रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रद्द कर दिया इस बड़े बैंक का लाइसैंस

नई दिल्ली (मानवी मीडिया) रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने महाराष्ट्र के डॉ. शिवाजीराव पाटिल निलंगेकर अर्बन को ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का लाइसेंस रद्द कर दिया है। आरबीआई ने ये कदम बैंक की खराब वित्तीय हालत के चलते लिया है। लाइसेंस रद्द किए जाने के साथ ही बैंक के जमा लेने और पेमेंट करने पर भी रोक लगा दी गई है।

बता दें कि देश में खेती एवं ग्रामीण इलाकों के लिए साख-सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले सहकारी बैंकों की स्थापना राज्य सहकारी समिति अधिनियम के अनुसार की जाती है। इनका रजिस्ट्रेशन “रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटी के पास किया जाता है। मौजूदा समय में 1482 को-ऑपरेटिव बैंकों में क़रीब 8.6 करोड़ जमाकर्ताओं के 4.84 लाख करोड़ रुपये जमा हैं। आरबीआई का कहना है कि महाराष्ट्र के डॉ. शिवाजीराव पाटिल निलंगेकर अर्बन को ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का लाइसेंस रद्द कर दिया है। बैंक का बने रहना उसके जमाकर्ताओं के हितों के लिए सही नहीं है।

अगर बैंक को अपने बैंकिंग बिजनेस को और आगे करने की अनुमति दी जाती है तो इससे लोगों के पैसों पर निगेटिव असर होगा। लाइसेंस रद्द किये जाने के साथ ही बैंक के जमा स्वीकार करने और भुगतान करने पर रोक लगा दी गई है। बता दें कि RBI ने पिछले 24 घंटे में ये 2 बड़े फैसले लिए हैं।

इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को Mastercard Asia/Pacific Pte Ltd पर कार्रवाई करते हुए 22 जुलाई से अपने कार्ड नेटवर्क पर नए घरेलू डेबिट, क्रेडिट या प्रीपेड ग्राहकों को शामिल करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। आरबीआई की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, कंपनी ने भुगतान प्रणाली डेटा के भंडारण पर आरबीआई के मानदंडों का उल्लंघन किया है, इसलिए RBI ने मास्टरकार्ड पर रोक लगाने का फैसला लिया है। यह रोक पेमेंट सेक्शन 17 और सैटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 के तहत लगाई गई है।

RBI के फैसले के बाद बैंक नए मास्टर कार्ड जारी नहीं कर पाएंगे। हालांकि रिजर्व बैंक ने स्‍पष्‍ट किया है कि पुराने मास्टर कार्ड जारी रहेंगे। इसका मतलब साफ है कि उनके डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर सभी सर्विस पहले की तरह जारी रहेंगी। आरबीआई के आदेश का मास्टरकार्ड के मौजूदा ग्राहकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। आरबीआई द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि ‘मास्टरकार्ड’ डेबिट और क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले सभी बैंकों और गैर-बैंकों को इन निर्देशों का पालन करने की सलाह देगा।

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि आरबीआई ज्यादातर बैंकों पर जुर्माना लगाता है, लेकिन कुछ परिस्थितियां में ग्राहकों की सुरक्षा के हित में उसे लाइसेंस भी रद्द करना पड़ता है। आरबीआई के मुताबिक बैंक का बने रहना उसके जमाकर्ताओं के हित में नहीं था। बैंक अपनी खराब वित्तीय स्थिति की वजह से मौजूदा जमाकर्ताओं को पूरा भुगतान करने में असमर्थ होगा।

 

 


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