राम मंदिर की ₹30,00,00,000 की ‘‘चंदाचोरी’’ के सबूत उजागर:::प्रियंका गांधी


अयोध्या (मानवी मीडिया)धर्म-आस्था-विश्वास को बेच ‘‘मुनाफे की लूट’’ में लगे भाजपाई नेता!

राम मंदिर की ₹30,00,00,000 की ‘‘चंदाचोरी’’ के सबूत उजागर!

भगवान राम के मंदिर के ‘‘चंदा चोरों’’ को बचा रहे पीएम व सीएम!

राम मंदिर की ज़मीन खरीद में सिर्फ 5 मिनट में 1300 प्रतिशत की चपत - हेराफेरी साफ है

अयोध्यापति मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के नाम पर सारी मान-मर्यादा को ताक पर रखकर राम मंदिर के चंदे की ‘‘लूट का खेल’’ खेला जा रहा है। भगवान श्री राम तो हैं ही वचनों की मर्यादा, त्याग और नैतिकता। पर साफ है कि इसे दरकिनार कर भाजपाई नेजाओं, उनके मित्रों व राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के नुमाईंदों द्वारा ‘‘चंदे की लूट’’ का यह खेल मोदी-आदित्यनाथ सरकारों की सरपरस्ती में खेला जा रहा है।

श्री राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित हुए चंदे का घ्रणित दुरुपयोग व मंदिर की जमीन खरीदने में करोड़ों का घोटाला अब जगजाहिर हैः-

1.         2 करोड़ की ज़मीन को राममंदिर निर्माण ट्रस्ट को ₹26,50,00,000 (26.50 करोड़ रु.) में बेचा गया - 

क्या इससे बड़ा ‘‘मंदिर की चंदाचोरी’’ का कोई सबूत हो सकता है!   

    (i)         15 नवंबर, 2017 को हवेली अवध, बाग बिजैसी, अयोध्या की 2.334 हैक्टेयर ज़मीन को महज़ूज़ आलम इत्यादि द्वारा भगोड़े अपराधी हरीश कुमार पाठक उर्फ बाबा हरीदास व उसकी पत्नी, श्रीमती कुसुम पाठक को ₹2 करोड़ में बेचा गया। सेल डीड की कॉपी A1 संलग्न है। 

   (ii)         यह ज़मीन वक्फ़ की संपत्ति थी, तथा इसे फ़र्ज़ीवाड़े से बेचने बारे पुलिस स्टेशन, रामजन्म भूमि जिला अयोध्या में FIR No. 0040 dated 22 अप्रैल, 2018 दर्ज करा दी गई। इसकी कॉपी A2 संलग्न है। 

 (iii)         18 मार्च, 2021 को शाम 6:51 बजे उपरोक्त में से 10,370 वर्गमीटर यानि 1.037 हैक्टेयर जमीन ₹8,00,000,000 (8 करोड़ रु.) में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, मार्फ़त सेक्रेटरी, श्री चंपत राय को बेच दी गई (कॉपी A3 संलग्न)। रजिस्टर्ड सेल डीड में अनिल मिश्रा व ऋषिकेश उपाध्याय गवाह हैं। 

 (iv)         इसी बाबा हरीदास उर्फ हरीश पाठक व उसकी पत्नी, कुसुम पाठक ने 18 मार्च, 2021 को ही शाम के 7:10 बजे इसमें से 1.208 हैक्टेयर (12,080वर्गमीटर) ज़मीन रजिस्टर्ड सेल डीड से रविमोहन तिवारी व सुल्तान अंसारी को ₹2 करोड़ में बेच दी। रजिस्टर्ड सेल डीड की कॉपी A4 संलग्न है।

उसी समय पाँच मिनट के बाद यानि 18 मार्च, 2021 को शाम 7:15 बजे यही 12,080 वर्गमीटर जमीन रवि मोहन तिवारी व सुल्तान अंसारी द्वारा श्री रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मार्फ़त सेक्रेटरी, श्री चंपत राय को ₹18,50,00,000 (18.5 करोड़ रु.) में बेचने का रजिस्टर्ड इकरारनामा कर ट्रस्ट द्वारा ₹18.50 करोड़ का भुगतान कर दिया गया। रजिस्टर्ड सेल डीड की कॉपी A5 संलग्न है।

उपरोक्त दोनों रजिस्टर्ड सेल डीड में भी  अनिल मिश्रा व  ऋषिकेश उपाध्याय गवाह हैं। 

  (v)         तीनों ही रजिस्टर्ड डॉक्युमेंट्स पर  अनिल मिश्रा व  ऋषिकेश उपाध्याय गवाह हैं।  अनिल मिश्रा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी भी हैं व राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व प्रांत कार्यवाहक तथा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के आजीवन सदस्य हैं। इन्हें प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी द्वारा राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया है। श्री ऋषिकेश उपाध्याय अयोध्या के मेयर भी हैं और प्रमुख भाजपा नेता भी, जो प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नजदीकी हैं। 

 (vi)         गड़बड़झाला केवल इस बात से ही साफ है कि 18 मार्च 2021 को शाम 7:10 व 7:15 बजे यानि पाँच मिनट के बीच रजिस्टर्ड दोनों कागजात में राम मंदिर निर्माण के लिए खरीदी जा रही जमीन की कीमत ₹2 करोड़ से बढ़कर ₹18.5 करोड़ हो जाती है। दुनिया के इतिहास में 5,50,000 रुपया प्रति सेकंड के हिसाब से बढ़ने वाली जमीन की यह अनोखी कीमत है। इस पैसे का भुगतान उस धनराशि से किया गया, जो करोड़ों भारतीयों ने आस्था से मंदिर निर्माण के लिए दी थी।

(vii)         चौंकानेवाली बात यह भी है कि रवि मोहन तिवारी व सुल्तान अंसारी द्वारा जमीन खरीदने के लिए स्टांप ड्यूटी जमा करवा ई-स्टांप सर्टिफिकेट 18 मार्च, 2021को शाम 5:22 बजे जारी हुआ। परंतु श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जो जमीन रवि मोहन तिवारी व सुल्तान अंसारी से खरीदी गई, उसके लिए स्टांप ड्यूटी जमा कर ई-स्टांप सर्टिफिकेट 18 मार्च, 2021 को शाम 5:11 बजे ही जारी हो गया। यानि ट्रस्ट ने रवि मोहन तिवारी व सुल्तान अंसारी से जमीन खरीदने के लिए स्टांप ड्यूटी पहले ही जमा करवा दी थी, वो भी उस समय, जब न तो रवि मोहन तिवारी व सुल्तान अंसारी जमीन के मालिक थे और न ही उन्होंने जमीन खरीद की स्टांप ड्यूटी जमा करवा ई-स्टांप सर्टिफिकेट लिया था। 

राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट व उसके सेक्रेटरी,  चंपतराय को 18 मार्च, 2021 को शाम 5:11 बजे कैसे पता था कि रवि मोहन तिवारी व सुलतान अंसारी यह ज़मीन खरीदने के स्टांप पेपर 18 मार्च, 2021 को शाम 5:22 बजे खरीदेंगे व शाम 7:10 बजे रजिस्ट्री करवाएंगे व उसके पाँच मिनट के बाद 2 करोड़ में खरीदी ज़मीन को ₹18.5 करोड़ में राम मंदिर ट्रस्ट को बेच देंगे। गड़बड़झाला साफ है।

o   क्या कारण है कि सेल डीड (A1) में मात्र 2 करोड़ में खरीदी गई ज़मीन श्री राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट को ₹26,50,00,000 (26.50 करोड़ रु.) (सेल डीड A3 व A5) में बेच दी गई?

o   जब यह ज़मीन वक्फ़ की संपत्ति थी व इसकी ख़रीद-फरोख़्त पर स्टे जारी किया गया था, तथा इसके बेचने बारे थ्प्त् छवण् 0040 पुलिस स्टेशन राम जन्मभूमि, अयोध्या दिनांक 22.04.18 (A2) दर्ज थी, तो किस फर्ज़ीवाड़े के चलते इस ज़मीन की रजिस्ट्री राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के नाम करवा राम मंदिर निर्माण के चंदे में से 26.50 करोड़ की राशि का घालमेल किया गया?

o   क्या तथ्यों से यह साफ नहीं कि 18 मार्च, 2021 को शाम 7:10 बजे 12,080 वर्गमीटर भूमि सेल डीड A4 से 2 करोड़ में खरीदी गई और राम जन्मभूमि ट्रस्ट के ट्रस्टी अनिल मिश्रा सेल डीड A4 के गवाह हैं? तो फिर मात्र 5 मिनट के बाद शाम 7:15 बजे यही भूमि राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने 18.50 करोड़ (सेल डीड A5) में क्यों खरीदी (ट्रस्टी  अनिल मिश्रा फिर गवाह हैं)? क्या घालमेल साफ नहीं? 

o   जब 18 मार्च 2021 को शाम 6.51 बजे इसी भूभाग में से 10,370 वर्ममीटर भूमि राम जन्मभूमि ट्रसट द्वारा 8 करोड़ रु. (सेल डीड A3) में खरीदी गई थी, तो सिर्फ 23 मिनट बाद 18 मार्च2021 को शाम 7:15 बजे इसी भूभाग की 12,080 वर्ग मीटर भूमि रामज जन्मभूमि ट्रस्ट द्वारा ₹18.50 करोड़ में कैसे खरीद ली गई?

2.         अयोध्या के भाजपाई मेयर के भतीजे ने 80 दिन में 20 लाख की ज़मीन राम मंदिर ट्रस्ट को ₹2,50,00,000 में बेची

    (i)         दीप नारायण उत्तर प्रदेश का भाजपाई नेता है तथा भाजपा आईटी सेल से जुड़ा है। यह उसके फेसबुक प्रोफाईल से भी साफ है, जिसकी कॉपी संलग्नक A6 है। दीप नारायण अयोध्या के भाजपा के मेयर, श्री ऋषिकेश उपाध्याय का रिश्ते में भांजा भी लगता है। यह भी सर्वविदित है कि ऋषिकेश उपाध्याय श्री नरेंद्र मोदी व श्री आदित्यनाथ के चहेते हैं। 

  (ii)         20 फरवरी, 2021 को दीप नारायण ने अयोध्या में ‘’हवेली अवध’’ के नाम से 890 वर्गमीटर भूमि ₹20 लाख में खरीदी। सेल डीड संलग्नक A7 है। यानि भूमि का खरीद रेट ₹2,247 प्रति वर्गमीटर है, जबकि सेल डीड के मुताबिक ही भूमि का कलेक्टर रेट ₹4,000 प्रति वर्गमीटर है। 

 (iii)         79 दिन के बाद यानि 11 मई, 2021 को भाजपा नेता, दीप नारायण ने यह भूमि ‘‘श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र मार्फत चंपतराय’’ को ₹2,50,00,000 (ढाई करोड़ रु.) में बेच दी। सेल डीड की कॉपी संलग्नक A8 है। यानि भूमि का खरीद रेट 28,090 रु. प्रति वर्गमीटर है, जबकि सेल डीड के मुताबिक भूमि का कलेक्टर रेट 4,000 रु. प्रति वर्गमीटर है। 80 दिन में ज़मीन की कीमत 1250 प्रतिशत बढ़ गई। जो ज़मीन भाजपा नेता दीप नारायण द्वारा 2247रुपया प्रति वर्गमीटर के भाव से खरीदी गई, वही ज़मीन 80 दिन में राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट को 28,090 प्रति वर्गमीटर के हिसाब से बेच दी गई। यह अपनेआप में सनसनीखेज़ घोटाला नहीं, तो और क्या है?

3.         भाजपाई नेता दीप नारायण ने उपहार में मुफ्त में ली 676 वर्गमीटर ज़मीन नौ महीने में राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट को एक करोड़ में बेची

    (i)         14 मई, 2020 को ‘‘रामचंदर, हवेली अवध, अयोध्या में भाजपाई नेता दीपनारायण (जो भाजपा के अयोध्या मेयर के भतीजे हैं) ने 676 वर्गमीटर ज़मीन हिबानामा से ली। इसकी कॉपी A9 संलग्न है। 

  (ii)         20 फरवरी, 2021 को यानि लगभग 9 महीने बाद भाजपाई नेता दीपनारायण ने यह ज़मीन श्री राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट मार्फ़त सेक्रेटरी चंपतराय को ₹1,00,00,000 (1 करोड़ रु.) में बेच दी। इस सेल डीड में भी डॉ. अनिल कुमार मिश्र गवाह हैं। यह सेल डीड भी तहसील की रजिस्ट्री का समय खत्म होने के बाद शाम को 7:30 बजे रजिस्टर करवाया गया। सेल डीड की कॉपी A10 संलग्न है।

आदित्यनाथ सरकार के मुताबिक इस ज़मीन का कलेक्टर रेट ₹4000 है, पर राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट को यह ज़मीन ₹14,793 वर्गमीटर के रेट से बेची गई। यानि कलेक्टर रेट से 350 प्रतिशत अधिक। गड़बड़झाला साफ है।    

o   प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री आदित्य नाथ राम मंदिर निर्माण में चंदे की इस लूट पर चुप क्यों हैं? 

o   क्या राम मंदिर निर्माण में ‘‘चंदाचोरी’’ की जाँच होगी और क्या दोषियों को सजा मिलेगी? 

o   क्या राम मंदिर ट्रस्ट के सचिव,  चंपतराय व ट्रस्टी, श्री अनिल मिश्रा की जाँच होगा? 

o   क्या अयोध्या के भाजापाई मेयर, भाजपाई विधायकों व इनके नेताओं की जाँच होगी?

o   क्या सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट में हो रही चंदे की हेराफेरी का संज्ञान लेगा?

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