विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर से बेहतर शैक्षणिक माहौल मुहैया कराया जाए __ आनंदीबेन पटेल

लखनऊ (मानवी मीडिया)उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने आज वाराणसी में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय शिक्षा समागम के समापन सत्र पर विश्वविद्यालयों को बेहतर शैक्षणिक संस्थान बनाने पर जोर दिया। उन्होंने भारत के युवाओं की ताकत को पहचानने पर जोर देते हुए उपस्थित कुलपतियों एवं शिक्षाविदों से कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर से बेहतर शैक्षणिक माहौल मुहैया कराया जाए। बच्चों पर भरोसा रखे जाने पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने पठन-पाठन के लिए रात्रि में लाइब्रेरी खोले जाने पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया।  बच्चों की आधुनिक बुनियादी आवश्यकताओं से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध होने की चर्चा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में बच्चे जो पढ़ना चाहे वह वहां मिले ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि समस्या का समाधान करना ही शिक्षा है। आपत्ति एवं समस्या को अवसर में बदलने की हमारी सोच होनी चाहिए।

उन्होंने 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने पर देते हुए इसमें सहयोग के लिए कुलपतियों का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि  उत्तर प्रदेश के यूनिवर्सिटी, कॉलेज, एनजीओ व राजभवन ने  मिलकर 2 साल में दो लाख से अधिक बच्चे को टीबी मुक्त किया है। आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लिए जाने की लोगों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि जिन आंगनवाड़ी केंद्रों को गोद लिया जाए, वहाँ पर 50 हजार रुपये मूल्य की किट उपलब्ध कराई गई । प्रदेश के 28 सौ आंगनबाड़ी केंद्रों में किट उपलब्ध कराई जा चुकी है।

राज्यपाल  ने विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में लीक से हटकर नैतिक शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सामाजिक कुरीतियों को दूर करने आदि के संबंध में छात्र छात्राओं को जागृत एवं जागरूक किया जाना चाहिए। स्मार्ट विलेज आदि योजना को मूर्त रूप दिए जाने पर जोर देते हुए उन्होंने  यूनिवर्सिटियों में ग्राम प्रधानों का सम्मेलन आयोजित किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार की जनहितकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों को दिलवाये जाने में भी विश्वविद्यालय अपने संसाधनों से सहयोग करें। इसके साथ ही राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने  पदमश्री एवॉर्ड प्राप्त महानुभावो को बच्चों का प्रेरणा स्रोत बनाने के लिए बच्चों के बीच बुलाए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा "सबका साथ-सबका विश्वास और सबका विकास" हमारी थीम होना चाहिए। देश का हित विश्वविद्यालयों में समाहित है। यहाँ पारिवारिक माहौल  होना चाहिए।

 रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय शिक्षा समागम के आखिरी दिन की शुरुआत शोकसभा से हुई। समागम शुरू होने से पहले सभागार में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और देशभर से पहुंचे शिक्षाविदो ने दो मिनट का मौन रखकर मृतात्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। राज्यपाल जी ने कार्यक्रम से पूर्व शिंजो आबे जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी।  वहीं, शिंजो आबे के सम्मान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किए राजकीय शोक के कारण रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के बाहर फहराए गए हिंदुस्तान और जापान के राष्ट्रीय ध्वजों को आधा झुका दिया गया।

               अपने सम्बोधन में राज्यपाल  ने जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के असामायिक निधन  पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक स्तब्ध कर देने वाली घटना है। भारत -जापान के रिश्तों को शिंजो आबे जी ने नई दिशा दी थी। उनके नेतृत्व में जापान ने भारत को बहुत सी की तकनीकी और आर्थिक मदद दी। दोनों देशों के बीच भविष्य की जिन महत्वपूर्ण योजनाओं पर समझौता हुआ उनमें से एक 'क्योटो' की तर्ज पर काशी का विकास भी है। काशी वासियों और सम्पूर्ण भारत के लिए शिंजो आबे जी का योगदान चिरस्मरणीय रहेगा।

            ज्ञात हो कि वाराणसी में 7 से 9 जुलाई 2022 तक तीन दिवसीय 'अखिल भारतीय शिक्षा समागम - राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 - कार्यान्वयन विमर्श' का आयोजन सम्पन्न हुआ है। जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा किया गया। इस आयोजन में प्रथम दिन एक सत्र दूसरे दिन सात सत्र तथा आज तीसरे दिन चार सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की गयी। आज  स्किल डेवलपमेंट एंड एम्प्लॉयबिलिटी ,इंटरनेशनलाइज़ेशन ऑफ़ एजुकेशन , सक्सेस स्टोरीज़ एन्ड बेस्ट प्रैक्टिसेस ऑफ़ एन0ई0पी0 - 2020 इम्प्लीमेंटेशन तथा वैलिडिक्ट्री सेशन एंड एडाप्टेशन ऑफ़ डिक्लेयरेशन ऑन हायर एजुकेशन पर विषय विशेषज्ञों ने चर्चा की। राजयपाल इस दौरान इन तीनों सत्रों में उपस्थित रहीं।   

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