लखनऊ:: अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव


लखनऊ (मानवी मीडिया)आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत त्रिविधि पावनी अति पुनीत पर्व बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ द्वारा बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन आज 16 मई 2022 को संस्थान के प्रेक्षाग्रह में संस्थान के  अध्यक्ष, भदंत शांति मित्र की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम का आरंभ भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन तथा बुद्ध वंदना के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में अध्यक्ष, भदंत शांति मित्र , मुख्य अतिथि  स्वतंत्र देव सिंह , मंत्री, जल शक्ति उत्तर प्रदेश सरकार, अति विशिष्ट अतिथि  डॉ0 महेंद्र सिंह , एमएलसी एवं पूर्व मंत्री, लालजी  निर्मल, अध्यक्ष, अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम, प्रो0 (डॉ0) अभय कुमार जैन, उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान, संस्थान के सदस्य भिक्षु देव आनंद वर्धन, भिक्षु धम्मानंद विवेचन, भिक्षु शील रतन,  तरुणेश बौद्ध ,  आनंद कुमार, विशेष सचिव, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन,  नानक चंद लखवानी, उपाध्यक्ष, सिंधी समाज, सरदार मंजीत सिंह, अध्यक्ष, राष्ट्रीय सिक्ख संगत, उत्तर प्रदेश,  अरुणेश मिश्र, डॉ0 धीरेन्द्र सिंह, डॉ0 राकेश सिंह,  निदेशक,  संस्थान  आदि  अन्य  गणमान्य  सर्वपंथी   धर्मगुरु एवं समाजसेवी विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए।
अपने संबोधन में संस्थान के अध्यक्ष, भदंत शांति मित्र  ने बताया कि यह महोत्सव कार्यक्रम आज 16 मई से प्रारंभ होकर 21 जून, 2022 योग दिवस तक चलता रहेगा। आप ने बताया कि इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले के अधिकांश गांव में ऑनलाइन -ऑफलाइन माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के बैनर तले लगभग 1000 बौद्ध भिक्षु समाज के अंतिम व्यक्ति के साथ जुड़कर बुद्ध पूजा वंदना, प्रसाद वितरण, तथा बुकलेटें वितरण कर रहे हैं साथ ही संस्थान राष्ट्र निर्माण के लिए सभी पथों के धर्मगुरु से मिलकर विपश्यना ध्यान योग के माध्यम से भाईचारा बढ़ाकर आतंकवाद, नक्सलवाद, रूढ़िवाद से मुक्ति दिलाने तथा मानव एकता एवं मानवीय मूल्यों की रक्षा में तत्पर है। 
डॉ0 महेंद्र सिंह  ने कहा कि भारत सहित विश्व के अनेक देश जैसे चीन, जापान, कंबोडिया, श्रीलंका, थाईलैंड आदि ने भगवान बुद्ध के विचारों को ग्रहण किया तथा शांति स्थापित की। आप ने बताया कि भगवान बुद्ध के जीवन की तीन प्रमुख घटनाएं उनका जन्म, उनका ज्ञान तथा महापरिनिर्वाण की प्राप्ति पूर्णिमा के दिन ही हुई थी।  लालजी प्रसाद निर्मल ने अपने वक्तव्य में बताया कि  प्रधानमंत्री,  नरेंद्र मोदी  ने अपने संयुक्त राष्ट्र संघ के संबोधन में कहा था कि दुनिया ने युद्ध दिया जबकि हमारे देश भारत ने बुद्ध दिया जो कि उनके भगवान बुद्ध के प्रति प्रेम को दर्शाता है आपने बुद्ध को प्रथम क्रांति का जनक और सामाजिक समानता का नायक बताया।  मंत्री,  स्वतंत्र देव सिंह जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी को अष्टांगिक मार्ग को अपने जीवन में अपनाना चाहिए तथा आपने भगवान बुद्ध के मत अप्प दीपो भव: अर्थात अपना प्रकाश स्वयं बनो पर बल दिया।  नानक  लखवानी ने भगवान बुद्ध के विचारों के माध्यम से मानव कल्याण करने को तथा उनको अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।  प्रोफेसर डॉ0 अभय कुमार जैन  ने भगवान बुद्ध तथा भगवान महावीर को समकालीन बताते हुए कहा कि सभी प्राणियों में वही आत्मा विद्यमान है जो हमारे अंदर है, आपने कहा कि सभी को राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए, व्यक्ति से समाज तथा समाज से राष्ट्र का निर्माण होता है।  तरुणेश बौद्ध जी ने अहिंसा की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।  अरुणेश मिश्र  ने कहा कि भगवान बुद्ध आज के परिपेक्ष्य में भी प्रासंगिक हैं  संस्थान के निदेशक, डॉ राकेश सिंह  ने  संस्थान की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थान भगवान बुद्ध के संदेशों को गांव-गांव तक पहुंचाकर वर्तमान सरकार के लक्ष्य के अनुरूप अंत्योदय की परिकल्पना को साकार करने में प्रयासरत है इसके लिए आपने  सभी पन्थो के गणमान्य नागरिकों को साथ मिलकर कार्य करने का आवाहन किया तथा अंत में कार्यक्रम में आए हुए गणमान्य अतिथियों, बौद्ध भिक्षुओं, वक्ताओं, मीडिया कर्मियों, एवं विद्वानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया

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