LIC के आईपीओ का रहेगा बाजार पर असर


मुंबई (मानवी मीडिया): वैश्विक बाजर की गिरावट के दबाव में बीते सप्ताह लगभग प्रतिशत गिर चुके घरेलू शेयर बाजार की चाल अगले सप्ताह रूस-यूक्रेन तनाव, इसके अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख, पांच राज्यों में हो रहे चुनाव एवं जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के जारी होने वाले प्रारंभिक सार्वजनिक निगम (आईपीओ) से तय होगी।

बीते सप्ताह बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 491.9 अंक टूटकर 58152.92 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 141.55 अंक गिरकर 17374.75 अंक पर आ गया। दिग्गज कंपनियों की तरह छाेटी और मझौली कंपनियों ने भी बिकवाली की मार झेली। सप्ताहांत पर बीएसई का मिडकैप 499.69 अंक उतरकर 24250.92 अंक और स्मॉलकैप 1010.76 अंक लुढ़ककर 28691.82 अंक पर रहा।

विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक बाजार रिकॉर्ड मुद्रास्फीति के बाद अमेरिका में ब्याज दरों में तेज वृद्धि की आशंकाओं के साथ समायोजित हो रहा है लेकिन बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों की निवेश धारणा को और खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। रूस-यूक्रेन गतिरोध पर कुछ खबरों के बाद शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में तेज बिकवाली का दबाव देखा गया। इस तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई, जो भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए अच्छा नहीं है।

स्थानीय स्तर पर अगले सप्ताह मुद्रास्फीति के आंकड़े होंगे जबकि कंपनियों के तिमाही परिणाम सत्र के अंत में कुछ व्यक्तिगत शेयरों पर असर पड़ेगा। राजनीतिक मोर्चे पर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर के आगामी विधानसभा चुनाव की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर रहेगी। साथ ही

एलआईसी का आईपीओ बाजार के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय बाजार के इतिहास में सबसे बड़ा आईपीओ होने जा रहा है। इस आईपीओ के जल्द ही बाजार में आने की उम्मीद है, जिसासे कम से कम एक करोड़ नए डीमैट खाते खुल सकते हैं और यह भारतीय बाजार की गतिशीलता के लिए एक बड़ा सकारात्मक हो सकता है क्योंकि यदि इनमें से 10 प्रतिशत निवेशक सक्रिय हो जाते हैं तो यह खुदरा निवेशकों की भागीदारी में वृद्धि करेगा और यह सरकार को एसटीटी के माध्यम से राजस्व उत्पन्न करने में भी मददगार साबित होगा।

अगले सप्ताह शेयर बाजार की चाल को निर्धारित करने में एफआईआई का व्यवहार भी एक महत्वपूर्ण कारक होगा क्योंकि वे लगातार बिकवाली कर रहे हैं। मौजूदा बाजार के बारे में दिलचस्प बात यह है कि इसमें काफी उतार-चढ़ाव रहा है लेकिन एफआईआई द्वारा 1.5 लाख करोड़ से अधिक की बिकवाली के बावजूद अक्टूबर के बाद से बाजार एक रेंज में गतिशील है।

कच्चे तेल में जारी उबाल से विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की जबरदस्त बिकवाली के दबाव में सोमवार को शेयर बाजार में कोहराम मच गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 92 डॉलर से ऊपर बने रहने से एफआईआई ने घरेलू शेयर बाजार में जमकर बिकवाली की। इससे सेंसेक्स 1023.63 अंक का गोता लगाकर 58 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 57621.19 अंक पर और निफ्टी 302.35 अंक की बड़ी गिरावट लेकर 17213.95 अंक पर आ गया।

वैश्विक बाजार की तेजी से उत्साहित निवेशकों की स्थानीय स्तर पर टाटा स्टील, रिलायंस, मारुति, आईसीआईसीआई और आईटीसी समेत 19 दिग्ग्ज कंपनियों में लिवाली की बदौलत मंगलवार को शेयर बाजार में रौनक लौट आई। सेंसेक्स 187.39 अंक चढ़कर 57808.58 अंक और निफ्टी 53.15 अंक बढ़कर 17266.75 अंक पर रहा।

रूस-यूक्रेन तनाव को कम करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे प्रयासों से वैश्विक बाजार में आई तेजी से उत्साहित निवेश्कों की स्थानीय स्तर पर हुई चौतरफा लिवाली की बदौलत बुधवार को एक प्रतिशत से अधिक की उछाल के साथ घरेलू शेयर बाजार गुलजार हो गया। सेंसेक्स 657.39 अंक की छलांग लगाकर 58 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार 58468.97 अंक और निफ्टी 197.05 अंक की तेजी के साथ 17463.80 अंक पर पहुंच गया। इसी तरह रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नीतिगत दरों को यथावत रखने से उत्साहित निवेशकों की चौतरफा लिवाली की बदौलत गुरुवार को शेयर बाजार झूम उठा। सेंसेक्स 460 अंक उछलकर 58926.03 अंक और निफ्टी 126.20 अंक की तेजी के साथ 17590 अंक पर पहुंच गया।

अमेरिका में महंगाई 40 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के कारण फेड रिजर्व के ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी शीघ्र शुरू करने की अटकलों से वैश्विक बाजार में आई गिरावट के दबाव में निवेशकों ने स्थानीय स्तर पर जमकर बिकवाली की, जिससे शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार की पिछले लगातार तीन दिन की तेजी थम गई। सेंसेक्स 773.11 अंक का गोता लगाकर 58152.92 अंक और निफ्टी 231.10 अंक लुढ़ककर 17374.75 अंक पर आ गया।

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