विद्यार्थी इनोवेटिव सोच एवं नये-नये आविष्कारों से किसानों के उत्थान के लिए कार्य करें -----

लखनऊ: (मानवी मीडिया)उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति   आनंदीबेन पटेल ने आज सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ के 14वें दीक्षान्त समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों ने ज्ञान प्राप्त करने के लिए और सामाजिक-मानवीय मूल्यों को बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत की है। विद्यार्थी इनोवेटिव सोच एवं नये-नये आविष्कारों से किसानों के उत्थान के लिए कार्य करें तथा शिक्षा के दौरान विकसित किए गए अपने कौशल का तर्कसंगत उपयोग करें।

 राज्यपाल  ने दीक्षान्त समारोह में 07 मेडल प्रदान किये गये, जिसमें बी0एस0सी0 (कृषि) के छात्र यशराज को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, दिशा अग्रवाल को कुलपति स्वर्ण पदक, अनन्या सिंह को कुलपति रजत पदक, संस्कृति सिंह को कुलपति कांस्य पदक, बीटेक बायोटेकनोलाजी के छात्र दिव्यांशु तिवारी को कुलपति स्वर्ण पदक, नयन्शी पाठक को कुलपति रजत एवं शिव कांत मिश्रा को कुलपति कांस्य पदक प्रदान किया। इसके साथ ही 167 स्नातक, 93 परास्नातक एवं 15 पीएचडी की उपाधियां वितरित की गयी।

राज्यपाल ने कहा कि बहुत से किसान ऐसे हैं, जो अपने अनुभव और परम्परागत ज्ञान के आधार पर उन्नत बीज और अच्छी फसलें पैदा करते हैं। कृषि वैज्ञानिक और कृषि स्नातक इनके अनुभवों का लाभ उठाये और अन्य कृषकों तक भी जानकारी को पहुंचाये। विश्वविद्यालय समय व मांग के अनुसार शोध करें। जिससे इसका लाभ किसानों को मिल सके।

राज्यपाल  आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विद्यार्थी जीवन से ही स्वरोजगार के गुर सिखाए जाने की व्यवस्था स्टार्टअप नीति में की गई है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में एग्रीटेक स्टार्टअप्स की संख्या में वृद्धि देखी गई है जो न केवल तकनीक को और भी सुलभ बना रहे हैं, बल्कि किसानों को अपने जीवन को बेहतर बनाने में भी मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि के योगदान को और अधिक कैसे प्रभावी बनाया जाए इस विषय पर विश्वविद्यालय सोचें।

कुलाधिपति ने कहा कि कृषि में रसायनों के उपयोग से मिट्टी और पर्यावरण की स्थिति बिगड़ रही है। जिसके कारण उपजाऊ जमीन धीरे-धीरे बंजर और ऊसर होती जा रही है। रासायनिक कृषि के दुष्परिणामों से छुटकारा पाने के लिए प्राकृतिक और गौ आधारित खेती की ओर लौटें। उन्होंनें कहा कि जीरो बजट गौ आधारित खेती एवं प्राकृतिक खेती के बारे में हमारे वैज्ञानिक और कृषि शिक्षा से जुड़े विद्यार्थी किसानों को प्रेरित करें। उचित होगा कि बीज, जैविक खाद एवं कीटनाशक स्वयं कृषक अपने खेतों में तैयार करें। इस विधि से खेती करने पर न केवल कृषि लागत में कमी आयेगी, बल्कि कृषि उत्पादकता में भी वृद्धि होगी।

 राज्यपाल  ने कहा कि भारत दुग्ध उत्पादन में विश्व का अग्रणी देश है, परन्तु प्रति पशु उत्पादकता काफी कम है। हमारे देश की पशु नस्लें देश की परिस्थितियों के अनुकूल हैं। अतः इनके प्रजनन एवं संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। विश्वविद्यालय का पशु चिकित्सा महाविद्यालय संकाय पशुपालन पर नवीनतम शोध एवं प्रसार के द्वारा पशुधन उत्पादन के क्षेत्र में कार्य करें।

राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह में कृषि महाविद्यालय के तीनों उत्कृष्टता पदक छात्राओं द्वारा प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को समान अवसर प्रदान किए जाए तो वे अपनी प्रतिभा को परिलक्षित करने में कहीं भी पीछे नहीं हैं।

कार्यक्रम में राज्यपाल  ने नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चन्द को मानद उपाधि से सम्मानित किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ0 आर0 के0 मित्तल, कार्य परिषद एवं विद्या परिषद सभी के सदस्यगण, सांसद, विधायक एवं जनप्रतिनिधिगण, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

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