भाजपा सत्ता की भूख में किसी भी हद तक जा सकती :: अखिलेश यादव

 


लखनऊ ( मानवी मीडिया )समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री  अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं को लखनऊ मुख्यालय पर सम्बोधित करते हुए कहा है कि जनता भाजपा के साथ नहीं है। लोगों में भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ तीव्र रोष है। महंगाई, भ्रष्टाचार से लोग त्रस्त हैं। चारों ओर बदलाव की हवा बह रही है। जनता को उम्मीद है कि समाजवादी सरकार बनने पर ही उनकी जिंदगी में खुशहाली आ सकेगी।

     उत्तर प्रदेश समाजवादी सरकार में जितना आगे बढ़ा था उससे दूर तक पीछे चला गया है। बड़े पैमाने पर नौकरी और रोजगार नहीं है। सरकारी भर्तियां रूकी हुई है, नौजवानों का भविष्य अंधकारमय है। महिलाओं को जगह-जगह अपमानित होना पड़ता है। जो इन्वेस्टमेंट के वादे किए गए थे, वे वादे ही बने हुए हैं। भाजपा सरकार में कोरोना काल में जीते जी लोगों को न इलाज मिला नहीं मरने के बाद पीड़त आश्रितों को मुआवजा मिला।

     कोविड मौतों के मुआवजे पर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी की है। मुख्यमंत्री  के झूठे वादों और कोविड काल में स्वास्थ्य व्यवस्था की झूठी तारीफ की पोल खुल गई हैं। कोरोना काल में जलती लाशों और गंगा में बहती लाशों के विचलित करने के दृश्य आज भी लोग याद कर सिहर जाते हैं।

     किसान भाजपा राज में सबसे ज्यादा परेशान है। भाजपा के संकल्पपत्र में वायदा किया गया था कि उसकी आय दुगनी की जाएगी। वास्तविकता यह है कि आय दुगनी हुई नहीं, बढ़ती महंगाई ने उसको ज्यादा कर्जदार बना दिया है। उसकी फसल की बिक्री एमएसपी पर नहीं होती है। खरीद सिर्फ कागजों पर होती है। बिचौलियों को औने-पौने दाम में फसल बेचने को उसे मजबूर होना पड़ता है। अन्ना जानवरों की वजह से उसे अपने खेतों का चौकीदार बनकर रहना पड़ता है।

     सच तो यह है कि भाजपा को जनहित के कामों में जरा भी दिलचस्पी नहीं रही है। उसकी नफरत की राजनीति के चलते समाज में अलगाव और वैमनस्य पनपता है। सत्ता के संरक्षण में अपराध बढ़ने से कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा टूट चला है। चुनाव में दिन जैसे जैसे नजदीक आते जा रहे हैं उसकी षड्यंत्रकारी गतिविधियों में तेजी आती जा रही है। भाजपा सत्ता की भूख में किसी भी हद तक जा सकती है। समाजवादी पार्टी लोकतंत्र पर खतरा न आने देने के लिए सदैव संघर्ष रत रही है। वह भाजपा की साजिशों का मुकाबला दृढ़ता से करने को संकल्पित है। सन्2022 के चुनाव भाजपा की पराजय और समाजवादी पार्टी की जीत की गाथा लिखी जानी तय है।

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