राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के नैक मूल्यांकन प्रस्तुतिकरण की समीक्षा की


लखनऊः (मानवी मीडिया
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति  आनंदीबेन पटेल ने आज यहाँ राजभवन स्थित प्रज्ञाकक्ष में सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के नैक मूल्यांकन प्रस्तुतिकरण की समीक्षा की। विश्वविद्यालय इससे पूर्व वर्ष 2015 में अपने पहले नैक मूल्यांकन में ‘ए’ श्रेणी प्राप्त कर चुका है। राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय द्वारा की गई तैयारियों की सभी सातों क्राइटेरिया पर बिन्दुवार कमेटी के सदस्यों से जानकारी ली। उन्होंने प्रस्तुतिकरण में व्यापक सुधार किए जाने के निर्देश दिए।

विविध विषयों पर टीम सदस्यों में तालमेल की कमी को दृष्टिगत करते हुए राज्यपाल ने प्रस्तुतिकरण को टीम भावना के साथ कार्य करके बेहतर बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा नैक के प्रत्येक क्राइटेरिया में अंतर्निहित बिन्दुओं पर बिन्दुवार तैयारी की जाये। टीम के सदस्य कार्यों को कुलपति पर न छोड़कर स्वयं करें। उन्होंने गांधी जी की प्रसिद्ध पंक्ति ‘‘जो परिवर्तन आप विश्व में देखना चाहते हैं, स्वयं आत्मसात करें’’ का उदाहरण देते हुए कहा कि परस्पर दोषारोपण न करके कार्यों को स्वयं आगे बढ़ाएं।
राज्यपाल ने प्रस्तुतिकरण में विद्यार्थियों से संवाद, उनकी समस्याओं के व्यवस्थित निदान, कार्यों में प्रतिभागिता की कमी को भी लक्षित किया और विश्वविद्यालय के कार्यों, समारोहों, आयोजनों तथा शैक्षणिक प्रस्तुतिकरण जैसे विषयों में विद्यार्थियों की प्रतिभागिता बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने नैक के प्रस्तुतिकरण में भी तकनीक के व्यापक प्रयोग के अभाव को लक्षित किया और उसे नवीनतम तकनीक के युक्त बनाने को कहा।
राज्यपाल ने नैक मूल्यांकन की विशेष कैटेगरी में आने वाला संस्कृत विश्वविद्यालय होने के कारण निर्देश दिया कि इसी कैटेगरी में उच्च श्रेणी प्राप्त कर चुके देश के अन्य विश्वविद्यालय का अनुसरण करके अपनी व्यवस्थाओं को भी बेहतर करें। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर और छात्रावासों में साफ-सफाई व्यवस्था समुचित कराने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने कहा विश्वविद्यालय की सज्जा के लिए इन्टीरियर डेकोरेशन के छात्रों की सहभागिता कराएं। इसी क्रम में उन्होंने जनपद के अनाथाश्रमों में रहने वाले बच्चों की जन्म कुण्डली ज्योतिष छात्रों से बनवाने का सुझाव भी दिया।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय के पुराने छात्रों का नेटवर्क सुदृढ़ करने का निर्देश देते हुए कहा कि यहाँ के प्रख्यात छात्रों के चित्र छात्रावासों में एक वाल बनाकर प्रदर्शित करने की व्यवस्था बनाई जाए। उन्होंने कहा प्रख्यात एल्युमुनाई को विश्वविद्यालय की सुव्यवस्था में योगदान हेतु भी जोड़ने का कार्य किया जाए। विश्वविद्यालय में संसाधनों की उपलब्धता पर चर्चा में राज्यपाल ने स्थानीय विधायकों को व्यवस्थागत सुधार में सहयोग हेतु जोड़ने का सुझाव दिया।
बैठक में राज्यपाल ने विद्यार्थियों की सुविधाओं को ऑनलाइन करने पर जोर देते हुए सख्त निर्देश दिया कि अंकतालिकाएं और डिग्री ऑनलाइन उपलब्ध कराने का कार्य प्राथमिकता से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने पूरी टीम को तीन माह के अन्दर बेहतर तैयारी के साथ पुनः प्रस्तुतिकरण करने का निर्देश देते हुए कहा कि प्रतिबद्धता के साथ ‘ए’ ग्रेड प्राप्त करने की तैयारी की जाए।
बैठक में उपस्थित प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री  योगेन्द्र उपाध्याय ने स्वयं वाराणसी आकर विश्वविद्यालय की नैक टीम को उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे कोर्सेस पर भी ध्यान दे जो आर्थिक उपार्जन करा सकते हैं और समाजिक कार्यों से भी जुड़े हों। उन्होंने अनाथ बच्चों की जन्मकुण्डली बनाने के राज्यपाल जी के सुझाव को मानवीय सम्वेदना से जुड़ा बताया।
बैठक में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती रजनी तिवारी, अपर मुख्य सचिव राज्यपाल महेश गुप्ता, विशेष कार्याधिकारी शिक्षा, कुलपति सम्पूर्णानंद विश्वविद्यालय तथा नैक मूल्यांकन के लिए विश्वविद्यालय में गठित कमेटी के सभी सदस्य एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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