देव दीपावली के लिए 1500 से ज्यादा नावें बुक 175 होटल फुल, स्टीमर खाली नहीं


वाराणसी (
मानवी मीडिया) 19 नवंबर, यानि आने वाले शुक्रवार को देव दीपावली मनाई जाएगी। इसको लेकर गंगा घाटों पर पूरे पुख्ता इंतजाम कर लिए गए हैं। इस बार यहां पर दो लाख से ज्यादा सैलानियों के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। लेकिन, दो दिन पहले से ही यहां पर 1500 से अधिक छोटी-बड़ी नावों, बजरों और स्टीमरों में से एक भी खाली नहीं है। वहीं, गंगा घाटों के 500 मीटर के दायरे में आने वाले 175 से ज्यादा होटलों, लॉज और धर्मशालाओं के कमरे बुक हो चुके हैं। दूर छावनी क्षेत्र और कैंट रेलवे स्टेशन के सामने भी यही हाल है।

15 हजार से लेकर 3 लाख तक की बुकिंग

अस्सी घाट पर मौजूद नाविक दीपक साहनी ने बताया कि छोटी नाव जो हाथ से चलती है और जिनमें 6 से 7 लोग बैठ सकते हैं उनकी बुकिंग लगभग 15 से 20 हजार रुपए में हुई है। इंजन वाली जो नावें हैं और जिनमें तकरीबन 25 लोग बैठ सकते हैं, वह 50 से 75 हजार रुपए तक बुक हुई हैं।

बजरे छोटे से लेकर बड़े तक डेढ़ लाख से ढाई लाख रुपए तक बुक हुए हैं। देव दीपावली के दिन नावों और बजरों को झालरों से सजाया जाएगा। दीपक ने कहा कि अब शायद ही कोई नाविक बचा होगा। जिसकी नाव की बुकिंग न हुई हो।

तीनों क्रूज फुल, 12 हजार रुपए प्रति व्यक्ति किराया

दीपक साहनी ने कहा कि यह साल भर का एक ऐसा दिन होता है जिस दिन गंगा मैया अपने पुत्रों को कमाने का एक अच्छा अवसर देती हैं और लोग भी हंसी-खुशी अपने मन से पैसा देते हैं। नाविकों से अपील यही है कि सभी लोग अपने नावों में लाइफ जैकेट रखें।

शराब के नशे में नाव न चलाएं और पुलिस-प्रशासन का सहयोग करें। उधर, गंगा में चलने वाले तीनों क्रूज में प्रति व्यक्ति 12 हजार रुपए किराया है। क्रूज संचालन से जुड़े विकास मालवीय ने बताया कि कोरोना काल के बाद यह एक अच्छा अवसर आया है। तीनों ही क्रूज फुल हो चुके हैं और उनमें अब जगह नहीं बची है।

महीने भर पहले ही हो गई थी बुकिंग

अस्सी घाट पर खड़ी नावें। देव दीपावली के दिन गंगा घाटों पर पैर रखने की जगह नहीं बचेगी और कोई नाव खाली नहीं मिलेगी।

द बनारस होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष गोकुल शर्मा ने बताया कि देव दीपावली के मद्देनजर होटलों के कमरे लगभग महीने भर पहले ही बुक हो गए थे। बाहर से आने वाले लोग ज्यादातर गंगा घाटों के आसपास के क्षेत्र में ही होटलों के कमरे खोजते हैं।

लगभग 2 साल से बेजान से पड़े होटल कारोबार के लिए यह देव दीपावली एक बड़ी संजीवनी का काम करेगी। कोरोना की पहली लहर के बाद पिछले साल भी काशी में देव दीपावली मनाई गई थी लेकिन इस बार जैसा श्रद्धालुओं और सैलानियों का उत्साह नहीं दिखा था। उम्मीद है कि सैलानियों के इस सीजन में आगे भी इसी तरह से सब कुछ अच्छा ही रहेगा।

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