भाजपा के नेता तो अहंकार में डूबे हुए हैं ही स्थानीय प्रशासन भी सत्तारूढ़ भाजपा के दबाव में --अखिलेश यादव

लखनऊ (मानवी मीडिया)समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष  अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में सत्ता के संरक्षण में अराजकता और अव्यवस्था को बढ़ावा मिल रहा हैं भाजपा के नेता तो अहंकार में डूबे हुए हैं ही स्थानीय प्रशासन भी सत्तारूढ़ भाजपा के दबाव में असल गुनाहगारों को बचाने लगा है। जनसामान्य के दुःखदर्द की कहीं सुनवाई नहीं। भाजपा राज में हत्या, छेड़खानी, रेप की घटनाएं बेलगाम हैं और बच्चियों तथा महिलाओं को सर्वाधिक अपमानित होना पड़ रहा है।

   कन्नौज के सौरिख में भाजपा कार्यकर्ता ने एक दलित बालिका की रेप कर हत्या कर दी। बालिका को पिटाई से चोट के 13 निशान मिले। झांसी में टोल प्लाजा पर भाजपा समर्थकों ने खूब हंगामा किया। मैनेजर समेत कई टोल कर्मियों को पीटा। आधी रात में बिना टोल 20 गाड़ियां निकाली। बदायूँ में एक बहन के साथ भाजपाई ने नशे में छेड़छाड़ की और पुलिस में शिकायत करने पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। बदायूं के थाना जरीफनगर में हुई घटना शर्मनाक है। अयोध्या में आई.ए.एस. की तैयारी कर रही एक युवती से नशे की हालत में सिपाही ने अश्लील हरकत की। रिपोर्ट के बावजूद पुलिस सख्त कार्यवाही से बचती रही।
   फर्रूखाबाद में एक किशोरी से छेड़छाड़ के आरोपी पर जब केस दर्ज हुआ तो उसको छुड़ाने के लिए भाजपाइयों ने 2 घंटे तक शहर कोतवाली में हंगामा किया।
   भाजपा राज में बाल अपराध के नए कीर्तिमान रचे जा रहे हैं। एक जनवरी 2022 से 30 अप्रैल 2022 चार जिलों में 35 बच्चे 47 बच्चियों समेत कुल 82 मासूम लापता हो गए। देवरिया में 7 बच्चे 16 बच्चियां कुल 23 लापता है। गोरखपुर में 10 बच्चे व 6 बच्चियां कुल 16 तथा कुशीनगर में 15 बच्चे 16 बच्चियां कुल 28 बच्चे गायब है। महाराजगंज में 3 बच्चे 12 बच्चियां कुल 15 बच्चे लापता है। इस तरह 82 बच्चे गायब हुए जिनमें 79 का कोई सुराग नहीं लगा है। अपहरण के केस भी समय से दर्ज नहीं हुए हैं। भाजपा सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
   वस्तुतः बेखौफ लुटेरों की वजह से महिलाओं का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। गाजियाबाद में ही 2 दिन में चेन स्नेचिंग की 7 वारदातें हुई। लेकिन एक भी केस दर्ज नहीं हुआ। राजधानी लखनऊ में ही घरो में घुसकर लूट और हत्या की कई घटनाएं हुई हैं। भाजपा राज में बहन बेटियां खुद को पूर्णतः असुरक्षित महसूस कर रही है।
   उत्तर प्रदेश में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अपराधियों, भाजपाइयों और पुलिस की तिकड़ी जुगलबंदी से लोगों को और खासकर बहन बेटियों को कैसे बचाया जाए? सत्ता पाकर भाजपाई इतने दम्भी और अहंकारी हो गए हैं कि वे पुलिस प्रशासन को भी निशाना बनाने से नहीं चूक रहे हैं और अपराधियों को खुलकर संरक्षण दे रहे हैं। सत्ता भी उनके साथ होकर उल्टे पुलिस को ही प्रताड़ित करने लगी है। अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाले मुख्यमंत्री जी अपने ही दल के बेलगाम नेताओं की अराजकता पर कब रोक लगाएंगे?
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