राज्यपाल ने किया के0जी0एम0यू0 में “रक्तदान को सम्मान कार्यक्रम” का शुभारम्भ

रक्तदान के लिये उत्कृष्ट योगदान देने वाली संस्थायें सम्मानित

स्वैच्छिक रक्तदान सर्वोत्तम कार्य

देश में किसी की मृत्यु रक्त की कमी से न हो

रक्तदान शिविर स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने में सहायक

 आनंदीबेन पटेल

लखनऊ : (मानवी मीडिया)उत्तर प्रदेश की राज्यपाल  आनंदीबेन पटेल ने आज किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ के ब्राउन हाल में राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के अवसर पर आयोजित रक्तदान शिविर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस की बधाई देते हुये कहा कि यह दिवस हम सभी को अधिक से अधिक स्वैच्छिक रक्तदान की प्रेरणा देता है। उन्होंने ‘‘रक्तदान को सम्मान कार्यक्रम’’ के अन्तर्गत उपस्थित स्वैच्छिक रक्तदान करने वाली समस्त संस्थाओं, स्वैच्छिक रक्तदाताओं, प्लाज्मादाताओं तथा उत्प्रेरकों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने रक्तदान एवं प्लाज्मा दान कर रोगियों की जान बचाने में सहयोग किया।

राज्यपाल ने कहा कि आज समय की आवश्यकता है कि समस्त कालेज अपने छात्रों को रक्तदान के साथ-साथ अंगदान के लिये भी प्रेरित करें। इसके लिए हमें प्रयास करने होंगे, बदलाव धीरे-धीरे होता है। चिकित्सकों का कर्तव्य है कि वे मरीज को अच्छी चिकित्सा सुविधा दें। उन्होंने कहा कि जब प्रतिष्ठित बड़ी हस्तियां, समाज सेवी संस्थायें, बड़े अधिकारी आदि रक्तदान करते हैं तो सन्देश दूर तक जाता है और लोग प्रेरित भी होते हैं। इसलिये इस सच्ची सेवा एवं महादान के लिये हमें आगे आना चाहिये तथा अधिक से अधिक कैम्प लगाकर इस महादान के प्रति जागरूकता पैदा करनी चाहिये।


राज्यपाल  ने कहा कि उत्तर प्रदेश की आबादी का एक प्रतिशत लोग भी अगर रक्तदान करें तो प्रदेश में रक्त की आवश्यकता को पूरा किया जा सकता है। लेकिन कुछ भ्रांतियों के कारण व जागरूकता के अभाव में लोग रक्तदान करने से बचते हैं। इसलिये रक्तदान के प्रति जागरूकता अत्यंत जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी दशा में देश में किसी की मृत्यु रक्त की कमी से न हो। इसके लिये स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के साथ-साथ हमें इस कार्य को निःस्वार्थ भाव से करना होगा।

राज्यपाल  ने के.जी.एम.यू. के ट्रांसफ्यूज मेडिसिन विभाग द्वारा कोरोना काल के दौरान रक्तदान और प्लाज्मादान से मरीजो की जान बचाने की सराहना की और कहा कि ये गर्व की बात है कि ये विभाग देश का सबसे बड़ा रक्त बैंक है और किसी की जिन्दगी बचाने के लिये किया गया ये दान सबसे महान दान है। इस अवसर पर राज्यपाल  ने रक्तदान शिविरों का आयोजन करने वाली संस्थाओं को सम्मानित किया तथा एक स्मारिका का विमोचन भी किया।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री  सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि हमारे जीवन का उद्देश्य है कि हम दूसरे के जीवन को आसान बनाने के लिए कुछ न कुछ करें। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है कि हमें स्वेच्छापूर्वक दान करना चाहिए और रक्तदान से बढ़कर कोई दूसरा दान नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि यद्यापि रक्तदान को लेकर बहुत सारी भ्रांतियां हैं, जिन्हें दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए। लोगों को समझाना होगा कि रक्तदान करने से किसी भी प्रकार की कोई कमजोरी नहीं आती बल्कि व्यक्ति यदि रक्तदान करता है तो उसे विभिन्न बीमारियों के होने का खतरा कम होता है।


विधि एवं न्याय मंत्री  बृजेश पाठक ने कहा कि रक्त के बगैर हमारा जीवन आगे नहीं बढ़ सकता है। इसलिए हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा स्वैच्छिक संगठनों को रक्तदान के लिए लोगों को प्रेरित करने की अपील की तथा अधिक से अधिक ब्लड डोनेशन कैम्प लगाकर लोगों को जागरूक करने का सुझाव दिया।

के.जी.एम.यू. के कुलपति डा0 विपिन पुरी ने बताया कि रक्तदान दिवस का शुभारम्भ 1 अक्टूबर 1975 को हुआ था। उन्होंने कहा कि रक्तदान करना दिल की सेहत को सुधार सकता है और दिल की बीमारियों और स्ट्रोक के खतरे को कम करता है। डा0 पुरी ने बताया कि रक्तदान करने के बाद लगभग 10 मिनट आराम से लेटे रहना जरूरी होता है। रक्तदान 18 से 60 वर्ष तक की उम्र का स्वस्थ व्यक्ति कर सकता ह,ै इससे किसी प्रकार की कोई कमजोरी नहीं आती है।

इस अवसर पर चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार सहित सम्मानित होने वाले विभिन्न स्वयं सेवी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

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