स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को हमेशा शान से जीने की दी प्रेरणा::भाo नo प o


लखनऊ (मानवी मीडिया)  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय नागरिक परिषद के तत्वावधान में आज स्वामी विवेकानंद की जयंती पर  संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा अदम्य साहसी और विलक्षण पराक्रमी स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को हमेशा शान से जीने की प्रेरणा दी।  इसी कारण उनका जन्मदिन युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है ।उन्होंने कहा स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को हर हाल में शान से जीने की प्रेरणा दी।धर्म के नाम पर छल और आडंबर से मुक्त होकर मानवता के धर्म के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने का भाव उन्होंने जगाया।स्वामी जी कहते थे चरित्रवान युवाओं को उस बड़े संगठन की आवश्यकता है जिस के कंधों पर बैठकर सभी जातियां और धर्म एक साथ ऊपर उठने का साहस बटोर सकें। उन्होंने कहा कि हमारा देश यदि सचमुच जगद्गुरु कहलाने के योग्य है तो वह केवल स्वामी विवेकानंद के कारण।यहां से वहां तक प्रसिद्धि हासिल करने के पश्चात अपने ही देश में स्वामी जी को ईर्ष्यालुओं और कूप मंडूकों  की भारी भर्त्सना  झेलनी पड़ी ।यह युद्ध भी उन्होंने उसी तरह लड़ा जिस तरह किसी भी क्षेत्र में अपराजेय योद्धा को लड़ना पड़ता है। स्वामी जी ने अपनी समरनीति से कभी समझौता नहीं किया। वे आध्यात्मिक जगत के चक्रवर्ती सम्राट थे।  स्वामी विवेकानंद ने जिस नये भारत की  कल्पना की थी उन्हीं के शब्दों में - नया भारत निकल पड़े मोची की दुकान से, भड़भूँजे के भाड़ से ,मजदूर के कारखाने से ,हॉट से बाजार से ,निकल पड़े झाड़ियों, जंगलों, पर्वतों से। स्वामी विवेकानंद का सबसे बड़ा देव मंत्र था उठो जागो स्वयं को जगा कर औरों को जगाओ अपने नर जीवन को सफल करो और तब तक न रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए।
संगोष्ठी में बोलते हुए भारतीय नागरिक परिषद के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश अग्निहोत्री  और महामंत्री रीना त्रिपाठी ने कहा कि आज पूरी दुनिया में भारत के युवाओं की मेधा और प्रतिभा का उभार दिख रहा है। अमेरिका तक अपने देश के युवाओं से आवाहन कर रहा है कि वह पढ़ने लिखने को ज्यादा तवज्जो दें वरना भारतीय युवा छा जाएंगे ।हमें आभारी होना चाहिए स्वामी विवेकानंद का जिन्होंने अकेले पहल की और दुनिया को भौचक्का कर दिया। भारत को उसका खोया गौरव वापस दिलाया।  स्वामी जी आज होते तो वाकई भारतीय युवाओं की दुनिया में धाक देख अपने सपने को पूरा होते देख कितना खुश होते।
 संगोष्ठी में मुख्य रूप से प्रभात सिंह,ए पी सिंह,एच एन पांडेय,वाई एन उपाध्याय,प्रेमा जोशी,निशा सिंह,देवेन्द्र द्विवेदी,रेनु त्रिपाठी, आलोक श्रीवास्तव, डी के मिश्र,दीपक चक्रवर्ती, पल्लव मुखर्जी,,वी के सिंह कलहंस , ओंकार सिंह, राजीव उपाध्याय, मुकेंद्र सिंह, महेशमिश्रा , पंकज शुक्ला, दीपक चक्रवर्ती, दिनेश मिश्र सम्मिलित हुए और अपने विचार रखें।



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