वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के 25वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न

 
लखनऊः(मानवी मीडिया)उत्तर प्रदेश की राज्यपाल  आनंदीबेन पटेल ने आज वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के महंत अवेद्यनाथ संगोष्ठी भवन में आयोजित 25वें दीक्षांत समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि सभी विद्यार्थियों के लिए दीक्षांत समारोह उनकी शैक्षणिक यात्रा का महत्वपूर्ण अंश होता है। यह अवसर उनकी मेहनत एवं उपलब्धियों का प्रतीक है। यहाँ से जीवन की एक यात्रा का आरम्भ होता है जब विद्यार्थी इस अर्जित शिक्षा का उपयोग कर जनमानस की सेवा करता है। उन्होंने दीक्षांत समारोह में उपस्थित सभी विद्यार्थियों की सफलता की कामना करते हुए कहा कि सभी विद्यार्थी अपने आगामी जीवन के दायित्वों में इस विश्वविद्यालय से प्राप्त अनुभवों का प्रयोग कर सफल होंगे और निरन्तर प्रगति करते हुए अपने परिवार के साथ-साथ राष्ट्र व समाज के उत्थान में भी अपना बहुमूल्य योगदान देंगे।

कुलाधिपति ने कहा कि पूर्वांचल की मिट्टी में कुछ खास है तभी यहां की बेटियां बेटों से आगे हैं। उन्होंने कहा कि मेधावियों को यहां 65 गोल्ड मेडल दिये गये जिसमें से 75 फीसदी मेडल बेटियों ने प्राप्त किये हैं, यह स्थिति काफी अच्छी है। बेटियां आगे बढ़ रहीं हैं। आज के वातावरण में सोच और समझ में परिवर्तन आया है उसी से बेटियां आगे बढ़ी हैं।

राज्यपाल  ने कहा कि दीक्षांत समारोह में प्राथमिक विद्यालयों से आंमत्रित छोटे बच्चों के संबंध में बोलते हुए कहा कि ऐसे छोटे बच्चे गाँव से जब विष्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में आते हैं तो यहाँ की भव्यता देखकर वह मन में सोच कर जायेंगे कि जब हम पढेंगे तभी यहाँ तक पहुंचेंगे। इस सोच के साथ बच्चों को आमंत्रित किया जाता है। राज्यपाल  ने कहा कि जब बच्चे दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल पाने वालों को देखतें है तो उनमें उन जैसा बनने की चाहत होती है। उन्होंने कहा कि कोविड टीकाकरण शत-प्रतिशत हो इसके लिए गाँव में जाकर ग्रामीणों को प्रेरित करना चाहिए। समाज के साथ निरंतर विष्वविद्यालय का संपर्क बना रहना चाहिए। उन्होंने भाषण के अंत में विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में ऐसा काम करें जिससे कि आपको आने वाली पीढ़ी याद करें। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी समस्याओं का विकास हम स्वयं करें तभी सम्पूर्ण देश का विकास होगा।  

समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाली छात्राओं को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि वे अपने अधिकारों को समझें और समाज में उन महिलाओं तक भी पहुंचाएं जो किन्ही कारणों से स्तरीय शिक्षा प्राप्त नहीं कर पायीं हैं। अपने सम्बोधन में उन्होंने बेटियों की शिक्षा को ज़रूरी बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षित बेटियां ही आगे जाकर माँ की भूमिका में बच्चों को अच्छे संस्कार देती हैं और इस प्रकार देश को सभ्य नागरिक देती हैं।

इस अवसर पर राज्यपाल  ने विश्वविद्यालय की वार्षिक पत्रिका गतिमान का विमोचन किया तथा मुख्य अतिथि पद्म श्री प्रो0 जे0एस0 राजपूत को मानद उपाधि दी, जबकि रसायन विज्ञान के प्रो0 दीपक पठानिया को डी0एससी0 की उपाधि दी। हाल ही में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जान गंवाने वाले देश के सीडीएस जनरल बिपिन रावत व अन्य वीर सैन्य कर्मियों को अपनी श्रद्धांजलि दी।
मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. जे. एस. राजपूत ने कहा कि ज्ञान से पवित्र कुछ नहीं है। शिक्षा चरित्र निर्माण के लिए होनी चाहिए। इसका विश्लेषण करिए की आप ने व्यक्तित्व विकास के लिए क्या किया? उन्होंने कहा कि शिक्षा अध्ययन, मनन, चिंतन और उपयोग के लिए होनी चाहिए। हमें देश, परम्परा और ज्ञान की शक्ति को पहचानना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवनपर्यंत सीखने की बात है। समय बदल रहा है, पहले विज्ञान पर बात होती थी फिर विज्ञान, तकनीक और अब तकनीक और संचार की बात हो रही है। उन्होंने कहा कि विश्व में वही देश आगे जाएगा जिसके पास बौद्धिक संपदा होगी। शिक्षक बनने जा रहे लोग यह समझे की आप भविष्य के निर्माता हैं। आपकी शिक्षा देश की प्रगति में योगदान देने वाली हो।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो0 निर्मला एस0 मौर्य ने बताया की दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने स्नातक के 18 तथा स्नातकोत्तर के 47 कुल 65 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किया है, इनमें से 47 छात्रायें और 18 छात्र हैं। अगर इसे प्रतिशत में देखें तो छात्राएँ 72 प्रतिशत हैं तथा छात्र 28 प्रतिशत हैं। उन्होंने बताया कि इस दीक्षांत समारोह में कुल एक लाख पैंसठ हजार चार सौ छब्बीस विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की जा रही है, जिसमें  से पैंसठ हजार एक सौ अड़तीस छात्र एवं एक लाख दो सौ तिरासी छात्रायें हैं। इस प्रकार छात्राओं का 60.6 प्रतिशत है तथा छात्रों का 39.4 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त एक डी0एससी0 की उपाधि तथा छियानवे पीएच0डी0 की उपाधि प्रदान की गई हैं। जिसमें महिला शोधार्थियों की संख्या बत्तीस तथा पुरुष शोधार्थियों की संख्या चौंसठ है। इस अवसर पर राज्यपाल  की प्रेरणा से कक्षा-6 से 8 तक के कुल 51 बच्चों को स्कूल बैग, पठन-पाठन सामग्री एवं फल वितरण भी किया।

समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न परिषदों, समितियों के सदस्य एवं अधिश्ठातागण, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक, अधिकारीगण, कर्मचारीगण, विद्यार्थीगण तथा अन्य गणमान्य अतिथि गण उपस्थित थे।

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