गर्मियों में वकीलों के ड्रेस कोड को बदलने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इंकार


नई दिल्ली (
मानवी मीडिया सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गर्मी के दिनों में वकीलों के लिए काला कोट और गाउन पहनना अनिवार्य न रखने की मांग पर सुनवाई से इंकार कर दिया। कोर्ट की ओर से याचिकाकर्ता को सलाह दी गई कि वह वकीलों के ड्रेस कोड समेत दूसरे नियमों को तय करने वाली संस्था 'बार काउंसिल आफ इंडिया' में अपनी बात रखे।

तटीय इलाकों के मौसम के अनुसार नहीं है ये ड्रेस 

याचिकाकर्ता शैलेंद्र त्रिपाठी ने अपनी याचिका वापिस लेने का फैसला कर लिया। मामले पर जस्टिस इंदिरा बनर्जी और वी रामासुब्रह्मण्यम की बेंच ने यह फैसला सुनाया। बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि यदि BCI मामले में सुनवाई नहीं करता है तो वे दोबारा सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं। याचिका में कहा गया है कि वकीलों के लिए मौजूदा ड्रेस कोड लंबे समय पहले निर्धारित की गई जो मौसम के अनुसार नहीं हैं। विशेषकर उत्तरी और तटीय इलाकों के मौसम के अनुकूल यह ड्रेस कोड नहीं है।

खर्च बढ़ाने के साथ ही आरामदेह भी नहीं हैं ड्रेस

याचिका में कहा गया है कि इस तरह का ड्रेस कोड आरामदेह नहीं है और इससे आर्थिक बोझ भी बढ़ता है क्योंकि कपड़ों को ड्राई क्लीन कराना होता है और धुलवाना पड़ता है। बेंच ने याचिकाकर्ता के साथ सहानुभूति दिखाई। यहां यह बता दें कि जस्टिस बनर्जी मद्रास व कलकत्ता हाई कोर्ट के जज रह चुके हैं। बेंच ने कहा, 'आपके साथ मेरी सहानुभूति है। मद्रास हाई कोर्ट समुद्र के करीब हैं।'

कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकेगी इसलिए याचिकाकर्ता BCI के समक्ष जाए। याचिकाकर्ता के लिए सीनियर वकील विकास सिंह पेश हुए। याचिका एडवोकेट अभिज्ञा कुशवाह  के जरिए की गई।

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