अवैध रूप से नियुक्त अध्यक्ष यानी बडका बाबू ने न्यायपालिका को भी रखा ताख पर


लखनऊ (मानवी मीडिया)उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन मे अवैध रूप से बैठे अध्यक्ष यानि कि बड़केबाबू ने अपनी अनुभवहीनता का सबूत दे दिया । बड़के बाबु ने अब तो न्यायापालिका को भी धता बताते हुए अपनी मन मर्जी चलाते हुए अपने उच्च अधिकारियों को *सीबीआई जांच मे फसे फस रहे है उनको क्लीन चिट देदी इस पर वो कहावत एक दम सही बैठती है कि धोबी पर बस चला नही तो गधा ही सही की  तर्ज पर* भारतीय प्रशासनिक सेवा के अपने वरिष्ठो अधिकारियो को बचाने के लिए  खेल खेलना शुरू कर दिया है इनके हिसाब से मात्र यही दो लोग दोषी है *एक निदेशक वित्त और दूसरे महाप्रबंधक वित्त व ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव जब कि सीबीआई ने पूर्व अध्यक्ष पावर कार्पोरेशन सजय अग्रवाल व दूसरे अध्यक्ष पावर कार्पोरेशन आलोक कुमार जो कि वर्तमान समय मे ऊर्जा सचिव भारत सरकार है व तत्कालीन प्रबन्धन निदेशिका अपर्णा यू  खिलाफ भी जाच के लिए माननीय मुख्य मंत्री उत्तर प्रदेश से अनुमती मागी है क्या वर्तमान अध्यक्ष पावर कार्पोरेशन/ प्रमुख सचिव ऊर्जा इतने ताकतवर हो गये कि माननीय न्यायालय पालिका और जांच ऐजेन्सी सीबीआई की जांच होने से पहले ही अपना फैसला सुना रहे है क्या इस आदेश से इनके अनुभवहीन व पक्षधरता स्पष्ट तौर नही नजर आ रही है कि जब मामला न्यायालय मे विचाराधीन है और आरोपी जेल मे है व कुछ जमानत पर  भारतीय प्रशासनिक सेवा के तीन उच्च अधिकारीयो से केन्द्रीय जांच ऐजेन्सी पूछताछ करना चाहती है जिसके लिए उसने प्रदेश के मुख्य मंत्री से भी अनुमती मागी है* और पूछताछ होनी बाकी है घोटालेबाज और षडयंत्रकारी अभी तक सामने नही आये है पूरा मामला न्यायालय मे विचाराधीन है तो फिर किसके इशारे पर यह *अध्यक्ष पावर कार्पोरेशन यह आदेश निर्गत कर सकते है क्या यह अपने कुकर्मो को छुपाने व अपने से जेष्ठो अधिकारियो को बचा कर व उनकी  नजर मे इस कृत को कर अपनी विद्वत्ता दिखाने की कोशिश कर रहे है या इस आदेश के पीछे भी कोई और साजिश है* या जो अगले महीने *सेवानिवृत्त होने जा रहे अपने से जेष्ठ अधिकारी या अपने राजनीतिक आकाओ को बचाने का खेल तो खेला नही जा रहा* । वर्तमान अध्यक्ष के द्वारा निरंकुशता भरे फैसलो से पूरे कार्पोरेशन मे रोश का महौल व्याप्त है

वैसे तो कार्रवाई का बडा दम भरने वाले बडकाऊ ने बहुतो पर तो कार्रवाई की परन्तु अध्यक्ष अभियन्ता संघ व महासचिव अभियन्ता संघ पर क्यो कार्रवाई टालते है क्या उनकी गर्दन पर पैर रख कर पूरे अभियन्ता वर्ग की आवाज का गला घोटने की कोशिश की गयी है पाठको को बताते चले कि अभियन्ता संघ के वर्तमान अध्यक्ष एक बडे परिवर्तक घोटाले मे दोषी पाए जा चुके है यह जनाब अपने लेखो मे बडी बडी बाते करते थे गुरू गोविंद सिंह की तर्ज पर अभियन्ताओ से पंच प्यारे मागते थे वैसे तो सूत्र बताते है कि आपने को कार्रवाई से बचाने के लिए जनाब बडका बाबूओ के चरण वन्दन करते देखे जाते है । इन्ही जैसे भ्रष्टाचारियो की वजह से यह अवैध रूप से नियुक्त बड़केबाबु की हिम्मत इतनी बढ गयी है कि वो न्यायपालिका तक को हैंगर मे टाग कर रखे हुए है आज इन अनुभवहीन बड़केबाबुओ ने न्यायालय को भी पीछे छोड यह साबित कर दिया है कि नियम कानून इनकी जेब मे यह जैसा चाहेगे वैसा सबको करना होगा । क्या इनके यह कृत यह साबित करने के लिए पर्याप्त नही है कि यह घोटाला इन्ही बडका बाबूओ के द्वारा दबाव दे कर कराया गया होगा जब कम्पनी ऐक्ट के अन्तर्गत संचालित कार्पोरेशन मे एक ही व्यक्ति सभी ऊर्जा निगमो का अध्यक्ष कैसे बन गया जब कि हर कम्पनी के अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर  होते है नियमो को ताक पर रखने की इससे बडा और क्या उदाहरण होगा कि पिछले साल से कई वितरण निगमो वा पावर कार्पोरेशन मे भी कई निदेशक अपना कार्यकाल पूरा कर चुके है और उनको कम्पनी सलाहकार बना कर नियुक्त कर जनता के पैसे पर ऐश कराई जा रही है जो इनकी बात नही मानता उस पर विभिन्न नियमो के तहत कार्रवाई की घमकी दे कर मन माना काम लिया जाता है जो चाटुकारता नही करते या जनाब की हाँ मे हाँ नही मिलाते उनके ऊपर कार्रवाई किसी ना किसी बहाने से होती ही रहती है और जो इनकी जी हजूरी करते है उन पर जनाब आँख कान बन्द कर लेते है जैसे कि शक्तिभवन से चन्द कदमो की दूरी पर फील्ड हास्टल इनके कृपात्रो की कहानी खुद अपनी जुबानी चीख चीख कर कह रहा है लेकिन बडकऊको वो ना तो दिखाई देता है ना उसकी कोई शिकायत सुनाई देती है । खैर 

अविजित आनन्द 

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