यूपी में तेजी से बढ़ साइबर क्राइम का ग्राफ


लखनऊ (मानवी मीडिया 
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों ‌को संकेतक मानें तो समाज में एक खास तरह का बदलाव देखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2018, 2019 व 2020 में हिंसक अपराधों में लगातार कमी आई है तो साइबर अपराध में भारी उछाल आया है। यही वजह है कि साइबर अपराध को अब बड़ी चुनौती के तौर पर देखा जाने लगा है। 

धोखाधड़ी के मामले ज्यादा
यूपी में वर्ष 2018 में हिंसक अपराध की 65155 घटनाएं हुईं तो वर्ष 2019 में 55519 और वर्ष 2020 में 51983 घटनाएं हुईं। इन तीनों वर्षों में साइबर अपराध की क्रमश: 6280, 11416 व 11097 घटनाएं हुईं। जाहिर है कि वर्ष 2018 की तुलना में वर्ष 2019 में साइबर अपराधों में भारी उछाल आया, जबकि वर्ष 2019 की तुलना में वर्ष 2020 में मामूली कमी आई है। साइबर अपराध में सबसे ज्यादा मामले धोखाधड़ी के सामने आ रहे हैं तो दूसरे नंबर पर जबरदस्ती वसूली के मामले हैं। वर्ष 2020 के आंकड़ों पर गौर करें तो सबसे ज्यादा 4674 मामले धोखाधड़ी के ही हैं, जबकि 1055 मामले जबरन वसूली और 560 मामले लैंगिक उत्पीड़न के हैं।

ट्विटर पर भी दर्ज करा सकते हैं शिकायत
 साइबर अपराध में बढ़ोत्तरी को देखते हुए पुलिस के पास संसाधन बढ़ाने के प्रयास भी शुरू हो गए हैं। साइबर हेल्पलाइन नंबर-1930 पर मिलने वाली शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई के प्रबंध किए गए हैं। इसके लिए प्रदेश पुलिस की आपात सेवा यूपी-112 के साथ इसका एकीकरण भी किया गया है, इससे 112 पर कॉल कर के भी साइबर क्राइम की शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं। साइबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in), ट्विटर (@cyberpolice_up) और व्हाट्सएप (नंबर 7839877207) पर भी शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं। साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दर्ज कराई गई कुल 20290 शिकायतों के सापेक्ष लगभग 3.34 करोड़ रुपये अब तक होल्ड कराए गए हैं। 

पांच जिलों में साइबर थाने के लिए जमीन चिह्नित 
प्रदेश के सभी 18 रेंज मुख्यालयों पर खुले साइबर क्राइम थानों के लिए प्रशासनिक भवनों का निर्माण कराने की कवायद शुरू हो गई है। पांच साइबर क्राइम थानों गौतमबुद्धनगर, लखनऊ, आजमगढ, बस्ती एवं झांसी में भवन निर्माण के लिए तो भूमि चिह्नित भी कर कर ली गई है। साइबर क्राइम मुख्यालय पर एक अनुभवी साइबर एक्सपर्ट को सलाहकार के रूप में नियुक्त करने की योजना है। साइबर अपराधों की जांच के लिए पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित करने का कार्यक्रम भी चल रहा है। पुलिस विभाग खुद मानता है कि साइबर अपराधों की जांच के लिए उसके पास दक्ष मैनपॉवर की कमी है। 

तीन वर्षों में आईपीसी में दर्ज कुल अपराध
वर्ष 2018 - 342355
वर्ष 2019 - 353131
वर्ष 2020- 355110

तीन वर्षों में साइबर क्राइम के कुल मामले
वर्ष 2018 - 6280
वर्ष 2019- 11416
वर्ष 2020- 11097

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