भारतीय संविधान में वर्णित के अन्तर्गत समान नागरिक संहिता की व्यवस्था’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित

लखनऊ (मानवी मीडिया) उत्तर प्रदेश के विधान परिषद सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में आज यहां विधान भवन स्थित तिलक हॉल में सांविधानिक एवं संसदीय अध्ययन संस्थान, उत्तर प्रदेश शाखा की ओर से भारतीय संविधान में वर्णित नीति निदेशक तत्व के अन्तर्गत समान नागरिक संहिता की व्यवस्था’ विषय पर विचार गोष्ठी (सेमिनार) आयोजित की गयी। गोष्ठी में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। इस अवसर पर वर्तमान विधान परिषद् सदस्य  मधुकर जेटली के साथ ही पूर्व विधान परिषद् सदस्य  मणि शंकर पाण्डेय,  अजय कुमार उर्फ विशाल वर्मा,शिवबोध राम, अरविन्द कुमार त्रिपाठी एवं पूर्व विधान सभा सदस्य  नम्रता करवरिया भी उपस्थित रहीं। विचार गोष्ठी में लगभग 80 सदस्यों ने प्रतिभाग किया।

सभापति कंुवर मानवेन्द्र सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान में वर्णित नीति निर्देशक तत्व के अन्तर्गत समान नागरिक संहिता की व्यवस्था’ विषय के प्रति चिन्तनशीलता भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाएगी। इस गोष्ठी में जो विचार आयें है वह भारतीय संसदीय व्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होंगे। ‘भारतीय संविधान में वर्णित नीति निदेशक तत्व के अन्तर्गत समान नागरिक -संहिता की व्यवस्था’ एक बहुत ही महत्वपूर्ण एवं समसामयिक विषय है, इस विषय पर जो भी विचार इस गोष्ठी में आये हैं उनको केन्द्रीय शाखा को भेजा जायेगा, उम्मीद है कि केन्द्रीय शाखा द्वारा उन पर विचार किया जाएगा और आवश्यकतानुसार उन विचारों को केन्द्रीय शाखा द्वारा समाहित किया जाएगा।

सभापति ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली का आधार भारतीय संविधान में उल्लिखित प्रावधान हैं। भारतीय संविधान भारत की वैविध्यपूर्ण संस्कृति एवं विविधता से भरे जनमानस को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अधिकार देता है साथ ही यह अपने नागरिकों से मूलभूत कर्तव्यों की अपेक्षा करता है। मूल अधिकार वास्तव में राजनीतिक लोकतंत्र की हिमायती है जबकि नीति निदेशक तत्व सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र के लिए प्रासंगिक है, इन्हीं निदेशक तत्वों में अनुच्छेद-44 में वर्णित समान नागरिक संहिता का प्रावधान लोकतांत्रिक समाज बनाने हेतु निरन्तर अपेक्षित रहा है। इस विचार गोष्ठी के माध्यम से समान नागरिक संहिता के विषय पर जो भी विचार आये हैं वह सर्वसमावेशी समाज के लिए लाभदायक सिद्ध होंगे।

उप मुख्यमंत्री  ब्रजेश पाठक ने कहा कि भारत का लोकतंत्र पूरी दुनिया में सराहा जाता है। विधान परिषद अपनी कार्यवाही एवं अपने विद्वदजनों तथा अपनी अलग कार्यशैली की बदौलत पूरे देश और दुनिया में अलग स्थान रखती है। परिषद का दायित्व है कि विधानसभा से जो भी विधेयक पारित हों, विधान परिषद में उसका विश्लेषण करने के उपरांत उस पर मोहर लगाये। भारत का लोकतंत्र आजादी के बाद से आज तक और अधिक मजबूत होता गया है। पूरी दुनिया ने भारत के लोकतंत्र के सबसे बड़े राज्य के चुनाव को अभी हाल ही में देखा है, जो शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ है। उन्होंने कहा कि इस गोष्ठी के माध्यम से जो भी बहुमूल्य सुझाव आये हैं उन पर विचार कर आगे बढ़ाया जायेगा।

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