उ0प्र0 में विदेशी सब्जियों की खेती को बढ़ावा


 नई दिल्ली (मानवी मीडिया): उत्तर प्रदेश में किसानों को अतिरिक्त आमदनी बढ़ाने और पोषक आहार उपलब्ध कराने के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी सब्जियों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ किसानों को शरदकालीन सब्जियों विशेषकर ब्रोकली के पौधे उपलब्ध करा रहा है, जिसे इस मौसम में तैयार करना आम लोगों के बूते में नहीं है। किसानों को अबतक करीब ढाई लाख ब्रोकली के पौधे उपलब्ध कराए गए हैं। संस्थान ने किसानों को शरदकालीन विदेशी सब्जियों के महत्व को समझाया है और उनके पोषक तत्वों के बारे में व्यापक जानकारी दी है जिससे वे अपने परिवार को संतुलित आहार दे सकें। संस्थान के अनुसार पिछले साल इन किसानों ने करीब तीस लाख रुपए के सब्जियों को उगाया था। अतिरिक्त सब्जियों को स्थानीय बाजार में बेचा गया था जिससे उन्हें अतिरिक्त आय हुई थी ।

संस्थान के निदेशक शैलेंद्र राजन के अनुसार ब्रोकली के स्थानीय बाजार में अच्छा मूल्य मिलने के कारण किसान इसकी खेती में अधिक दिलचस्पी ले रहे हैं। इसके कारण बड़ी संख्या में किसानों को इसके पौधे दिए गए हैं। बायोक्टिव तत्वों और पोषक तत्वों के कारण लखनऊ और अन्य स्थानों पर इसकी पिछले दिनों भारी मांग रही है। किसानों को फूलगोभी और बंदगोभी की खेती से बेहतर आय नहीं मिलता है लेकिन इसी जमीन में ब्रोकली की खेती से उन्हें बेहतर आमदनी होती है जिसके कारण गांव में ब्रोकली की खेती अब आम हो गई है। इसकी बाजार में मांग है और उन्हें आसानी से अच्छा मूल्य मिलता है।

अमृत भारत महोत्सव कार्यक्रम के तहत किसानों को पोषक तत्त्व वाले भोज्य पदार्थों के बारे में जागरुक किया गया है तथा फलों और सब्ज़ियों के खाने से शरीर में होने वाले फायदे को बताया गया है। डॉक्टर राजन के अनुसार लोगों को स्वस्थ और चुस्त दुरुस्त रहने के लिए फलों और सब्ज़ियों का नियमित रुप से सेवन जरूरी है। मौसम के दौरान आसानी से देहातो में उपलब्ध आम , अमरुद में फ्लेवोनॉयड , पॉलीफेनोली एसिड और कई प्रकार के विटामिन मिलते हैं जो कैंसर , हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों के खतरे को कम करते हैं।

संस्थान न केवल किसानों को उच्च गुणवत्ता के पौधे उपलब्ध करा रहा है बल्कि उन्हें भरपूर उत्पादन और बाजार प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दे रहा है। सरकारी नीतियों और किसान हिताशी तकनीकों के कारण बागवानी क्षेत्र पिछले कई वर्षो से अर्थव्यवस्था को नई गति दे रहा है। इसके लिए वैज्ञानिक किसानों के साथ लगातार संवाद कर रहे हैं, उनके खेतों का निरीक्षण कर सही सलाह दे रहे हैं तथा समय पर आवश्यक जरूरी सामग्री उपलब्ध कराया जा रहा है।

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