा दिन है। यह भर्ती 24 सितंबर तक चलेगी।

इन पदों पर भर्ती

यहां जनरल ड्यूटी जीडी, टेक्निकल, स्टोर कीपर व क्लर्क के पदों पर भर्ती हैं। इसमें 1.6 किलोमीटर की दौड़ होती है। जीडी के लिए दौड़ का समय 5.30 सैकंड का समय होता है। वहीं अन्य पद वालों के लिए 5.45 मिनट का समय होता है। बाकी अन्य शारीरिक गतिविधि भी होती हैं। अग्निवीर के तहत भर्ती होने वालों को पहले चार साल नौकरी मिलेगी। इसके बाद इनमें से 25 परसेंट को ही स्थाई किया जाएगा। इन चार सालों का वेतन भी तय है

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