मंत्री राकेश सचान ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, हथकरघा, रेशम तथा खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा 100 दिवसों की उपलब्धियों पर की प्रेस वार्ता

लखनऊ: (मानवी मीडिया)उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, हथकरघा, रेशम तथा खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री  राकेश सचान ने आज लोक भवन में 100 दिन की विभागीय उपलब्धियांे के संबंध में प्रेसवार्ता करते हुए कहा कि मुख्य मंत्री जी द्वारा 30 जून को मेगा लोन मेला का शुभारम्भ किया गया, जिसके माध्यम से प्रदेश के एक लाख 90 हजार लाभार्थियों को विभिन्न रोजगारपरक योजनाओं के अन्तर्गत 16 हजार करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया। इसके साथ ही एक जनपद एक उत्पाद सामान्य सुविधा केन्द्र (ब्थ्ब्) योजना के अन्तर्गत आजमगढ़, सिद्धार्थनगर, सीतापुर, अम्बेडकरनगर एवं आगरा में सामान्य सुविधा केन्द्र का लोकार्पण भी मुख्यमंत्री जी द्वारा किया गया।

      सचान ने कहा कि नई एम0एस0एम0ई0 नीति-2022 शीघ्र ही लागू की जायेगी। इस नीति के अन्तर्गत उद्यमियों को प्रदान किये जाने वाले लाभों को ससमय एवं सुगमता से उपलब्ध कराने के दृष्टिगत समस्त लाभों को जी0एस0टी0 से डी-लिंक किया जायेगा। प्रदेश के एम0एस0एम0ई0 अधिनियम के अन्तर्गत 100 दिवसों में 73 उद्यम स्थापित हो चुके हैं, इस प्रकार अब तक कुल 7202 उद्यम इस अधिनियम के अन्तर्गत स्थापित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि योजनाओं के पारदर्शी एवं सुगम क्रियान्वयन हेतु विभाग के समस्त कार्यालयों को ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से संचालित किये जाने हेतु कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है।
       सचान ने कहा कि वित्तीय वर्ष में अब तक प्रदेश की कुल 1,20,217 इकाईयाँ भारत सरकार के उद्योग रजिस्टेªशन सार्टिफिकेट पोर्टल पर पंजीकृत हो चुकी हैं। भारत सरकार की क्लस्टर विकास योजना के अन्तर्गत जनपद-आगरा, कानपुर नगर व गोरखपुर में फ्लैटेड फैक्ट्री काम्पलेक्स स्थापित करने सम्बन्धी परियोजनाएं स्वीकृत की गयी है। जिनमें आगरा एवं कानपुर नगर की परियोजनाएं शिलान्यास हेतु तैयार हैं। औद्योगिक आस्थान-फर्रूखाबाद एवं तालकटोरा में अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु वित्तीय स्वीकृतियाँ प्रदान की गयी है, जिनमें शीघ्र ही कार्य प्रारम्भ हो जायेगा। इसी प्रकार 100 दिनों में औद्योगिक आस्थान-कौंच (जालौन), सलारपुर (बदांयू) में अवस्थापना सुविधाओं के उच्चीकरण का प्रस्ताव भारत सरकार द्वारा स्वीकृत किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना एवं ओ0डी0ओ0पी0 प्रशिक्षण एवं टूलकिट योजना के अन्तर्गत वर्तमान वित्तीय वर्ष में 40,000 परम्परागत हस्तशिल्पियों एवं कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
       सचान ने खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के 100 दिनों की उपलब्ध्यिों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनपद प्रयागराज में ऊनी धागा प्रशोधन केन्द्र की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। भवन का लगभग 35 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है । प्रयागराज में ही गोबर गैस प्लाण्ट की स्थापना कार्य प्रारम्भ है। प्लाण्ट के स्थापित होने से उत्पादित कम्प्रेस्ड गैस से लगभग 400 परिवारों को ईंधन तथा उत्पादित जैविक खाद क्षेत्र के किसानों को उपलब्ध होगा। साथ ही गो पालकों को गोबर से अतिरिक्त आय होगी तथा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 200 लोगों को नियमित रोजगार भी प्राप्त हो सकेगा।
       सचान ने कहा कि टूलकिट्स वितरण एवं प्रशिक्षण योजनान्तर्गत 200 सोलर चर्खा, 260 दोना पत्तल मशीन एवं 240 पॉपकार्न मशीन का निःशुल्क वितरण कराते हुए लगभग 1900 व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध कराया जायेगा। उपकरणों की खरीद का कार्य प्रगति पर है। प्रधानमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना, मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना तथा मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना योजनाओं के अंतर्गत 8587 आवेदन-पत्र बैंकों को प्रेषित किये गये हैं। बैंकों द्वारा 2313 आवेदन-पत्र स्वीकृत कर 1120 इकाइयों को ऋण वितरण किया गया है, जिससे 12626 व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध हुआ है। उन्होंने कहा खादी उत्पादन केन्द्रों द्वारा 17453 मीटर खादी वस्त्र का उत्पादन किया जा चुका है।
       सचान ने रेशम विभाग द्वारा 100 दिन के अंदर किये कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि केन्द्रीय रेशम बोर्ड द्वारा सहायतित सिल्क समग्र योजना के अन्तर्गत 1000 कृषकों को वृक्षारोपण, कीटपालन गृह निर्माण सहायता, प्रशिक्षण एवं उपकरण आदि हेतु अनुदान सहायता उपलब्ध कराई गई। शहतूती सेक्टर के 180 लाभार्थियों को केन्द्रीय रेशम बोर्ड के प्रशिक्षण संस्थान सी0एस0एस0आर0 एण्ड टी0आई0, बरहमपुर पश्चिम बंगाल एवं मैसूर कर्नाटक से प्रशिक्षण तथा एस्पोजर विजिट पूर्ण कराया गया है। 70 लाभार्थियों को सरदार बल्लभ भाई पटेल प्रशिक्षण संस्थान मिर्जापुर से प्रशिक्षण एवं एस्पाजेर विजिट कराया गया है। एक जनपद एक उत्पादन (ओ0डी0ओ0पी0) योजना के अन्तर्गत वाराणसी स्थित सिल्क एक्सचेंज का सुदृढीकरण कार्य  प्रारम्भ हो चुका है।  यहां बुनकरांे को उत्पाद के विक्रय हेतु प्लेटफार्म उपलब्ध हो जाएगा, जिससे उनको उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त होगा एवं दूसरी तरफ उपभोक्ताओ को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद प्राप्त हो सकेंगे तथा परिसर में टेस्टिंग सुविधा भी उपलब्ध होगी।
       सचान ने कहा कि कर्नाटक राज्य सरकार के अनुरोध पर सिल्क एक्सचेंज वाराणसी परिसर में निःशुल्क विक्रय केन्द्र खाले ने हेतु स्थान उपलब्ध करा दिया गया है। जिससे बुनकरांे को सीधे उनकी मांग के अनुसार सिल्क धागे की उपलब्धता होगी, बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी एवं उनके उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत 13 रीलिंग इकाईयों की स्थापना के टेण्डर की कार्यवाही पूर्ण कर ली गयी है। रीलिंग इकाईयों के संचालित हो जाने से किसानों को उनके कोये का उचित मूल्य प्राप्त होगा एवं दूसरी तरफ बुनकरों को उनकी मांग के अनुसार धागे की आपूिर्त हो सकेगी।
       सचान ने कहा कि उ0प्र0 हैण्डलूम, पावरलूम, सिल्क, टेक्सटाइल एवं गारमेन्टिंग पॉलिसी-2017 के अंतर्गत 16 वस्त्र इकाईयों के पक्ष में ‘‘लेटर आफ कम्फर्ट’’ निर्गत किये गये। इन इकाईयों द्वारा कुल धनराशि 196.51 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है तथा 3243 व्यक्तियों को रोजगार मिला है। राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 19 हथकरघा क्लस्टरों के प्रस्ताव भारत सरकार को स्वीकृति हेतु प्रेषित किये गये हैं। इन क्लस्टरों के विकास हेतु 25.55 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रस्तावित की गयी है, जिसके प्राप्त होने पर 2591 हथकरघा बुनकर लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि वस्त मंत्रालय, भारत सरकार की पी0एम0मित्र योजना के अंतर्गत जनपद हरदोई में मेगा इन्टीग्रेटेड टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क की स्थापना हेतु भूमि के अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू हो गई है। पार्क में वस्त्र इकाईयों की स्थापना होने पर लगभग 5 लाख व्यक्तियों को रोजगार मिलने की सम्भावना है।
      श्री सचान ने कहा कि नोएडा में अपैरल पार्क की स्थापना हेतु भूमि की व्यवस्था हो गयी हैं। इस अपैरल पार्क में 3000 करोड़ रुपये के निवेश से लगभग 115 निर्यातोन्मुखी वस्त्र इकाईयां स्थापित की जायेंगी, जिससे लगभग 2 लाख व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा से पावरलूम संचालन को प्रोत्साहित करने हेतु ‘‘मुख्यमंत्री बुनकर सौर ऊर्जा योजना’’ के नाम से एक नयी योजना शुरू की जायेगी। इसकी समस्त औपचारिकताएं पूर्ण कर ली गई। योजना के संचालन से पारम्परिक विद्युत ऊर्जा की खपत कम होगी, जिससे प्रदूषण में कमी के साथ वस्त्र उत्पादन की लागत में भी कमी आयेगी और बुनकरों को आर्थिक लाभ होगा। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल पॉलिसी-2017 में नवाचार को सम्मिलित करके नई उ0प्र0 टेक्सटाइल पॉलिसी-2022 का ड्राफ्ट तैयार करके शासन के परामर्शी विभागों को अभिमत हेतु प्रेषित किया गया है। नई पॉलिसी के क्रियान्वयन से प्रदेश में वस्त्रोद्योग के क्षेत्र में निवेश में और अधिक बढ़ोत्तरी होगी तथा अधिकारिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
      पत्रकार वार्ता के दौरान अपर मुख्य सचिव, एमएसएमई डा0 नवनीत सहगल तथा आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग श्री मनीष चौहान उपस्थित थे।
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