वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, मंत्री डा0 अरूण कुमार सक्सेना द्वारा की गई प्रेस वार्ता के मुख्य बिन्दु

लखनऊ: (मानवी मीडिया)वृक्षारोपण जन आन्दोलन 2022 में प्रदेश का पौधारोपण लक्ष्य 35 करोड़ है जिसमें पर्यावारण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का लक्ष्य 14 करोड़ तथा अन्य 25 विभागों का लक्ष्य 21 करोड़ है।  35 करोड़ पौधो का वृक्षारोपण निम्न चरणों में किया जायेगा।

1.    05.07.2022ः 25 करोड़ पौधों का रोपण। हर जनपद में वृहद स्तर पर वन महोत्सव समारोह का आयोजन।
2.    दिनांक 06.07.2022ः 2.5 करोड़ पौधो का रोपण - उक्त दिनांक को शक्ति वन हेतु चिन्हित स्थलों पर पौधारोपण कार्यक्रम।
3.    दिनांक 07.07.2022ः 2.5 करोड़ पौधो का रोपण - उक्त दिनांक को खाद्य वन हेतु चिन्हित स्थलों पर पौधारोपण कार्यक्रम।
4.    दिनांक 15.08.2022ः 05 करोड़ पौधो का रोपण - आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर प्रत्येक ग्राम पंचायत तथा शहरी निकाय में ‘‘अमृत वन‘‘ की स्थापना। विभिन्न प्रकार के वनों की स्थापना।
1.   अमृत वन- आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर उत्तर प्रदेश के प्रत्येक ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय में 15 अगस्त 2022 को जन सहभागिता के माध्यम से अमृत वन की स्थापना की जा रही है। प्रत्येक ग्राम पंचायत/नगर पंचायत में 75 तथा प्रत्येक म्यूनिसिपल बोर्ड/म्यूनिसिपल कार्पोरेशन में 750 अथवा 75 स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जायेगा। अमृत वन की स्थापना में राष्ट्रीय वृक्ष बरगद तथा देशज पौधे पीपल, पाकड़, नीम, बेल, आंवला, आम, कटहल, सहजन, आदि के रोपण को वरीयता।
2.   शक्ति वन- प्रत्येक जनपद में महिलाओं के नेतृत्व तथा उनके सक्रिय सहयोग से शक्ति वन की स्थापना जिसमंे गणमान्य/विशिष्ट महिला अतिथि तथा व्यापक स्तर पर आमंत्रित महिलाओं के सहयोग से वृक्षारोपण कराया जायेगा।
3.   नगर वन- 13 जनपदों में 25 नगर वन की स्थापना।
4.   प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में बाल वन तथा उच्च शिक्षा/प्राविधिक षिक्षा के संस्थानों में युवा वन की स्थापना।
  वन विभाग, उद्यान विभाग, रेशम विभाग की पौधशालाओं तथा निजी पौधशालाओं में कुल 46.41 करोड़ पौध उपलब्ध है। मुख्य प्रजातियां नीम, सहजन, आंवला, इमली, अर्जुन, जामुन, बेल, आम, महुआ, सागौन, शीशम, गुटेल, बांस, पीपल, पाकड़, बरगद आदि है।
 
  विभिन्न विभागों को पौध आपूर्ति हेतु इण्डेन्ट/मांग पत्र जारी, पौध ढुलान प्रगति पर। अन्य विभागों द्वारा पौध डी0एस0टी0 (क्पतमबज ैममकसपदह ज्तंदेमित) प्रक्रिया के माध्यम से वन विभाग की पौधशलाओं से प्राप्त कर वृक्षारोपण।   पर्यावरणीय लाभ एवं
कृषकों की आय में सतत् वृद्धि के दृष्टिगत़ वृक्षारोपण जन-आन्दोलन 2021 हेतु प्रदेश के समस्त शासकीय विभागों, मा० न्यायालय परिसरों/कृषकांें/संस्थाओं/व्यक्तियों/ निजी एवं शासकीय शिक्षण संस्थाओं/भारत सरकार के विभाग एवं उपक्रम/स्थानीय निकायों यथा ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगर निगम, नगर पालिका परिषद प्राधिकरण आदि/रेलवे/रक्षा/औद्योगिक इकाइयों/सहकारी समितियों एवं अन्य को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की पौधशालाओं से निःशुल्क पौध उपलब्ध। वृक्षारोपण कार्यक्रमों का वृहद स्तर पर प्रचार-प्रसार।  वन महोत्सव कार्यक्रम हेतु प्रत्येक जनपद में मा0 जन प्रतिनिधियों एवं विशिष्ट जनों की उपस्थिति में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे।

 मुख्यमंत्री  द्वारा स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं कि रोपित पौधों की सुरक्षा एवं सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जाये।
समस्त वृक्षारोपण स्थलों की जियो टैगिंग। हरीतिमा-अमृत वन ऐप पर समस्त अमृत वन स्थलों तथा अन्य विभागों के वृक्षारोपण स्थलों की सूचना/प्रगति का अपलोडिंग।  फसलों में विविधता लाकर आय में वृद्धि हेतु कृषि वानिकी को प्राथमिकता। कृषि वानिकी से प्रकाष्ठ की उपलब्धता में वृद्धि होगी जिससे प्रकाष्ठ आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा रोजगार के साधन में भी वृद्धि होगी।
  नदियों के किनारे पौधारोपण को प्राथमिकता।  सड़क किनारे विशेषकर एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग आदि के किनारे रोपण को प्राथमिकता।
  शहरों में वायु प्रदूषण व जलवायु परिवर्तन के नियंत्रण हेतु घने मियावाकी वन तथा नगर वन की स्थापना की जा रही है।  वृक्षारोपण से संबंधित समस्त कार्यो का अनुश्रवण आनलाईन पी0एम0एस0 (च्संदजंजपवद उवदपजवतपदह ेलेजमउ) एवं एन0एम0एस0 (छनतेमतल उंदंहमउमदज ेलेजमउ) के माध्यम से वन विभाग मुख्यालय स्थित कमाण्ड सेन्टर से किया जा रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण में वृक्ष के महत्व पर जन जागरूकताः- वृक्ष वायुमण्डल से हानिकारक गैसों को हटाकर, ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित कर, ग्रीन हाउस के प्रभाव को कम करने के साथ-साथ वायु की गुणवत्ता में सुधार करता है। पर्यावरण शुद्ध करने, धूल व तापमान नियंत्रण व ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण में वृक्ष प्रजातियों पीपल, बरगद, पाकड़, गूलर, नीम, आम, जामुन, महुआ, इमली, अमलतास, अशोक, सहजन आदि सहायक हैं। आज पूरा विश्व इस बात से अवगत है कि किसी स्थान पर वृक्षावरण बढ़ाकर वहाँ की मृदा व भू-जल स्तर में सुधार, आक्सीजन की प्रचुरता द्वारा वायु की शुद्धता आदि से उस स्थान के माईक्रो क्लाइमेट में सुधार हो जाता है।
वृक्षों द्वारा प्राप्त जीवनदायनी आक्सीजन के लिये हम सदैव ऋणी रहेंगे। यह आवश्यक है कि प्रदेश का प्रत्येक व्यक्ति पीपल, बरगद, पाकड़, नीम, सहित सभी प्रजातियों के पौधों का रोपण तथा वृक्ष के रूप में स्थापित होने तक उनका संरक्षण कर ऋण मुक्त हों। साथ ही, कार्बन अवशोषण में वृक्षों की भूमिका का जन मानस में प्रचार-प्रसार किया जाय। आज यह आवश्यक है कि डवतंस मजीपबे के साथ-साथ पर्यावरण नैतिकता (म्दअपतवदउमदजंस मजीपबे) की भावना को जागृत कर आक्सीजन टैंक तथा कार्बन सिंक में वृक्षों के महत्व पर सभी को शिक्षित किया जाय।
उपरोक्त उदेश्यों की प्राप्ति हेतु आज यह आवश्यक है कि जनमानस में वन एवं वृक्षों के संरक्षण के प्रति संवेदना व अभिरूचि उत्पन्न की जाये तथा वृक्षों से होने वाले लाभों को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुॅचाया जाये। इस हेतु जन सहभागिता के माध्यम से हरीतिमा संवर्धन एवं विस्तार के दृष्टिगत वृहद स्तर पर वृक्षारोपण एवं उनकी सुरक्षा व संरक्षण किया जाना आवश्यक है। साथ ही जनमानस में ’’पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ’’ स्लोगन का वृहद प्रचार प्रसार कराया जाये तथा ’’परिवार के हर सदस्य द्वारा एक पौधे का रोपण’’ का संदेश प्रदेश के हर गांव में पहुॅंचाया जाये।
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