किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगा वाइनरी उद्योग


लखनऊ: (
मानवी मीडिया) मुख्य अतिथि अपर मुख्य सचिव आबकारी,  संजय आर. भूसरेड्डी तथा  सेंथिल पांडियन सी. आबकारी आयुक्त, उत्तर प्रदेश द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करते हुए वाइन संगोष्ठी का शुभारम्भ होटल हयात में किया गया। सर्वप्रथम संगोष्ठी में आबकारी आयुक्त  सेंथिल पांडियन सी. ने वाइनरीज उद्योग की स्था्पना के लिये कान्फ्रेंस में आये हुए सभी निवेशकों तथा फल उत्पादक किसानों को वाइनरीज रूल्स के सम्बन्ध में अवगत कराया गया। उनके द्वारा बताया गया कि उत्तर प्रदेश में वाइनरी रूल्स सर्वप्रथम 1961 में पब्लिश किया गया था फिर उसके बाद 1974 में इसमें पहली बार संशोधन किया गया। पुनः इसमें 2022 में वाइनरीज उद्योग को ईज आफ डूइंग बिजनेस के अन्तर्गत नियमों और प्रतिबन्धों को और अधिक आसान बनाते हुए संशोधित किया गया।

आबकारी आयुक्त द्वारा बताया गया कि देश में उत्पादित फलों का 26 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में उत्पादन किया जाता है, जो रैकिंग के हिसाब से देश में तीसरे स्थान पर है। उनके द्वारा प्रदेश में उत्पादित हो रहे फलों को उत्पादन के हिसाब से जोन के आधार पर फलों के उत्पादन के सम्बन्ध में अवगत कराया गया। सब ट्रापिकल जोन, प्लेेन रीजन तथा बुन्देलखण्ड जोन में उगाये जाने वाले फलों के सम्बन्ध आने वाले जनपदों सहारनपुर, बिजनौर, बरेली, पीलीभीत आदि जनपदों में लींची, ग्राफ्टेड मैंगो, पाइनेपल, केला आदि फल पैदा किये जाते हैं। इसी प्रकार सब ट्रापिकल के अन्तर्गत बेल, आंवला, अमरूद, पपीता जैसे फलों का उत्तर प्रदेश में बहुतायात में उत्पादन होता है। बुन्देलखण्ड क्षेत्र में मुख्य रूप सेे बेल, लेमन, अमरूद तथा पपीता के उत्पादन किया जाता है। उनके द्वारा बताया गया कि उत्तर प्रदेश देश में फलों के उत्पादन में सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। उनके द्वारा वाइनरी के संबंध में बताते हुए निवेशकों तथा फल उत्पादकों से वाइनरी रूल के और अधिक आसान बनाने के लिए सुझाव भी आमंत्रित किए गए तथा तदनुसार आवश्यक संशोधन के लिए आóासन भी दिया गया।

 मेसर्स फ्रूट वाइन्स के श्री राजेश रसाल ने अपने प्रसन्टे्शन में बताया कि फल और बेरी वाइन विभिन्न प्रकार के फलों (अंगूर के अलावा) और विभिन्न प्रकार के स्वादों से बने किण्वित पेय हैं। इसमें सेब, स्ट्रॉबेरी, प्लम, आड़ू, चीकू, उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय फलों जैसे संतरे, आम, केला, अनार और अनानास जैसे फलों से उत्पादित वाइन शामिल हो सकते हैं, निष्कर्षण पर अच्छी मात्रा में रस मिलता है। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि बेरी और फलों की वाइन के उत्पादन के लिए, जामुन और फलों जैसे सेब, नाशपाती, अनार, बेर, आड़ू, क्रैनबेरी, रास्पबेरी आदि से दबाया हुआ रस बनाया जाता है। सामान्य तौर पर, बेरी और फलों की शराब बनाने की प्रक्रिया समान होती है अंगूर से शराब यानी बेरी या फ्रूट मैश को पहले दबाया जाता है, और फिर दबाया हुआ रस किण्वित किया जाता है। चूंकि इनमें से अधिकांश जामुन और फल या तो चीनी में कम या कुल अम्लता में उच्च होते हैं या दोनों, चीनी और पानी के साथ सुधार का अभ्यास किण्वन से पहले, दौरान और बाद में किया जाता है। वाइन को तेजी से किण्वित किया जाता है और उनके विशिष्ट स्वाद और सुगंध को संरक्षित करने के लिए शायद ही कभी लंबे समय तक वृद्ध होते हैं। पुरानी वाइन को कभी-कभी स्वाद वापस लाने के लिए ताजी बनी वाइन के साथ मिश्रित किया जाता है।

उनके द्वारा निवेशकों को वाइनरीज रूल्सव के अन्तरर्गत नियमों में दिये गये सुविधाओं से भी अवगत कराया गया। इसके अतिरिक्ती उन्हों ने कान्फ्रे न्सय में आये हुए प्रतिनिधियों से इस सम्बन्ध, में सुझाव भी मांगे तथा तद्नुसार वाइनरीज रूल्स  में आवश्यकतानुसार संशोधन किये जाने का भी आश्वासन दिया गया।

 अनिल साहनी, डायरेक्टर ने किसानों के फल आधारित वाइन इण्डस्ट्रीज के सम्बन्ध  में किसानों के योगदान पर अपने विचार प्रस्तु्त किये। उनके द्वारा यह बताया गया कि किसानों के द्वारा उत्पादन किये जाने वाले फलों का 30 प्रतिशत फल सदुपयोग हो जाने से बच जाता है। इन फलों को उपयोग में लाने हेतु वाइनरी उद्योग को बढ़ावा दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि किसानों द्वारा फल आधारित अन्य इण्डस्ट्रीज में बनाये जाने वाले उत्पादों में एक्सपायरी डेट होता है उसमें किसानों को समुचित मूल्य नहीं मिल पाता। किसानों को उनके लागत का अच्छा मूल्य  दिलाने तथा उनकी आय को बढ़ाने में वाइनरी उद्योग काफी मददगार साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रायः यह देखा जा रहा है कि किसानों को फलों का अच्छा मूल्य न मिल पाने के कारण फलों के बाग भी कटते जा रहे हैं, जिनको बचाने और अधिक बागों के विकास के लिये वाइनरीज उद्योग उपयोगी सिद्ध होगा। वाइनरीज उद्योग पूरी तरह से इको फ्रेण्डिली होता है जिसमें किसी प्रकार का पर्यावरण प्रदूषण नहीं होता और न ही किसी प्रकार का हानिकारक अवशिष्ट पदार्थ ही निकलता है। अल्प मात्रा में निकले अवशिष्ट को उर्वरक के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है। इसके साथ ही  छोटे-छोटे वाइनरीज उद्योग को बढ़ावा देने के सम्बन्ध में सुझाव देते हुए बुटिक वाइनरी के रूप में छोटे-छोटे उद्योग स्थापित किये जाने पर बल देते हुए बताया कि बुटिक वाइनरी से ग्रामीण टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में आबकारी विभाग के अधिकारियों के प्रति वाइनरीज उद्योग में पहल करने के लिये और इस संगोष्ठी  को आयोजित किये जाने के लिये आभार व्यक्त  किया।

विशेष सचिव, दूरिज्म डा. अश्विनी पांडेय द्वारा अपने सम्बोधन में मा. प्रधानमंत्री द्वारा चलाये जा रहे ट्रेड, टेक्नोलाजी एण्ड टूरिज्म के ड्रीम प्रोजेक्ट से अवगत कराया गया। उनके द्वारा यह बताया गया कि वाइनरी उद्योग के आने से जहॉं एक ओर ग्रामीण टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा वहीं दूसरी ओर फल उत्पादित किसान अधिक संख्या में लाभान्वित होंगे। उनके द्वारा वाइनरी से जुड़े हुए अनेक योजनाओं के बारे में भी डेलिगेट्स को अवगत कराया गया।

इसी प्रकार खाद्य प्रसंस्करण विभाग से  आर.के.सिंह ने कहा कि वाइनरी कम्पनियों द्वारा आबकारी विभाग के पहल पर किसानों द्वारा उत्पादित फलों के उपभोग से अवशेष फलों को प्रसंस्कृत करते हुए वाइन उद्योग को बढ़ावा देने को एक सराहनीय कदम बताया। उनके द्वारा बताया गया कि प्रदेश में कुल छोटे बड़े फल आधारित उद्योगों के 24314 इकाईयॉं स्थापित की गयी है, जिससे प्रदेश को 335 करोड़ रूपये का निवेश प्राप्त हो रहा है। उनके द्वारा बताया गया कि वाइनरी उद्योग में किसानों को फलों के शत-प्रतिशत उपभोग से उनकी आय में काफी वृद्धि करने में मदद मिलेगी। उनके द्वारा छोटे उद्योगों के रूप में पल्प इण्स्ट्रीज लगाये जाने पर जोर देते हुए यह भी बताया गया कि इण्डस्ट्रीज बहुत कम लागत में और कम जगह में लगाया जा सकेगा। छोटे किसान भी इस उद्योग को लगाने में आगे आयेंगे। उत्तर प्रदेश में गोला आम की देशी वेरायटी में अत्यधिक मात्रा में पल्प पाये जाने से अवगत कराया गया और यह भी बताया गया कि इस प्रकार के छोटे छोटे पल्प उद्योगों से वाइनरी उद्योग के विकास में बढ़ावा मिलेगा।

राहुल सिंह, द्वारा वाइनरी उद्योग के सम्बन्ध  में अपने विचार करते हुए एक जनपद एक उत्पाद योजना से जोड़ते हुए यह बताया गया कि बहुत से जिलों में विशेष प्रकार के फल बहुतायात में पैदा किये जाते हैं। इन जनपदों में उपभोग एवं अन्य उद्योगों से बचे हुए फलों को उपयोग में लाकर वाइनरी उद्योग स्थापना एवं तदनुसार किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगी।

मुख्य अतिथि के रूप में अपर मुख्य सचिव, आबकारी  संजय आर. भूसरेड्डी द्वारा अपने संबोधन में किसानों और उद्योगों का एक दूसरे के साथ गहरा संबंध  बताते हुए किसानों को सबसे बड़ा निवेशक बताया। उनके द्वारा बताया गया कि किसानों को दैवी आपदा का पता न होने के बाद भी किसान काफी उत्साह के साथ खेती-किसानी का कार्य करता है। उनके द्वारा बताया गया कि वर्तमान में सरकार द्वारा किसानों को उनकी आय को दुगुना करने के उद्देश्य से अनेक प्रकार की योजनायें एवं कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। छोटे-छोटे उद्योगों को स्थापित करने में सरकार की योजनायें सम्बन्धित विभागों के माध्यम से चलाई जा रही हैं। उनके द्वारा वाइनरी उद्योग को स्थापित किये जाने में इन्वसटर्स एवं किसानों को एक दूसरे का पूरक बताते हुए दोनों की आपसी आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य करने पर बल दिया गया। किसानों को अधिक से अधिक फल उत्पादन के लिये हार्टिकल्चर डिपार्टमेन्ट से आवश्यक निर्देश तथा योजनाओं का लाभ लेते हुए बागों के प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया। वाइनरी उद्योग की स्थापना में कम जगह एवं कम लागत बताते हुए अच्छे आय के साधन के रूप में बताया गया। बाग प्रबंधन से वाइनरी उद्योग के लिये किसानों द्वारा छोटे छोटे बुटिक वाइनरी स्थापित किया जा सकता हैं और छोटे बड़े किसान भी गांव को ग्रामीण दूरिज्म के रूप में विकसित कर सकते हैं, जिससे उनके आय पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। उनके द्वारा बताया गया कि विभिन्न क्षेत्रों में जहॉं विशेष प्रकार के फल बहुतायत में पैदा किये जाते हैं वहॉं भी इस प्रकार के कान्फ्रेन्स आयोजित करते हुए निवेशक को आकर्षित करने तथा किसानो के आय में अभिवर्धन और वाइनरी उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कान्फ्रेन्स आयोजित किये जाते रहेंगे तथा प्रदेश को मजबूत अर्थव्यवस्था देने का काम किसानों व निवेशकों द्वारा किया जा सकेगा।

 आयोजित कांफ्रेंस में विभिन्न प्रदेशों से आए वाइन उत्पादक इकाईयों आल इण्डिया वाइन प्रोड्यूशर एसोसिएशन के अध्यक्ष सहित मेसर्स जाइटेक्सं के श्री श्रीकांत मागर,  मेसर्स अल्फाटेक के श्री जगदीश पाटिल, मेसर्स रिदिम वाइनरीज के श्री अकल्पित प्रभाकर, मेसर्स रिसर्व के श्री नीरज अग्रवाल, मेसर्स इन्विशन इक्यूमपमेन्ट के श्री संजय झॉं, मेसर्स फ्रूट वाइन्स के श्री राजेश रसाल, मेसर्स इण्डियन वाइन इण्डस्ट्रीज के श्री अश्विन राड्रिक्सक आदि ने कांफ्रेन्स में वाइनरी उद्योग को बढ़ावा देने के संबंध में  विचार व्यक्त किये।

 कान्फ्रेन्स में वाइनरी उद्योग के सम्बन्ध में प्रतिभाग करने वाले प्लान्ट एवं मशीनरी उपलब्धं कराने वाले डेलीगेड्स द्वारा भी वाइनरी उद्योग की स्थापना के लिये मशीनों तथा टेक्नॉलाजी, उद्योग स्थापना में लगने वाली लागत और पूंजी निवेश के सम्बन्ध में समस्त उपस्थित डेलीग्रेडस को अवगत कराया गया। कान्फ्रेन्स में उपस्थित डेलीग्रेटस द्वारा विभिन्न प्रकार के क्वैयरी तथा अपेक्षाओं के सम्बन्ध में चर्चा हुई।

 आयोजित कांफ्रेंस में विभाग की ओर से मुख्य अतिथि के रूप में अपर मुख्य सचिव, आबकारी  संजय आर. भूसरेड्डी तथा आयुक्त, आबकारी  सेंथिल पांडियन सी. के अतिरिक्त विशेष सचिव, आबकारी  निधि गुप्ता वत्स, अपर आबकारी आयुक्त  हरिश्चंद्र तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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